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Ghaziabad News: घर में लक्ष्मी बनकर आई थी बेटी, खुल गए थे भाग्य के द्वार
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कीर्ति का फाइल फोटो।
संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। कीर्ति न सिर्फ पूरे घर की लाडली थी, बल्कि वह पूरे परिवार के लिए शुभ थी। 19 वर्ष पहले जब उसका जन्म हुआ तो पूरे परिवार की किस्मत बदल गई। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर का गुजारा करने वाले पिता की तुरंत ही सरकारी नौकरी लग गई। रोते हुए पिता ने कहा कि बेटी घर की लक्ष्मी बनकर आई थी, घर के भाग्य खुल गए थे, लेकिन लुटेरों ने उनकी दुनिया ही उजाड़ दी।
परिजनों ने बताया कि रविंद्र बीएससी करने के दौरान घर पर ट्यूशन पढ़ाते थे, इस दौरान वे नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान ही उनकी संतोष के साथ शादी हुई और दूसरी संतान के रूप में कीर्ति ने जन्म लिया। कीर्ति के पैदा होने के दो माह बाद ही उनकी रेलवे में लोको पायलट के रूप में नौकरी लग गई। इसके बाद घर के पूरे भाग्य ही पलट गए। परिवार दिन दूनी रात चौगुना तरक्की करने लगा। इससे पहले परिवार मोहल्ला नवी करीम में रहता था, लेकिन तीन वर्ष पहले उन्होंने यहां पन्नापुरी में मकान लिया और यहीं रहने के लिए आ गए। परिवार के अलावा रिश्तेदार भी कीर्ति को भाग्यशाली मानते थे। घर में होने वाले शुभ कार्य कीर्ति ही करती थी। कीर्ति का हंसमुखपन उसे परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों में खास बनाता था। मोहल्ले के छोटे-बड़ों की भी इज्जत करती थी। घटना के बाद पूरा परिवार बुरी तरह टूटा है। मां संतोष का बुरा हाल था, बेटा अंकित उन्हें दिलासा दे रहा था।
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हापुड़। कीर्ति न सिर्फ पूरे घर की लाडली थी, बल्कि वह पूरे परिवार के लिए शुभ थी। 19 वर्ष पहले जब उसका जन्म हुआ तो पूरे परिवार की किस्मत बदल गई। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर का गुजारा करने वाले पिता की तुरंत ही सरकारी नौकरी लग गई। रोते हुए पिता ने कहा कि बेटी घर की लक्ष्मी बनकर आई थी, घर के भाग्य खुल गए थे, लेकिन लुटेरों ने उनकी दुनिया ही उजाड़ दी।
परिजनों ने बताया कि रविंद्र बीएससी करने के दौरान घर पर ट्यूशन पढ़ाते थे, इस दौरान वे नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान ही उनकी संतोष के साथ शादी हुई और दूसरी संतान के रूप में कीर्ति ने जन्म लिया। कीर्ति के पैदा होने के दो माह बाद ही उनकी रेलवे में लोको पायलट के रूप में नौकरी लग गई। इसके बाद घर के पूरे भाग्य ही पलट गए। परिवार दिन दूनी रात चौगुना तरक्की करने लगा। इससे पहले परिवार मोहल्ला नवी करीम में रहता था, लेकिन तीन वर्ष पहले उन्होंने यहां पन्नापुरी में मकान लिया और यहीं रहने के लिए आ गए। परिवार के अलावा रिश्तेदार भी कीर्ति को भाग्यशाली मानते थे। घर में होने वाले शुभ कार्य कीर्ति ही करती थी। कीर्ति का हंसमुखपन उसे परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों में खास बनाता था। मोहल्ले के छोटे-बड़ों की भी इज्जत करती थी। घटना के बाद पूरा परिवार बुरी तरह टूटा है। मां संतोष का बुरा हाल था, बेटा अंकित उन्हें दिलासा दे रहा था।
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