{"_id":"6a9bf0f906ea3b064f00b12e","slug":"uniyan-bank-scam-not-hearing-in-cbi-court-ghaziabad-news-c-30-1-gbd1012-970231-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: यूनियन बैंक के 15 करोड़ से अधिक के ऋण घोटाले में सुनवाई टली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: यूनियन बैंक के 15 करोड़ से अधिक के ऋण घोटाले में सुनवाई टली
विज्ञापन
पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने से आरोप तय करने पर नहीं हो सकी सुनवाई
अब 19 सितंबर को होगी कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 15 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ऋण घोटाले में आरोप तय करने को लेकर होने वाली सुनवाई शनिवार को टल गई। सीबीआई की विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने अब अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की है।
मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की शिकायत पर दर्ज सीबीआई केस से जुड़ा है। तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख पवन कुमार गौर की शिकायत पर सीबीआई ने 24 दिसंबर 2018 को मुकदमा दर्ज किया था। मामले में बैंक की तत्कालीन अधिकारी शेफाली शर्मा, करन दीप सिंह और निजी व्यक्तियों निखिल गौर, नितिन गौर समेत 10 आरोपी बनाए गए हैं।
सीबीआई का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेसर्स जेआर फूड्स के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये का कार्यशील पूंजी ऋण स्वीकृत कराया। इससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ। जांच में ऋण लेने के लिए प्रस्तुत किए गए व्यापारिक विवरण, लाभ-हानि खाते और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया।
विज्ञापन
सीबीआई के मुताबिक जेआर फूड्स ने 15 फरवरी 2017 को 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों में कारोबार और मुनाफे से जुड़े आंकड़ों को वास्तविक नहीं पाया गया। ऋण स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए गए दो बड़े खरीद आदेश भी जांच में फर्जी मिले।
जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक स्तर पर दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन नहीं किया गया। नई फर्म होने के बावजूद उसकी वित्तीय स्थिति और दावों की पर्याप्त जांच किए बिना बड़ी ऋण सीमा मंजूर कर दी गई। निर्धारित बैंकिंग मानकों की अनदेखी कर ऋण स्वीकृत करने और वास्तविक वित्तीय स्थिति का समुचित आकलन नहीं करने का भी आरोप है।
सीबीआई ने मामले की जांच पूरी करने के बाद वर्ष 2020 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। अब आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया को लेकर अदालत में सुनवाई चल रही है। शनिवार को पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
विज्ञापन
अब 19 सितंबर को होगी कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 15 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ऋण घोटाले में आरोप तय करने को लेकर होने वाली सुनवाई शनिवार को टल गई। सीबीआई की विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने अब अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की है।
मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की शिकायत पर दर्ज सीबीआई केस से जुड़ा है। तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख पवन कुमार गौर की शिकायत पर सीबीआई ने 24 दिसंबर 2018 को मुकदमा दर्ज किया था। मामले में बैंक की तत्कालीन अधिकारी शेफाली शर्मा, करन दीप सिंह और निजी व्यक्तियों निखिल गौर, नितिन गौर समेत 10 आरोपी बनाए गए हैं।
विज्ञापन
सीबीआई का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेसर्स जेआर फूड्स के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये का कार्यशील पूंजी ऋण स्वीकृत कराया। इससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ। जांच में ऋण लेने के लिए प्रस्तुत किए गए व्यापारिक विवरण, लाभ-हानि खाते और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया।
विज्ञापन
सीबीआई के मुताबिक जेआर फूड्स ने 15 फरवरी 2017 को 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों में कारोबार और मुनाफे से जुड़े आंकड़ों को वास्तविक नहीं पाया गया। ऋण स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए गए दो बड़े खरीद आदेश भी जांच में फर्जी मिले।
जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक स्तर पर दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन नहीं किया गया। नई फर्म होने के बावजूद उसकी वित्तीय स्थिति और दावों की पर्याप्त जांच किए बिना बड़ी ऋण सीमा मंजूर कर दी गई। निर्धारित बैंकिंग मानकों की अनदेखी कर ऋण स्वीकृत करने और वास्तविक वित्तीय स्थिति का समुचित आकलन नहीं करने का भी आरोप है।
सीबीआई ने मामले की जांच पूरी करने के बाद वर्ष 2020 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। अब आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया को लेकर अदालत में सुनवाई चल रही है। शनिवार को पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।