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Gurugram News: बिजनेस वीजा पर भारत आया था अली, महीने में लगते थे दो से तीन चक्कर

Sun, 14 May 2023 01:23 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 14 May 2023 01:23 AM IST
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Ali came to India on business visa, used to take two to three rounds in a month
कैंसर के नकली इंजेक्शन का मामला : तुर्किये के नागरिक की कुंडली खंगालने में जुटी पुलिस
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अब तक चार लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी, ट्रांसलेटर के माध्यम से हो रही पूछताछ

अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। कैंसर के नकली इंजेक्शन बेचने के मामले में खुलासे के बाद अब ड्रग कंट्रोलर विभाग और पुलिस की टीमें तुर्किये के रहने वाले मास्टर माइंड अली की कुंडली खंगालने में जुटी हुई हैं। अब तक छानबीन में इस बात का खुलासा हुआ है कि उसके पास बिजनेस वीजा है। उसका यह बीजा 2024 तक मान्य है। कारोबार के सिलसिले में वह हर माह दो से तीन बार भारत आता-जाता है। अली की तुर्किक भाषा के कारण एक ट्रांसलेटर के माध्यम से भी उससे बात की जा रही है। कैंसर के नकली इंजेक्शन के इस खेल में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

बता दें कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते टीम को बीते माह यह जानकारी मिली थी कि एक नामी अस्पताल के सामने कैंसर पीड़ित के लिए ढ़ाई लाख रुपये में कैंसर का नकली इंजेक्शन सप्लाई किया जाएगा। दस्ते ने 21 अप्रैल को मौके से नकली इंजेक्शन सप्लाई करने वाले पश्चिमी बंगाल के कोलकाता निवासी संदीप भुई को कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले डेफीब्रोटाइड इंजेक्शन के साथ पकड़ा। संदीप फिलहाल दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में किराए पर रहता है। आरोपी ने बताया कि वह मोतीउर रहमान अंसारी के लिए काम करता है।
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जिसके बाद 28 अप्रैल को मुख्य आरोपी मोतीउर रहमान अंसारी ने ड्रग्स विभाग गरुग्राम के समक्ष सरेंडर कर दिया। अंसारी ने बताया कि उसकी दवाइयां खरीदने व बेचने की कोई कंपनी नहीं है। उसने यूपी के नोएडा निवासी कनिष्क राजकुमार से इंजेक्शन मंगवाए थे। वह उससे 40 इंजेक्शन चार बार मंगवा चुका था।
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साइबर सिटी में नकली दवाई का फैला है जाल

ड्रग विभाग की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली एनसीआर में नकली दवा का बोल-बाला है। डॉक्टरों के पास इसे जांचने का कोई तरीका नहीं है। एक बार वह दवा देते हैं अगर असर नहीं कर रही है तो बदल देते हैं। बाद में वह महसूस करते हैं कि कही दवा ही तो नकली नहीं थी।

ब्रांड के नाम का खेल


दवाइयों के साल्ट को लेकर कही कोई कनफ्यूजन नहीं होता है। मेडिकल स्टोर पर एक दवा कई नाम पर मिल रही है। मेडिकल स्टोर के संचालक मोटी रकम कमाने के चक्कर में उसी दवा को कई कंपनी के नाम पर बेचते हैं। एमआर की ओर से मिलने वाले लाभ के चलते डॉक्टर उस दवा को मरीजों को लिखता है।
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ट्रांसलेटर की मदद से चल रही है पूछताछ

मामले की जांच कर रही टीम को उससे पूछताछ करने में परेशानी आ रही है। अलग-अलग नामी अस्पतालों में काम करने वाले तुर्किक भाषा के ट्रांसलेटरों के माध्यम से पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान आरोपी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिख रही है। आरोपी चार दिन की पुलिस रिमांड पर है। उसके मोबाइल डिटेल के आधार पर भारत में संपर्क रखने वालों की कुंडली खंगाली जा रही है।


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वर्जन

नकली इंजेक्शन बेचने वाले मास्टर माइंड की भाषा को समझने के लिए ट्रांसलेटर की मदद ली जा रही है। उसके पास 2024 तक का भारत में बिजनेस करने का वीजा है। साथ ही इस बात का खुलासा हुआ है कि उसकी भारत में आने-जाने की संख्या अधिक है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। - अमनदीप चौहान, जिला ड्रग कंट्रोलर अधिकारी, गुरुग्राम।
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