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Ghaziabad News: कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रकाश वीर शास्त्री ने लड़ी थी लंबी लड़ाई
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गाजियाबाद। हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा सीट पर 1957 में हुए पहले चुनाव से लेकर 2019 तक सिर्फ एक ही निर्दलीय सांसद चुने गए। ये हैं प्रखर वक्ता, आर्य समाज के उपदेशक और आजाद हिंदुस्तान में कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने वाले प्रकाश वीर शास्त्री। 1957 में गुड़गांव और 1962 में बिजनौर सीट से वह निर्दलीय चुने गए। लोकसभा के चौथे चुनाव 1967 में उन्होंने हापुड़-गाजियाबाद सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार बीपी मौर्य को करीब 48 हजार वोटों से हरा दिया। इस साल कांग्रेस पार्टी में काफी उथल-पुथल मची थी। इस सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहीं।
जनसंघ ने दिया था समर्थन
86 वर्षीय भाजपा के वरिष्ठ नेता बलदेव राज शर्मा बताते हैं कि प्रकाश वीर शास्त्री को चुनाव में जनसंघ ने समर्थन दिया था। उनका चुनाव चिन्ह शेर था। जनसंघ का दीपक था। प्रकाशवीर शास्त्री पहले ऐसे सांसद थे जिन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रस्ताव संसद में दिया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे स्वीकार नहीं किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी प्रकाश वीर शास्त्री के विचारों का समर्थन करते थे। प्रकाश वीर शास्त्री अपनी बात को बेबाकी से कहते थे। आर्य समाज के बड़े उपदेशक थे।
मुरादाबाद के रहरा गांव में हुआ जन्म
प्रकाशवीर शास्त्री का जन्म मुरादाबाद के रहरा गांव में 30 दिसंबर 1923 को हुआ था। उनके पिता दिलीप सिंह त्यागी भी आर्य विचारक थे। प्रकाश वीर ने धर्म से राजनीति तक का सफर तय किया। हिंदुत्व और वैदिक ज्ञान का आधार तत्व बीएचयू और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से पढ़ा था। उन्होंने बीएचयू से बीए और संपूर्णानंद से शास्त्री की विद्या ग्रहण की थी।
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धर्म से देश की राजनीति तक का सफर
1940 में प्रकाश शास्त्री हिंदू महासभा में आमंत्रित किया गया लेकिन वह आर्य समाज व वेदों की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर चुके थे। वह हिंदू महासभा और आर्य समाज के बीच पुल का काम करते रहे। वर्ष 1957 में पहली बार निर्दलीय सांसद चुने गए।
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1967 का चुनाव
कुल मतदाता 5,14, 929
मत पड़े 3,60,888
वैध मत 3,39,663
मतदान प्रतिशत 70.1
नतीजा
प्रकाशवीर शास्त्री (निर्दलीय) 144,943
बीपी मौर्य (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) 101,875
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जनसंघ ने दिया था समर्थन
86 वर्षीय भाजपा के वरिष्ठ नेता बलदेव राज शर्मा बताते हैं कि प्रकाश वीर शास्त्री को चुनाव में जनसंघ ने समर्थन दिया था। उनका चुनाव चिन्ह शेर था। जनसंघ का दीपक था। प्रकाशवीर शास्त्री पहले ऐसे सांसद थे जिन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रस्ताव संसद में दिया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे स्वीकार नहीं किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी प्रकाश वीर शास्त्री के विचारों का समर्थन करते थे। प्रकाश वीर शास्त्री अपनी बात को बेबाकी से कहते थे। आर्य समाज के बड़े उपदेशक थे।
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मुरादाबाद के रहरा गांव में हुआ जन्म
प्रकाशवीर शास्त्री का जन्म मुरादाबाद के रहरा गांव में 30 दिसंबर 1923 को हुआ था। उनके पिता दिलीप सिंह त्यागी भी आर्य विचारक थे। प्रकाश वीर ने धर्म से राजनीति तक का सफर तय किया। हिंदुत्व और वैदिक ज्ञान का आधार तत्व बीएचयू और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से पढ़ा था। उन्होंने बीएचयू से बीए और संपूर्णानंद से शास्त्री की विद्या ग्रहण की थी।
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धर्म से देश की राजनीति तक का सफर
1940 में प्रकाश शास्त्री हिंदू महासभा में आमंत्रित किया गया लेकिन वह आर्य समाज व वेदों की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर चुके थे। वह हिंदू महासभा और आर्य समाज के बीच पुल का काम करते रहे। वर्ष 1957 में पहली बार निर्दलीय सांसद चुने गए।
1967 का चुनाव
कुल मतदाता 5,14, 929
मत पड़े 3,60,888
वैध मत 3,39,663
मतदान प्रतिशत 70.1
नतीजा
प्रकाशवीर शास्त्री (निर्दलीय) 144,943
बीपी मौर्य (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) 101,875