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Ghaziabad News: 1989 में पहली बार जनता दल से सांसद बने केसी त्यागी
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धीरेंद्र मिश्र
गाजियाबाद। 1989 में हापुड़-गाजियाबाद सीट से पहली बार जनता दल के प्रत्याशी किशन चंद त्यागी को लोगों ने जिताकर संसद भेजा। राजनीति में सक्रिय होने और स्थानीय होने का उन्हें पूरा लाभ मिला। हालांकि उनका कार्यकाल दो साल ही रहा। इस दौरान वह जनता के बीच ही उपलब्ध रहे।
वह बताते हैं कि वह दौर राजनीतिक अस्थिरता का था। तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने सात अगस्त 1990 को मंडल कमीशन की संस्तुति कर लागू कर दिया। इससे पूरे देश में भूचाल आ गया। लोग आरक्षण के विरोध में आत्मदाह करने लगे। मिडिल क्लास और अपर क्लास के लोग काफी नाराज हो गए। जनता दल भी दो गुटों में बंट गया। अस्थिरता का दौर शुरू हो गया। 1990 में ही भाजपा ने राममंदिर आंदोलन शुरू कर दिया। बीपी सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई और 1991 में चुनाव की घोषणा हो गई।
नगर निगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री से की थी सिफारिश
केसी त्यागी बताते हैं कि 1995-96 में सूबे में सपा की सरकार थी। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को नगर पालिका की जगह नगर निगम बनाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। इसी साल गाजियाबाद नगर निगम बना। सुराना में हिंडन पर पुल और मेजर आशाराम त्यागी स्मारक बनवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
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राजनीतिक सफर
73 वर्षीय केसी त्यागी पहली बार चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से 1984 में गाजियाबाद-हापुड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और कांग्रेस के केदारनाथ सिंह से हार गए। वह दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें 22.5 फीसदी वोट मिले। दूसरी बार 1989 में जनतादल के राष्ट्रीय महासचिव बने और गाजियाबाद से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद बीपी मौर्य को हरा दिया। 1991 में वह इसी सीट से तीसरी बार जनतादल के टिकट से चुनाव लड़े और भाजपा के रमेश चंद तोमर से हार गए। वह करीब 24 हजार वोटों से हार गए। इसके बाद 1996 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट से गाजियाबाद सीट से चौथी बार चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का समाना करना पड़ा। इस चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। 2004 में मेरठ सीट से जनतादल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2012 में बिहार से राज्यसभा सांसद बने। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के खास लोगों में हैं। वह जिले के मोरटा गांव के रहने वाले हैं।
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1989-90 में विश्व की तीसरी क्राइम सिटी बन गया था गाजियाबाद
1989-90 में जिले में तेजी से अपराध बढ़ा। लूट, अपहरण की घटनाएं आए दिन होने लगी। वरिष्ठ नेता उपेंद्र गोयल बताते हैं कि अपहरण कर ब्लैकमेलिंग की घटनाएं आम हो गईं थी। उद्यमियों को निशाना बनाया जाने लगा। ग्लोबल नाम की एक मैगजीन में सर्वे रिपोर्ट आई, जिसमें गाजियाबाद को विश्व में तीसरे नंबर की क्राइम सिटी बताया गया। गैंगवार चरम पर था। केसी त्यागी कहते हैं यह कुछ हद तक सही बात है उस समय यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी। अपराध पर अंकुश लगाने के लिए मुलायम सिंह से मिलकर कानून व्यवस्था में सुधार करने के लिए कहा था। कार्रवाई भी की गई थी।
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किशन चंद त्यागी (जनतादल) 247,187
बीपी मौर्य (कांग्रेस) 213,933
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गाजियाबाद। 1989 में हापुड़-गाजियाबाद सीट से पहली बार जनता दल के प्रत्याशी किशन चंद त्यागी को लोगों ने जिताकर संसद भेजा। राजनीति में सक्रिय होने और स्थानीय होने का उन्हें पूरा लाभ मिला। हालांकि उनका कार्यकाल दो साल ही रहा। इस दौरान वह जनता के बीच ही उपलब्ध रहे।
वह बताते हैं कि वह दौर राजनीतिक अस्थिरता का था। तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने सात अगस्त 1990 को मंडल कमीशन की संस्तुति कर लागू कर दिया। इससे पूरे देश में भूचाल आ गया। लोग आरक्षण के विरोध में आत्मदाह करने लगे। मिडिल क्लास और अपर क्लास के लोग काफी नाराज हो गए। जनता दल भी दो गुटों में बंट गया। अस्थिरता का दौर शुरू हो गया। 1990 में ही भाजपा ने राममंदिर आंदोलन शुरू कर दिया। बीपी सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई और 1991 में चुनाव की घोषणा हो गई।
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नगर निगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री से की थी सिफारिश
केसी त्यागी बताते हैं कि 1995-96 में सूबे में सपा की सरकार थी। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को नगर पालिका की जगह नगर निगम बनाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। इसी साल गाजियाबाद नगर निगम बना। सुराना में हिंडन पर पुल और मेजर आशाराम त्यागी स्मारक बनवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
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राजनीतिक सफर
73 वर्षीय केसी त्यागी पहली बार चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से 1984 में गाजियाबाद-हापुड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और कांग्रेस के केदारनाथ सिंह से हार गए। वह दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें 22.5 फीसदी वोट मिले। दूसरी बार 1989 में जनतादल के राष्ट्रीय महासचिव बने और गाजियाबाद से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद बीपी मौर्य को हरा दिया। 1991 में वह इसी सीट से तीसरी बार जनतादल के टिकट से चुनाव लड़े और भाजपा के रमेश चंद तोमर से हार गए। वह करीब 24 हजार वोटों से हार गए। इसके बाद 1996 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट से गाजियाबाद सीट से चौथी बार चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का समाना करना पड़ा। इस चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। 2004 में मेरठ सीट से जनतादल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2012 में बिहार से राज्यसभा सांसद बने। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के खास लोगों में हैं। वह जिले के मोरटा गांव के रहने वाले हैं।
1989-90 में विश्व की तीसरी क्राइम सिटी बन गया था गाजियाबाद
1989-90 में जिले में तेजी से अपराध बढ़ा। लूट, अपहरण की घटनाएं आए दिन होने लगी। वरिष्ठ नेता उपेंद्र गोयल बताते हैं कि अपहरण कर ब्लैकमेलिंग की घटनाएं आम हो गईं थी। उद्यमियों को निशाना बनाया जाने लगा। ग्लोबल नाम की एक मैगजीन में सर्वे रिपोर्ट आई, जिसमें गाजियाबाद को विश्व में तीसरे नंबर की क्राइम सिटी बताया गया। गैंगवार चरम पर था। केसी त्यागी कहते हैं यह कुछ हद तक सही बात है उस समय यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी। अपराध पर अंकुश लगाने के लिए मुलायम सिंह से मिलकर कानून व्यवस्था में सुधार करने के लिए कहा था। कार्रवाई भी की गई थी।
किशन चंद त्यागी (जनतादल) 247,187
बीपी मौर्य (कांग्रेस) 213,933