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प्रदीप मुठभेड़ प्रकरण: न्यायालय ने सभी आठ पुलिसकर्मियों को किया बाइज्जत बरी, 2002 में हुआ था एनकाउंटर

Tue, 28 Jan 2025 09:36 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर
संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 28 Jan 2025 09:36 PM IST
सार

तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद के गांव आढ़ा के निकट मुठभेड़ हुई थी। जिसमें प्रदीप नाम का शख्स मारा गया था। पुलिस ने प्रदीप को बदमाश बताते हुए लूट और मुठभेड़ की एफआईआर दर्ज कराई थी।

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Pradeep encounter case Court honourably acquits all eight policemen
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

तीन अगस्त 2002 को बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव आढ़ा में बस लूट के बाद हुई मुठभेड़ में फर्जी मुठभेड़ के आरोपी बनाए गए सभी आठ पुलिसकर्मियों को एडीजे-एफटीसी चतुर्थ डॉ. सुरेश कुमार ने साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। एक ओर पुलिसकर्मियों के बरी होने पर मौजूद परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए, तो वहीं दूसरी ओर मुठभेड़ में मारे गए प्रदीप के पिता यशपाल के आंसू थम नहीं रहे थे। 

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सिकंदराबाद कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी रणधीर सिंह ने तीन अगस्त 2002 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि बुलंदशहर कोतवाली देहात सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए सिकंदराबाद की तरफ लौट रहे थे। गांव आढ़ा मोड़ के निकट बिलसूरी की तरफ से फायरिंग की आवाज सुनाई दी। वह हमराह पुलिसकर्मी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, जीप चालक श्रीपाल, संजीव कुमार, सतेंद्र, तोताराम और रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे, वहां पर एक रोडवेज बस से उतरकर तीन बदमाश भागते हुए दिखाई दिए। पुलिस टीम के रोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई।

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सिकंदराबाद पुलिस ने जिस युवक को लुटेरा बताते हुए मुठभेड़ में ढेर किया था वह युवक बीटेक का छात्र निकला था। पीड़ित परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया तो पुलिस ने मृतक के पिता समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले में बस चालक की तहरीर पर लूट व जानलेवा हमले का और खुद मुठभेड़ और आर्म्स एक्ट का भी मुकदमा दर्ज किया था बाद में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा कर कोर्ट में दाखिल कर दी थी। जिसकी जानकारी प्रदीप के पिता यशपाल को नहीं थी।
 

उन्होंने इसे हत्या बताते हुए कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने वर्ष 2005 में मामले की पुन: जांच के साथ ही सभी आठ पुलिसकर्मियों को तलब कर लिया था। फर्जी मुठभेड़ के इस मामले की सुनवाई एफटीसी चतुर्थ डॉ. सुरेश कुमार के न्यायालय में चल रही थी। न्यायालय ने मंगलवार को सभी गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए सभी आठ अभियुक्त पुलिसकर्मियों को निर्दोष माना है। साथ ही उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया गया है। 

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आज न्याय हार गया: यशपाल
मुठभेड़ में मारे गए प्रदीप के पिता यशपाल ने फैसला आने के बाद कहा कि करीब 22 साल तक वह बेटे को न्याय दिलाने के लिए लड़ते रहे। उन्होंने अपना सबकुछ खो दिया। उन्हें उम्मीद थी कि आरोपी पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि आज न्याय हार गया, बेटे को मैं न्याय नहीं दिला पाया।

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