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कई सरकारी विभागों में महिला उत्पीड़न रोकने के लिए नहीं बनी समिति
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कई सरकारी विभागों में महिला उत्पीड़न रोकने के लिए नहीं बनी समिति
गाजियाबाद। कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए (निवारण प्रतिषेध और परितोष) अधिनियम-2013 के तहत बनने वाली आंतरिक परिवाद समिति का कई सरकारी महकमे में गठन ही नहीं हुआ है। सिंचाई निर्माण खंड की समिति में तमाम खामियां उजागर होने के बाद सरकारी महकमों में खलबली मच गई है। जिला प्रोबेशन विभाग (इन समिति का नोडल विभाग) का दावा है कि कुछ सरकारी कार्यालयों में अभी समिति नहीं बनी है या किन्हीं कारणों से भंग है, उनको जिलाधिकारी के माध्यम से पत्र भेजे गए हैं। उधर, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में नई समिति के लिए कवायद शुरू कर दी गई है।
सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में महिला उत्पीड़न रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने आंतरिक परिवाद समिति बनाने के निर्देश जारी किए हैं। जिस कार्यालय में दस से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, वहां समिति का गठन किया जाना है। अमर उजाला ने आठ जनवरी के अंक में सिंचाई निर्माण खंड की समिति की खामियों को उजागर किया था, जिसका अध्यक्ष एक पुरुष को बनाया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद अन्य सरकारी विभागों में भी खलबली मच गई है। कुछ महिला संगठन इस मामले में बरती गई लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारी से भी मिले हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्रा ने बताया कि जिले के लगभग सभी बड़े कार्यालयों में समिति बनी हुई है जबकि जिन कार्यालयों में अभी तक समिति का गठन नहीं किया गया है, वहां जिलाधिकारी के माध्यम से लगातार पत्र भेजकर समिति का गठन कर जानकारी देने के लिए कहा गया है।
सिंचाई निर्माण खंड की समिति को दिया था अवैधानिक करार
दिसंबर में ही जिला प्रोबेशन विभाग को सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में बनी आंतरिक परिवाद समिति का पता चला था। इस मामले में डीपीओ विकास चंद्रा ने बताया कि 29 दिसंबर को ही सिंचाई निर्माण खंड को पत्र भेजकर समिति अवैधानिक करार दी गई थी। पत्र में समिति अध्यक्ष पुरुष कर्मचारी को बनाए जाने को अवैधानिक करार दिया गया था। इसके बाद से समिति बनाए जाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई।
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नई टीम को लेकर शुरू की प्रक्रिया
सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज लांबा ने बताया कि समिति को पूर्व में ही भंग कर दिया गया था। नई समिति के गठन की प्रक्रिया चल रही है। एनजीओ संबंधी पहलू की जानकारी नहीं थी। इसको जल्द तैयार कर जिला प्रोबेशन विभाग और जिलाधिकारी को जानकारी दी जाएगी।
इस तरह के मसले पर पहले भी मेरी अधिकारियों से बात हुई है। जो भी समिति बनती हैं, उनमें सांठगांठ कर अपनी समिति बना ली जाती है। सरकारी विभागों में इस तरह की अनियमितताएं रहती हैं। समिति के नाम पर खानापूर्ति करना सरकारी विभाग बंद करें। -वंदना चौधरी, अध्यक्ष
गीतांजलि वेलफेयर एजुकेशनल समिति
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गाजियाबाद। कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए (निवारण प्रतिषेध और परितोष) अधिनियम-2013 के तहत बनने वाली आंतरिक परिवाद समिति का कई सरकारी महकमे में गठन ही नहीं हुआ है। सिंचाई निर्माण खंड की समिति में तमाम खामियां उजागर होने के बाद सरकारी महकमों में खलबली मच गई है। जिला प्रोबेशन विभाग (इन समिति का नोडल विभाग) का दावा है कि कुछ सरकारी कार्यालयों में अभी समिति नहीं बनी है या किन्हीं कारणों से भंग है, उनको जिलाधिकारी के माध्यम से पत्र भेजे गए हैं। उधर, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में नई समिति के लिए कवायद शुरू कर दी गई है।
सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में महिला उत्पीड़न रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने आंतरिक परिवाद समिति बनाने के निर्देश जारी किए हैं। जिस कार्यालय में दस से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, वहां समिति का गठन किया जाना है। अमर उजाला ने आठ जनवरी के अंक में सिंचाई निर्माण खंड की समिति की खामियों को उजागर किया था, जिसका अध्यक्ष एक पुरुष को बनाया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद अन्य सरकारी विभागों में भी खलबली मच गई है। कुछ महिला संगठन इस मामले में बरती गई लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारी से भी मिले हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्रा ने बताया कि जिले के लगभग सभी बड़े कार्यालयों में समिति बनी हुई है जबकि जिन कार्यालयों में अभी तक समिति का गठन नहीं किया गया है, वहां जिलाधिकारी के माध्यम से लगातार पत्र भेजकर समिति का गठन कर जानकारी देने के लिए कहा गया है।
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सिंचाई निर्माण खंड की समिति को दिया था अवैधानिक करार
दिसंबर में ही जिला प्रोबेशन विभाग को सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में बनी आंतरिक परिवाद समिति का पता चला था। इस मामले में डीपीओ विकास चंद्रा ने बताया कि 29 दिसंबर को ही सिंचाई निर्माण खंड को पत्र भेजकर समिति अवैधानिक करार दी गई थी। पत्र में समिति अध्यक्ष पुरुष कर्मचारी को बनाए जाने को अवैधानिक करार दिया गया था। इसके बाद से समिति बनाए जाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई।
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नई टीम को लेकर शुरू की प्रक्रिया
सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज लांबा ने बताया कि समिति को पूर्व में ही भंग कर दिया गया था। नई समिति के गठन की प्रक्रिया चल रही है। एनजीओ संबंधी पहलू की जानकारी नहीं थी। इसको जल्द तैयार कर जिला प्रोबेशन विभाग और जिलाधिकारी को जानकारी दी जाएगी।
इस तरह के मसले पर पहले भी मेरी अधिकारियों से बात हुई है। जो भी समिति बनती हैं, उनमें सांठगांठ कर अपनी समिति बना ली जाती है। सरकारी विभागों में इस तरह की अनियमितताएं रहती हैं। समिति के नाम पर खानापूर्ति करना सरकारी विभाग बंद करें। -वंदना चौधरी, अध्यक्ष
गीतांजलि वेलफेयर एजुकेशनल समिति