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Ghaziabad News: फर्जी इंश्योरेंरस पॉलिसी बनाने के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार
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गाजियाबाद। साइबर क्राइम की टीम ने माल वाहक वाहनों की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी बनाने वाले गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों की निशानदेही पर 12 नामी कंपनियों की फर्जी 84 पॉलिसी व दो मोबाइल बरामद किए गए हैं। आरोपियों की पहचान सरताज निवासी सराय देहलीगेट, ब्रह्मपुरी मेरठ व दीपक ठाकुर निवासी बागवाली कॉलोनी, शास्त्रीनगर कविनगर के रूप में हुई है।
एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि आरोपी अब तक 25 हजार से ज्यादा फर्जी पॉलिसी देशभर के अलग-अलग राज्यों में लोगों को सस्ते का लालच देकर बेच चुके हैं। गाजियाबाद में भी उन्होंने 100 से अधिक वाहनों की इसी तरीके से फर्जी पॉलिसी की बनाकर बेची थीं। इस मामले में विकास कश्यप व आकाश सिसौदिया को 9 मार्च और याकूब व आरिम अली को 10 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। मामले के अन्य आरोपियों की तलाश चल रही है।
-ऐसे फंसाते थे ग्राहकों को-
जिस माल वाहक की उसके स्वामी को एनओसी चाहिए, उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी की जरूरत पड़ती है। जब भी वाहन स्वामी या चालक कंपनी का इंश्योरेंस कराने के लिए जाता है तो वहां उसका अधिक पैसा लगता है। फिर वह सस्ता विकल्प ढूंढता है। इसी दौरान आरटीओ कार्यालय के आसपास रहने वाले दलालों के माध्यम से वाहन स्वामी इन लोगों के संपर्क में आता था। यह वाहन स्वामी को आधी कीमत में पॉलिसी बेचने का लालच देते थे। इसके बाद यह लोग दोपहिया वाहन का बीमा करते थे और पॉलिसी के कागज में छेड़खानी करके उसपर माल वाहक की डिटेल भर देते थे। ऐसा होने से पोर्टल पर वैध पॉलिसी की डिटेल दिखती थी, लेकिन उसपर यह पता नहीं चलता कि यह दोपहिया वाहन की पॉलिसी है। या फिर बड़े वाहन की। आरटीओ कार्यालय में पोर्टल पर वैध की डिटेल देखकर ही एनओसी जारी हो जाती थी। यह लोग कॉमर्शियल वाहनों को प्राइवेट वाहनों में परिवर्तित करने का काम भी करते थे। इनमें भी इसी तरीके का काम किया जाता था। आरोपियों के गिराेह के कुछ और लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं, पहचान कर जल्द उनकी भी गिरफ्तारी सुनिश्चित होगी।
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एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि आरोपी अब तक 25 हजार से ज्यादा फर्जी पॉलिसी देशभर के अलग-अलग राज्यों में लोगों को सस्ते का लालच देकर बेच चुके हैं। गाजियाबाद में भी उन्होंने 100 से अधिक वाहनों की इसी तरीके से फर्जी पॉलिसी की बनाकर बेची थीं। इस मामले में विकास कश्यप व आकाश सिसौदिया को 9 मार्च और याकूब व आरिम अली को 10 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। मामले के अन्य आरोपियों की तलाश चल रही है।
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-ऐसे फंसाते थे ग्राहकों को-
जिस माल वाहक की उसके स्वामी को एनओसी चाहिए, उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी की जरूरत पड़ती है। जब भी वाहन स्वामी या चालक कंपनी का इंश्योरेंस कराने के लिए जाता है तो वहां उसका अधिक पैसा लगता है। फिर वह सस्ता विकल्प ढूंढता है। इसी दौरान आरटीओ कार्यालय के आसपास रहने वाले दलालों के माध्यम से वाहन स्वामी इन लोगों के संपर्क में आता था। यह वाहन स्वामी को आधी कीमत में पॉलिसी बेचने का लालच देते थे। इसके बाद यह लोग दोपहिया वाहन का बीमा करते थे और पॉलिसी के कागज में छेड़खानी करके उसपर माल वाहक की डिटेल भर देते थे। ऐसा होने से पोर्टल पर वैध पॉलिसी की डिटेल दिखती थी, लेकिन उसपर यह पता नहीं चलता कि यह दोपहिया वाहन की पॉलिसी है। या फिर बड़े वाहन की। आरटीओ कार्यालय में पोर्टल पर वैध की डिटेल देखकर ही एनओसी जारी हो जाती थी। यह लोग कॉमर्शियल वाहनों को प्राइवेट वाहनों में परिवर्तित करने का काम भी करते थे। इनमें भी इसी तरीके का काम किया जाता था। आरोपियों के गिराेह के कुछ और लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं, पहचान कर जल्द उनकी भी गिरफ्तारी सुनिश्चित होगी।
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