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गाजियाबाद स्टेशन पर लखनऊ जा रही शताब्दी में लगी आग
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शताब्दी एक्सप्रेस की बोगी में लगी आग।
गाजियाबाद स्टेशन पर लखनऊ जा रही शताब्दी में लगी आग
गाजियाबाद। नई दिल्ली से लखनऊ जा रही शताब्दी एक्सप्रेस के लगेज कोच में शनिवार सुबह आग लग गई। ट्रेन गाजियाबाद स्टेशन पहुंची तो आरपीएफ के कांस्टेबल ने लगेज कोच से धुआं निकलता देखा। उसने इसकी सूचना गार्ड और स्टेशन स्टाफ को दी। उस समय ट्रेन में कई सौ यात्री सवार थे। गनीमत रही कि आग यात्री कोच तक नहीं पहुंची, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। लगेज कोच से बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ (सैनिटाइजर जैसा) मिला है। आरपीएफ ने उसे कब्जे में ले लिया है। हादसे के बाद उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, दिल्ली डिवीजन के डीआरएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। महाप्रबंधक ने हादसे की जांच के लिए वरिष्ठ अफसरों की एक कमेटी गठित की है। साथ ही फॉरेंसिक जांच कराने के आदेश भी दिए हैं। दमकल की दो गाड़ियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद 8.20 बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।
नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 6:42 बजे से एक मिनट पहले 6:41 बजे गाजियाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-2 पर पहुंची। इसी दौरान आरपीएफ का एक कांस्टेबल वेद कुमार लगेज कोच पर लगी सील की रुटीन जांच के लिए पहुंचा। कांस्टेबल ने कोच से धुआं निकलते देखा तो इसकी सूचना गार्ड और अपने कार्यालय को दी। गार्ड ने आग लगने की सूचना ट्रैफिक कंट्रोलर और दिल्ली कंट्रोल रूम को दी। सूचना पाते ही आरपीएफ, जीआरपी व रेलवे का अन्य स्टाफ मौके पर पहुंच गया। उन्होंने पूरी ट्रेन में लगे अग्निशमन यंत्र निकाले और आग को बुझाने का प्रयास किया। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई। सात बजे पहली दमकल गाड़ी रेलवे स्टेशन पर पहुंची और ओएचई वायर की पावर सप्लाई बंद कराकर आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग की लपटों में घिर चुके लगेज कोच को अलग करके ट्रेन को आगे ले जाकर सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर दिया गया। इसके बाद करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लगेज कोच से बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ (सैनिटाइजर जैसा) मिला है। आरपीएफ ने उसे कब्जे में ले लिया है। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बताया कि मामले में फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। लगेज कोच से मिली ज्वलनशील पदार्थ की बोतलें व अन्य सामान फॉरेंसिक टीम को भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस मामले में सीनियर अधिकारियों की जांच टीम भी गठित की गई है। यह टीम हादसे के कारणों की पड़ताल करेगी। हादसे की वजह से प्लेटफार्म नंबर दो पर करीब सात घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा।
स्टेशन से निकल गई होती ट्रेन तो हो सकता था बड़ा हादसा
यदि ट्रेन में आग लगने का पता गाजियाबाद में न चल पाता और यह ट्रेन स्टेशन से निकल गई होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। गाजियाबाद के बाद इस ट्रेन का स्टॉपेज अलीगढ़ में है। थोड़ी देर और आग का पता न चल पाता तो यह विकराल रूप ले लेती और आग की लपटें यात्री कोच तक पहुंच सकती थीं। स्टेशन की बजाय बीच रास्ते में ट्रेन को रोका जाता तो दमकल विभाग और अन्य स्टाफ की मदद न मिल पाती। इससे भी हादसा बड़ा हो सकता था।
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गाजियाबाद। नई दिल्ली से लखनऊ जा रही शताब्दी एक्सप्रेस के लगेज कोच में शनिवार सुबह आग लग गई। ट्रेन गाजियाबाद स्टेशन पहुंची तो आरपीएफ के कांस्टेबल ने लगेज कोच से धुआं निकलता देखा। उसने इसकी सूचना गार्ड और स्टेशन स्टाफ को दी। उस समय ट्रेन में कई सौ यात्री सवार थे। गनीमत रही कि आग यात्री कोच तक नहीं पहुंची, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। लगेज कोच से बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ (सैनिटाइजर जैसा) मिला है। आरपीएफ ने उसे कब्जे में ले लिया है। हादसे के बाद उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, दिल्ली डिवीजन के डीआरएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। महाप्रबंधक ने हादसे की जांच के लिए वरिष्ठ अफसरों की एक कमेटी गठित की है। साथ ही फॉरेंसिक जांच कराने के आदेश भी दिए हैं। दमकल की दो गाड़ियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद 8.20 बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।
नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 6:42 बजे से एक मिनट पहले 6:41 बजे गाजियाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-2 पर पहुंची। इसी दौरान आरपीएफ का एक कांस्टेबल वेद कुमार लगेज कोच पर लगी सील की रुटीन जांच के लिए पहुंचा। कांस्टेबल ने कोच से धुआं निकलते देखा तो इसकी सूचना गार्ड और अपने कार्यालय को दी। गार्ड ने आग लगने की सूचना ट्रैफिक कंट्रोलर और दिल्ली कंट्रोल रूम को दी। सूचना पाते ही आरपीएफ, जीआरपी व रेलवे का अन्य स्टाफ मौके पर पहुंच गया। उन्होंने पूरी ट्रेन में लगे अग्निशमन यंत्र निकाले और आग को बुझाने का प्रयास किया। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई। सात बजे पहली दमकल गाड़ी रेलवे स्टेशन पर पहुंची और ओएचई वायर की पावर सप्लाई बंद कराकर आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग की लपटों में घिर चुके लगेज कोच को अलग करके ट्रेन को आगे ले जाकर सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर दिया गया। इसके बाद करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लगेज कोच से बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ (सैनिटाइजर जैसा) मिला है। आरपीएफ ने उसे कब्जे में ले लिया है। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बताया कि मामले में फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। लगेज कोच से मिली ज्वलनशील पदार्थ की बोतलें व अन्य सामान फॉरेंसिक टीम को भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस मामले में सीनियर अधिकारियों की जांच टीम भी गठित की गई है। यह टीम हादसे के कारणों की पड़ताल करेगी। हादसे की वजह से प्लेटफार्म नंबर दो पर करीब सात घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा।
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स्टेशन से निकल गई होती ट्रेन तो हो सकता था बड़ा हादसा
यदि ट्रेन में आग लगने का पता गाजियाबाद में न चल पाता और यह ट्रेन स्टेशन से निकल गई होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। गाजियाबाद के बाद इस ट्रेन का स्टॉपेज अलीगढ़ में है। थोड़ी देर और आग का पता न चल पाता तो यह विकराल रूप ले लेती और आग की लपटें यात्री कोच तक पहुंच सकती थीं। स्टेशन की बजाय बीच रास्ते में ट्रेन को रोका जाता तो दमकल विभाग और अन्य स्टाफ की मदद न मिल पाती। इससे भी हादसा बड़ा हो सकता था।
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