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हाईकमान को भेजी मारपीट मामले की रिपोर्ट, अब समझौते की कवायद
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हाईकमान को भेजी मारपीट मामले की रिपोर्ट, अब समझौते की कवायद
गाजियाबाद। भाजपा प्रदेश कार्य समिति की वर्चुअल बैठक में पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी व जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल के बीच मारपीट के मामले में पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट भेजी दी है। अब पार्टी हाईकमान को निर्णय लेना है। उधर, स्थानीय स्तर पर दोनों लोगों में समझौता कराए जाने की कोशिशें भी की जा रही हैं। बताया गया कि प्रदेश नेतृत्व अनुशासनहीनता के मामले में खासा नाराज है। इससे घटना के वक्त पार्टी कार्यालय पर मौजूद कुछ अन्य पदाधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसी आशंका के बीच कुछ स्थानीय नेता अब समझौते की कोशिशों में भी लगे हैं।
शुक्रवार को पार्टी कार्यालय से प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य वर्चुअल बैठक में जुड़े थे, जिसमें प्रशांत और पवन के बीच पहले मजाकिया लहजे में बात शुरू हुई, फिर कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल हुआ तो दोनों में तनातनी बढ़ गई। स्थिति को संभालने के लिए महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बाहर जाकर बात करने को कहा तो दोनों ही बैठक छोड़कर बाहर आ गए, जहां पर दोनों के बीच हाथापाई हुई। इसमें चोटिल पवन हो गए, जिस पर उन्हें गायत्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूरी घटना के बाद पार्टी की काफी आलोचना हुई। प्रदेश स्तर तक मामले ने तूल पकड़ लिया। घटना के बाद मौखिक तौर पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी दी गई थी। अब शनिवार को पूरे मामले की रिपोर्ट भी हाईकमान को भेजी गई है, जिसे पूरे घटनाक्रम का विस्तर से उल्लेख किया गया है।
मेरा कोई समझौता नहीं, पार्टी पर छोड़ा फैसला : पवन गोयल
जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल का कहना है कि मेरा प्रशांत के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही समझौते का सवाल खड़ा होता है। पार्टी के तमाम लोग मुझे आकर मिले हैं। उन्होंने स्वयं कहा कि तुम्हारे साथ गलत हुआ है, तुम्हें पूरा न्याय दिलवाया जाएगा। मुझे पार्टी पर पूरा विश्वास है। उम्मीद है कि पार्टी की तरफ से मुझे पूरा न्याय मिलेगा। उधर, महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि दोनों पक्षों को आपस में बैठाकर मामले को सुलझा लिया जाएगा। दोनों ही पक्ष समझदार हैं, बस जो भी कुछ हुआ वो आक्रोश में आकर हुआ, जो किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए था।
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दो लोगों के विवाद को दिया जा रहा जातीय रूप : दिनेश गोयल
प्रशांत और पवन के बीच हाथापाई को लेकर पार्टी के अंदर भी मतभेद दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को वैश्य समाज के बैनर तले भाजपा के ही तमाम कार्यकर्ता प्रशांत पर एफआईआर और पार्टी से निष्कासन की मांग को लेकर धरने पर बैठे। अब पार्टी से एमएलसी दिनेश गोयल ने बयान दिया कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। आपसी विवाद को जातीय रूप से देखना उचित नहीं है। यह विवाद जाति का नहीं है, बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का है जो सुलझा लिया जाएगा। कुछ लोग मेरे बयान का गलत अर्थ निकालकर जातीय रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसे कौन लोग है जो जातीय तौर पर मामले को तूल देना चाहते हैं। शुक्रवार को जो लोग धरने पर बैठे थे, उनमें भी अधिकांश लोग पार्टी से जुड़े थे।
अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं
मेरा सिर्फ इतना कहना है कि शुक्रवार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय थी। उसकी जितने कड़े शब्दों में निंदा की जाए वो कम है। पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट कर दी गई है। इतना भी तय है कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं की जाएगी। पूरे मामले का दूध का दूध, पानी का पानी किया जाएगा।
- महेंद्र धनौरिया, जिला प्रभारी गाजियाबाद महानगर
आलाकमान लेगा निर्णय
यह किसी भी तरह का जातीय विवाद नहीं था। पार्टी के दो वरिष्ठ साथियों के बीच आपसी विवाद था, जिसमें पार्टी नेतृत्व को मौखिक और लिखित रुप से अवगत कराया दिया गया है। अब पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, उसका पालन कराया जाएगा।
- दिनेश सिंघल, जिलाध्यक्ष भाजपा
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गाजियाबाद। भाजपा प्रदेश कार्य समिति की वर्चुअल बैठक में पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी व जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल के बीच मारपीट के मामले में पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट भेजी दी है। अब पार्टी हाईकमान को निर्णय लेना है। उधर, स्थानीय स्तर पर दोनों लोगों में समझौता कराए जाने की कोशिशें भी की जा रही हैं। बताया गया कि प्रदेश नेतृत्व अनुशासनहीनता के मामले में खासा नाराज है। इससे घटना के वक्त पार्टी कार्यालय पर मौजूद कुछ अन्य पदाधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसी आशंका के बीच कुछ स्थानीय नेता अब समझौते की कोशिशों में भी लगे हैं।
शुक्रवार को पार्टी कार्यालय से प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य वर्चुअल बैठक में जुड़े थे, जिसमें प्रशांत और पवन के बीच पहले मजाकिया लहजे में बात शुरू हुई, फिर कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल हुआ तो दोनों में तनातनी बढ़ गई। स्थिति को संभालने के लिए महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बाहर जाकर बात करने को कहा तो दोनों ही बैठक छोड़कर बाहर आ गए, जहां पर दोनों के बीच हाथापाई हुई। इसमें चोटिल पवन हो गए, जिस पर उन्हें गायत्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूरी घटना के बाद पार्टी की काफी आलोचना हुई। प्रदेश स्तर तक मामले ने तूल पकड़ लिया। घटना के बाद मौखिक तौर पर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को जानकारी दी गई थी। अब शनिवार को पूरे मामले की रिपोर्ट भी हाईकमान को भेजी गई है, जिसे पूरे घटनाक्रम का विस्तर से उल्लेख किया गया है।
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मेरा कोई समझौता नहीं, पार्टी पर छोड़ा फैसला : पवन गोयल
जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल का कहना है कि मेरा प्रशांत के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही समझौते का सवाल खड़ा होता है। पार्टी के तमाम लोग मुझे आकर मिले हैं। उन्होंने स्वयं कहा कि तुम्हारे साथ गलत हुआ है, तुम्हें पूरा न्याय दिलवाया जाएगा। मुझे पार्टी पर पूरा विश्वास है। उम्मीद है कि पार्टी की तरफ से मुझे पूरा न्याय मिलेगा। उधर, महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि दोनों पक्षों को आपस में बैठाकर मामले को सुलझा लिया जाएगा। दोनों ही पक्ष समझदार हैं, बस जो भी कुछ हुआ वो आक्रोश में आकर हुआ, जो किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए था।
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दो लोगों के विवाद को दिया जा रहा जातीय रूप : दिनेश गोयल
प्रशांत और पवन के बीच हाथापाई को लेकर पार्टी के अंदर भी मतभेद दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को वैश्य समाज के बैनर तले भाजपा के ही तमाम कार्यकर्ता प्रशांत पर एफआईआर और पार्टी से निष्कासन की मांग को लेकर धरने पर बैठे। अब पार्टी से एमएलसी दिनेश गोयल ने बयान दिया कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। आपसी विवाद को जातीय रूप से देखना उचित नहीं है। यह विवाद जाति का नहीं है, बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का है जो सुलझा लिया जाएगा। कुछ लोग मेरे बयान का गलत अर्थ निकालकर जातीय रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसे कौन लोग है जो जातीय तौर पर मामले को तूल देना चाहते हैं। शुक्रवार को जो लोग धरने पर बैठे थे, उनमें भी अधिकांश लोग पार्टी से जुड़े थे।
अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं
मेरा सिर्फ इतना कहना है कि शुक्रवार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय थी। उसकी जितने कड़े शब्दों में निंदा की जाए वो कम है। पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट कर दी गई है। इतना भी तय है कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं की जाएगी। पूरे मामले का दूध का दूध, पानी का पानी किया जाएगा।
- महेंद्र धनौरिया, जिला प्रभारी गाजियाबाद महानगर
आलाकमान लेगा निर्णय
यह किसी भी तरह का जातीय विवाद नहीं था। पार्टी के दो वरिष्ठ साथियों के बीच आपसी विवाद था, जिसमें पार्टी नेतृत्व को मौखिक और लिखित रुप से अवगत कराया दिया गया है। अब पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, उसका पालन कराया जाएगा।
- दिनेश सिंघल, जिलाध्यक्ष भाजपा