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Gurugram News: स्वास्थ्य विभाग दे रहा कुपोषित पर ध्यान, तीन में महीने में मिले 12 बच्चे

Wed, 30 Jul 2025 07:26 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 07:26 PM IST
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Health department is paying attention to malnourished, 12 children found in three months
डाइट काउंसलिंग के साथ विशेष कैंप में किया जाता है इलाज,मोबाइल, हेल्थ टीम करती है साल में दो बार जांच
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सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम।
जिले में स्वास्थ्य विभाग कुपोषण से पीड़ित बच्चों की देखभाल के लिए प्रयास कर रहा है। विभाग की ओर से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सालभर जांच और सर्वे के माध्यम से विशेष अभियान चलाए जाते रहते है। इस वर्ष जनवरी से मार्च माह के दौरान 12 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) के शिकार पाए गए। इन सभी बच्चों को विशेष डाइट काउंसिलिंग दी जा रही है ताकि उनके खान-पान की आदतों में सुधार लाया जा सके। बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को उनकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी हर 15 दिन में बच्चों का फॉलोअप करते हैं।

कुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधाओं के लिए फरीदाबाद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है। वहां बच्चों के पोषण स्तर के साथ-साथ उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल हेल्थ टीम साल में दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा कर बच्चों की जांच करती है। हाल ही में एक बच्चे को एनआरसी (न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर) भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
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मोबाइल हेल्थ टीम करती हैं सर्वे
कुपोषण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को विभिन्न क्षेत्रों में बांटकर मोबाइल हेल्थ टीम बनाई हुई है। हेल्थ टीम साल में दो बार अप्रैल से जून और जनवरी से मार्च के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है। इसके साथ ही जुलाई से दिसंबर के बीच जिले के 574 विद्यालयों में साल में एक बार बच्चों की जांच की जाती है। जांच के दौरान कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित इलाज व डाइट काउंसिलिंग दी जाती है। टीम द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। अभिभावक बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।
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कुपोषण के लक्षण
बच्चों में कुपोषण के कई लक्षण हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. रश्मि बत्रा ने बताया कि शारीरिक विकास में रुकावट (जैसे, अपेक्षित दर से वजन न बढ़ना), व्यवहार में परिवर्तन (जैसे, चिड़चिड़ापन, सुस्ती), ऊर्जा के स्तर में कमी, और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली कुपोषण के लक्षण हैं। त्वचा और बालों में परिवर्तन, मांसपेशियों का क्षय, और पेट या पैरों में सूजन भी कुपोषण का संकेत हो सकता है।


जिले में सभी बच्चों स्वस्थ रहें इसके लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। यदि इस दौरान कोई बच्चा मिलता है तो उन्हें फरीदाबाद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है, जिससे उनका बेहतर ढंग से इलाज किया जा सके। - डाॅ. अलका सिंह, सीएमओ गुरुग्राम
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