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पांच साल में 59 के खिलाफ संस्तुति, कार्रवाई केवल पांच पर
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पांच साल में 59 के खिलाफ संस्तुति, कार्रवाई केवल पांच पर
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार सहित अनियमितताओं मेें कार्रवाई का रिकॉर्ड बेहद खराब है। विभिन्न मामलों में जीडीए ने बीते पांच सालों में 59 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की। शासन स्तर से केवल पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। वर्तमान में दो साल बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर अवर अभियंता को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद जनपद में अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
शासन स्तर से लंबी खिंचने वाली जांच के कारण आरोपी अधिकारियों के साथ अवैध निर्माण में लिप्त लोगों के हौसले बुलंद हैं। संस्तुति के बाद शासन के गलियारों में जांच की फाइल गुम हो जाती है। विभागीय स्तर पर पहले संस्तुति कर आरोपी अधिकारियों को प्रवर्तन, अभियंत्रण सहित मुख्य विभागों से हटा दिया जाता है लेकिन एक दो माह बाद फिर से अधिकारी उसी जोन का जिम्मा पाने में सफल हो जाते हैं। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश का कहना है कि अधिकारियों पर कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं है। विभिन्न मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ लगातार शासन को संस्तुति की गई है। शासन स्तर से जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाता है।
2020 में सर्वाधिक 23 अभियंताओं के खिलाफ संस्तुति
जीडीए में अनियमितताओं के मामले में 2020 में सबसे ज्यादा 23 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की शासन को संस्तुति की गई। इनमें ड्यूटी में लापरवाही के साथ गड़बड़ी के अधिकांश मामले हैं। 2019 में 19 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति में केवल दो पर निलंबन की गाज गिरी। 2018 में नौ अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया, लेकिन कार्रवाई सहायक अभियंता निशांत कुमार पर हुई। 2017 में दो में से एक और 2021 से लेकर अप्रैल 2022 तक छह अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति हुई है। कार्रवाई अब तक एक पर हुई है।
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अवर अभियंताओं के खिलाफ भेजी गई थी रिपोर्ट
शासन स्तर से बीते साल निलंबन की संस्तुति में अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। बीते साल दिसंबर 2021 में जीडीए ने कई अवर अभियंताओं के खिलाफ जांच को लिखा था। इनमें अवर अभियंताओं में धीरज यादव, रामेश्वर कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, अशोक अरोड़ा, शिवओम, श्रीनिवास पांडेय, ब्रहमदेव शुक्ला शामिल थे। इनमें से केवल श्रीनिवास पांडेय सेवानिवृत्त हैं, जबकि बाकी सभी सेवा में हैं। अनियमितताओं के मामलों में शासन को संस्तुति के बाद सभी के खिलाफ आरोप पत्र तय कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी गई।
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गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार सहित अनियमितताओं मेें कार्रवाई का रिकॉर्ड बेहद खराब है। विभिन्न मामलों में जीडीए ने बीते पांच सालों में 59 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की। शासन स्तर से केवल पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। वर्तमान में दो साल बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर अवर अभियंता को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद जनपद में अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
शासन स्तर से लंबी खिंचने वाली जांच के कारण आरोपी अधिकारियों के साथ अवैध निर्माण में लिप्त लोगों के हौसले बुलंद हैं। संस्तुति के बाद शासन के गलियारों में जांच की फाइल गुम हो जाती है। विभागीय स्तर पर पहले संस्तुति कर आरोपी अधिकारियों को प्रवर्तन, अभियंत्रण सहित मुख्य विभागों से हटा दिया जाता है लेकिन एक दो माह बाद फिर से अधिकारी उसी जोन का जिम्मा पाने में सफल हो जाते हैं। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश का कहना है कि अधिकारियों पर कार्रवाई का अधिकार उनके पास नहीं है। विभिन्न मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ लगातार शासन को संस्तुति की गई है। शासन स्तर से जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाता है।
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2020 में सर्वाधिक 23 अभियंताओं के खिलाफ संस्तुति
जीडीए में अनियमितताओं के मामले में 2020 में सबसे ज्यादा 23 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की शासन को संस्तुति की गई। इनमें ड्यूटी में लापरवाही के साथ गड़बड़ी के अधिकांश मामले हैं। 2019 में 19 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति में केवल दो पर निलंबन की गाज गिरी। 2018 में नौ अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया, लेकिन कार्रवाई सहायक अभियंता निशांत कुमार पर हुई। 2017 में दो में से एक और 2021 से लेकर अप्रैल 2022 तक छह अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति हुई है। कार्रवाई अब तक एक पर हुई है।
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अवर अभियंताओं के खिलाफ भेजी गई थी रिपोर्ट
शासन स्तर से बीते साल निलंबन की संस्तुति में अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। बीते साल दिसंबर 2021 में जीडीए ने कई अवर अभियंताओं के खिलाफ जांच को लिखा था। इनमें अवर अभियंताओं में धीरज यादव, रामेश्वर कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, अशोक अरोड़ा, शिवओम, श्रीनिवास पांडेय, ब्रहमदेव शुक्ला शामिल थे। इनमें से केवल श्रीनिवास पांडेय सेवानिवृत्त हैं, जबकि बाकी सभी सेवा में हैं। अनियमितताओं के मामलों में शासन को संस्तुति के बाद सभी के खिलाफ आरोप पत्र तय कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी गई।