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किसानों के दिल्ली कूच का अभ्यास मार्च, बैरिकेड पर सुरक्षा बल ने रोका
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किसानों के दिल्ली कूच का अभ्यास मार्च, बैरिकेड पर सुरक्षा बल ने रोका
कौशांबी। यूपी गेट पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन स्थल पर शुक्रवार शाम अचानक किसानों के दिल्ली की तरफ बढ़ने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई। भाकियू के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक व जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किसान दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर दिल्ली सीमा की बैरिकेडिंग तक पहुंच गए। वहां किसानों ने नारेबाजी कर दिल्ली जाने का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। बाद में किसानों ने कहा कि यह 29 नवंबर को होने वाले दिल्ली कूच का महज अभ्यास था। उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने मेरठ मंडल की समीक्षा बैठक में किसानों को आंदोलन स्थल मजबूत करने का आह्वान किया है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा। इस दिन किसान शक्ति प्रदर्शन कर सरकार को फिर से अन्नदाता के आंदोलन पर होने का एहसास कराएंगे। इसके बाद 29 नवंबर को संसद भवन पर 30 ट्रैक्टरों के साथ 500 किसान कूच करेंगे। मेरठ मंडल की मीटिंग में राकेश टिकैत ने पदाधिकारियों को तैयार रहने का मंत्र दिया। इसके बाद किसानों ने डीएमई पर दिल्ली सीमा में लगी बैरिकेडिंग तक मार्च निकाला तो सुरक्षा कर्मी अलर्ट हो गए। किसानों को सुरक्षा कर्मियों ने आगे जाने से मना किया। इस बीच धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जब सरकार ने बैरिकेड खोल दिए हैं तो फिर किसानों को दिल्ली जाने से क्यों रोका जा रहा है। किसानों ने जब कहा कि यह मात्र अभ्यास है तब सुरक्षा बलों की चिंता कम हुई। शुक्रवार को मुरादाबाद मंडल की समीक्षा बैठक में राकेश टिकैत ने कहा कि बिना मांग मनवाए किसान बॉर्डर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए अब सभी जिलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लंबे आंदोलन के लिए कमर कस लें और अपने-अपने टेंटों को दुरुस्त करें। कहा कि कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले एक बार फसलों का व्यापार हुआ तो किसान तबाह हो जाएगा। उसे घाटे के कारण खेतों को भी इन कंपनियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। अब दो ही विकल्प किसानों के सामने हैं या तो खेतीबाड़ी इन कंपनियों के हवाले कर दें या इनका विरोध कर अपनी पीढ़ियों को सुरक्षित कर लें। किसानों के बीच 22 को लखनऊ में होने वाली पंचायत को लेकर भी रणनीति बनी।
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कौशांबी। यूपी गेट पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन स्थल पर शुक्रवार शाम अचानक किसानों के दिल्ली की तरफ बढ़ने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई। भाकियू के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक व जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किसान दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर दिल्ली सीमा की बैरिकेडिंग तक पहुंच गए। वहां किसानों ने नारेबाजी कर दिल्ली जाने का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। बाद में किसानों ने कहा कि यह 29 नवंबर को होने वाले दिल्ली कूच का महज अभ्यास था। उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने मेरठ मंडल की समीक्षा बैठक में किसानों को आंदोलन स्थल मजबूत करने का आह्वान किया है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा। इस दिन किसान शक्ति प्रदर्शन कर सरकार को फिर से अन्नदाता के आंदोलन पर होने का एहसास कराएंगे। इसके बाद 29 नवंबर को संसद भवन पर 30 ट्रैक्टरों के साथ 500 किसान कूच करेंगे। मेरठ मंडल की मीटिंग में राकेश टिकैत ने पदाधिकारियों को तैयार रहने का मंत्र दिया। इसके बाद किसानों ने डीएमई पर दिल्ली सीमा में लगी बैरिकेडिंग तक मार्च निकाला तो सुरक्षा कर्मी अलर्ट हो गए। किसानों को सुरक्षा कर्मियों ने आगे जाने से मना किया। इस बीच धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जब सरकार ने बैरिकेड खोल दिए हैं तो फिर किसानों को दिल्ली जाने से क्यों रोका जा रहा है। किसानों ने जब कहा कि यह मात्र अभ्यास है तब सुरक्षा बलों की चिंता कम हुई। शुक्रवार को मुरादाबाद मंडल की समीक्षा बैठक में राकेश टिकैत ने कहा कि बिना मांग मनवाए किसान बॉर्डर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए अब सभी जिलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लंबे आंदोलन के लिए कमर कस लें और अपने-अपने टेंटों को दुरुस्त करें। कहा कि कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले एक बार फसलों का व्यापार हुआ तो किसान तबाह हो जाएगा। उसे घाटे के कारण खेतों को भी इन कंपनियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। अब दो ही विकल्प किसानों के सामने हैं या तो खेतीबाड़ी इन कंपनियों के हवाले कर दें या इनका विरोध कर अपनी पीढ़ियों को सुरक्षित कर लें। किसानों के बीच 22 को लखनऊ में होने वाली पंचायत को लेकर भी रणनीति बनी।
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