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Ghaziabad News: जलती मां को सूखे कपड़े से बचाने की गलती से गई दो बेटियों की जान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jun 2024 05:24 AM IST
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Two daughters lost their lives by mistake of saving their burning mother with dry clothes
साहिबाबाद। न्यू डिफेंस काॅलोनी में रसोई गैस सिलिंडर में रिसाव से लगी आग को बुझाने की कोशिश में सब्जी विक्रेता मुकेश और उनके परिवार के सदस्य एक बड़ी गलती कर बैठे। सिलिंडर से तेजी से उठी लपटों से घिरीं मुकेश की पत्नी बागमती को बचाने के लिए इन लोगों ने उन पर घर में रखे सूखे कपड़े डाले। इन कपड़ों से आग बुझने के बजाय और भड़क गई। एक-एक कर लोग कपड़े डालते रहे और खुद भी आग की चपेट में आते रहे। बागमती के साथ ही मुकेश, उनका बेटा अंकित और दो बेटियां हिमानी व प्रियंका भी बुरी तरह झुलस गए।
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बागमती, हिमानी और प्रियंका 80 से 90 फीसदी झुलसी थीं। तीनों की मौत हो गई। सिलिंडर से निकली गैस से निकली आग की लपटों की चपेट में सबसे पहले बागमती ही आई थीं। वह उस समय खाना बना रही थीं। आग लगते ही उनकी चीख निकल पड़ी। मुकेश अंकित, प्रियंका और हिमानी उन्हें बचाने के लिए रसोई की ओर दौड़ पड़े। ये सभी लोग रसोई के सामने ही खाना खा रहे थे। एक कमरे के मकान में ही एक तरफ रसोई है।
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आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि इन लोगों के रसोई तक पहुंचने से पहले ही मुकेश के दामाद सोनू को चपेट में ले लिया। वह रसोई के पास ही ग्राइंडर मशीन से दरवाजे को काटने का काम कर रहे थे। सोनू वहां से बाहर की ओर दौड़ पड़े और उन्होंने किसी तरह खुद ही अपनी आग बुझा ली। मौके पर पहुंचे पड़ोसी राजू प्रजापति ने बताया कि बागमती को बचाने की कोशिश में उनके पति, बेटे और बेटियों को लगा कि कपड़े डालकर आग बुझाई जा सकती है। शायद हड़बड़ाहट और घबराहट में वे लोग सोच नहीं पाए कि कपड़ा गीला होना चाहिए।
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रसोई में एलपीजी के दो सिलिंडर थे। एक के बाद दूसरे ने भी आग पकड़ ली थी। रसोई आग का गोला बन गई। पूरे कमरे में धुआं भर गया था। मुकेश, सोनू और अंकित 20 से 30 फीसदी झुलसे हैं। मुकेश ने एक कमरा किराये पर ले रखा है। यह निर्माणाधीन मकान उनके जीजा और सब्जी बेचने का ही काम करने वाले नाथूराम का है। नाथूराम को आग लगने का पता चला तो वह भी दौड़कर आए और आग से घिरे लोगों को बचाने का प्रयास किया। इस प्रयास में सिर में चोट लगने से वह घायल हो गए।
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