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पारस अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज
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गुरुग्राम। कमर दर्द का इलाज कराने पारस अस्पताल गए वायुसेना के पूर्व अधिकारी को कोरोना संक्रमित बताकर बिना इलाज बाहर निकालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पूर्व सेवा अनुबंध स्वास्थ्य योजना (ईएससीएच) के तहत उनके इलाज के लिए 2.20 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें करीब साढ़े 12 हजार रुपये का बिल दे दिया और इसे जमा कराने के लिए दबाव बनाया। स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर उन्होंने जांच कराई तो कोरोना संक्रमित नहीं पाए गए। इसकी शिकायत तीन महीने तक स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच लटकी रही। जिला उपायुक्त व पुलिस उपायुक्त से शिकायत करने के बाद सुशांत लोक थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
वायुसेना से सेवानिवृत्त मेघदूत अपार्टमेंट निवासी सुभाष चंद वैद्य कमर में दर्द होने के कारण 18 मई को पारस अस्पताल में ईएससीएच से 2.20 लाख रुपये स्वीकृत कराने के बाद गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने के साथ ही उनकी कोरोना जांच की। इसकी रिपोर्ट देर रात आ गई। इसके बाद अस्पताल ने उन्हें संक्रमित बताते हुए छुट्टी दे दी और करीब साढ़े 12 हजार रुपये का बिल दे दिया। बिना इलाज किए ही उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया गया। रुपये जमा कराने के लिए उन्हें तीन घंटे तक प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर देते हुए स्वयं को अलग फ्लैट में क्वारंटीन कर लिया।
इस मामले की शिकायत जिला उपायुक्त और पुलिस उपायुक्त से की गई तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को जांच के निर्देश दिए। करीब एक महीने तक चली जांच में रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार करना पाया गया। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को सौंप दी। इसके आधार पर मामला दर्ज किया गया है।
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अपार्टमेंट के 126 परिवार हुए परेशान
सुभाष चंद वैद्य ने बताया कि अस्पताल की गलत रिपोर्ट का खामियाजा केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि मेघदूत अपार्टमेंट के 126 परिवारों को भुगतना पड़ा। जांच में सभी की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने उनकी दो बार जांच की और दोनों ही बार रिपोर्ट निगेटिव आई। इससे पूर्व अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने उनकी सोसाइटी को भी हाई रिस्क जोन में तब्दील कर सील कर दिया था।
स्वास्थ्य विभाग कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप
उन्होंने कहा कि पारस अस्पताल ने शिकायत करने पर रिपोर्ट मॉर्डर्न लैब द्वारा तैयार कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की, लेकिन वहां से मामला पुलिस का होने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। पुलिस को शिकायत देने पर उन्हें स्वास्थ्य विभाग के पास भेज दिया गया। इस पर उन्होंने जिला उपायुक्त व पुलिस उपायुक्त पूर्वी को शिकायत दी। उन्होंने शिकायत में स्वास्थ्य विभाग कर्मियों पर अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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वायुसेना से सेवानिवृत्त मेघदूत अपार्टमेंट निवासी सुभाष चंद वैद्य कमर में दर्द होने के कारण 18 मई को पारस अस्पताल में ईएससीएच से 2.20 लाख रुपये स्वीकृत कराने के बाद गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने के साथ ही उनकी कोरोना जांच की। इसकी रिपोर्ट देर रात आ गई। इसके बाद अस्पताल ने उन्हें संक्रमित बताते हुए छुट्टी दे दी और करीब साढ़े 12 हजार रुपये का बिल दे दिया। बिना इलाज किए ही उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया गया। रुपये जमा कराने के लिए उन्हें तीन घंटे तक प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर देते हुए स्वयं को अलग फ्लैट में क्वारंटीन कर लिया।
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इस मामले की शिकायत जिला उपायुक्त और पुलिस उपायुक्त से की गई तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को जांच के निर्देश दिए। करीब एक महीने तक चली जांच में रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार करना पाया गया। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को सौंप दी। इसके आधार पर मामला दर्ज किया गया है।
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अपार्टमेंट के 126 परिवार हुए परेशान
सुभाष चंद वैद्य ने बताया कि अस्पताल की गलत रिपोर्ट का खामियाजा केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि मेघदूत अपार्टमेंट के 126 परिवारों को भुगतना पड़ा। जांच में सभी की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने उनकी दो बार जांच की और दोनों ही बार रिपोर्ट निगेटिव आई। इससे पूर्व अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने उनकी सोसाइटी को भी हाई रिस्क जोन में तब्दील कर सील कर दिया था।
स्वास्थ्य विभाग कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप
उन्होंने कहा कि पारस अस्पताल ने शिकायत करने पर रिपोर्ट मॉर्डर्न लैब द्वारा तैयार कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की, लेकिन वहां से मामला पुलिस का होने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। पुलिस को शिकायत देने पर उन्हें स्वास्थ्य विभाग के पास भेज दिया गया। इस पर उन्होंने जिला उपायुक्त व पुलिस उपायुक्त पूर्वी को शिकायत दी। उन्होंने शिकायत में स्वास्थ्य विभाग कर्मियों पर अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत का आरोप लगाया है।