गाजियाबाद। दशलक्षण पर्व अनंत चतुर्दशी के साथ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। इसके बाद रविवार को क्षमावाणी पर्व मनाया गया। कविनगर जैन मंदिर में जैन समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगकर अपनी भावनाएं साझा कीं।
इस मौके पर आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य का यह पर्व हमें भीतर तक शुद्ध करता है। जब हृदय से सभी विकार मिट जाते हैं तो क्षमा भाव उत्पन्न होता है।
उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने किसी भी जीव, पशु या तिर्यंच का मन दुखाया हो, डराया हो या अहंकारवश अपशब्द कहे हों तो सभी जीवों से मन, वचन, कर्म से क्षमा मांगते हैं और सभी को क्षमा करते हैं। क्षमावाणी पर्व के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।