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Gurugram News: रेनीवेल परियोजना में लाइन की मरम्मत में खानापूर्ति का आरोप
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-जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। एक ओर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए डाली गई रेनीवेल परियोजना की पाइप लाइनों की रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्ति किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
शहर के नागरिकों का कहना है कि लाइन रिपेयरिंग के दौरान जेसीबी मशीनों से सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया है, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद मलबा सड़क किनारे ही छोड़ दिया जा रहा है। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि गड्ढों को भरने के लिए जो रोड़ी और क्रशर सामग्री इस्तेमाल की जा रही है, उसमें गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार सीसी डालने के समय आवश्यक पानी का प्रयोग नहीं किया जा रहा और सूखी रोड़ी ही गड्ढों में डालकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के ठेकेदार द्वारा बिना मिस्त्री और तकनीकी निगरानी के कार्य कराया जा रहा है। रोड़ी डालने के बाद केवल वाइब्रेटर चलाकर काम किया जा रहा है, जिससे सड़कें जल्द खराब होने की आशंका बनी हुई है। शहर के लोगों का कहना है कि इस बाबत जल्द ही जिला उपायुक्त और विभाग के मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को सारे मामले से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जब इस संदर्भ में विभाग के कार्यकारी अभियंता अमित से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। एक ओर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री द्वारा जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए डाली गई रेनीवेल परियोजना की पाइप लाइनों की रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्ति किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
शहर के नागरिकों का कहना है कि लाइन रिपेयरिंग के दौरान जेसीबी मशीनों से सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया है, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद मलबा सड़क किनारे ही छोड़ दिया जा रहा है। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि गड्ढों को भरने के लिए जो रोड़ी और क्रशर सामग्री इस्तेमाल की जा रही है, उसमें गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार सीसी डालने के समय आवश्यक पानी का प्रयोग नहीं किया जा रहा और सूखी रोड़ी ही गड्ढों में डालकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
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लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के ठेकेदार द्वारा बिना मिस्त्री और तकनीकी निगरानी के कार्य कराया जा रहा है। रोड़ी डालने के बाद केवल वाइब्रेटर चलाकर काम किया जा रहा है, जिससे सड़कें जल्द खराब होने की आशंका बनी हुई है। शहर के लोगों का कहना है कि इस बाबत जल्द ही जिला उपायुक्त और विभाग के मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को सारे मामले से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जब इस संदर्भ में विभाग के कार्यकारी अभियंता अमित से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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