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सिर्फ नए भवनों को ही मिलेगा टैक्स छूट का लाभ
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सिर्फ नए भवनों को ही मिलेगा टैक्स छूट का लाभ
गाजियाबाद। नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया टैक्स छूट का फैसला सिर्फ उन भवनों पर लागू होगा जो अभी तक टैक्स के दायरे में शामिल नहीं थे। इस फैसले के बाद बकाएदार भी मानने लगे हैं कि उन्हें भी छूट मिलेगी। बृहस्पतिवार को महापौर आशा शर्मा ने स्पष्ट किया कि शहर में किए जा रहे जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉरमेंशन सिस्टम) के जरिए किए जा रहे सर्वे में जो भवन नए चिह्नित होंगे, उन्हें टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। उन पर अप्रैल 2020 से हाउस टैक्स लगाया जाएगा। उन पर बीते वर्षों का टैक्स नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन भवनों के टैक्स बिल जारी हो चुके हैं और अभी तक उन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया, उन्हें टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। बिल जारी होने के बाद भी टैक्स जमा न करने वाले बकाएदारों की श्रेणी में आएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यकारिणी समिति से पास हो चुका यह प्रस्ताव अब नगर निगम की बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। सदन में चर्चा के बाद इस पर अमल किया जाएगा।
ग्रामीण परिवेश वाले वार्डों के अधिकांश भवनों को होगा फायदा
दरअसल, गाजियाबाद नगर निगम सीमा में दुहाई, मकनपुर, भोपुरा, नायफल, महरौली, रईसपुर, बागू आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मकान तो 30 साल से भी पुराने हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम ने इन भवनों पर टैक्स नहीं लगाया है। नगर निगम इन भवनों पर 20-25 साल से टैक्स लगाता तो यह रकम लाखों में हो जाती। नगर निगम ने ऐसे भवनों पर चालू वित्तीय वर्ष से टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है। यानी इन भवन मालिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। वहीं इसी श्रेणी में कुछ हाउसिंग टाउनशिप के वह मकान भी आएंगे, जिन पर निगम ने अभी तक कर निर्धारण नहीं किया है।
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गाजियाबाद। नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया टैक्स छूट का फैसला सिर्फ उन भवनों पर लागू होगा जो अभी तक टैक्स के दायरे में शामिल नहीं थे। इस फैसले के बाद बकाएदार भी मानने लगे हैं कि उन्हें भी छूट मिलेगी। बृहस्पतिवार को महापौर आशा शर्मा ने स्पष्ट किया कि शहर में किए जा रहे जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉरमेंशन सिस्टम) के जरिए किए जा रहे सर्वे में जो भवन नए चिह्नित होंगे, उन्हें टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। उन पर अप्रैल 2020 से हाउस टैक्स लगाया जाएगा। उन पर बीते वर्षों का टैक्स नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन भवनों के टैक्स बिल जारी हो चुके हैं और अभी तक उन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया, उन्हें टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। बिल जारी होने के बाद भी टैक्स जमा न करने वाले बकाएदारों की श्रेणी में आएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यकारिणी समिति से पास हो चुका यह प्रस्ताव अब नगर निगम की बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। सदन में चर्चा के बाद इस पर अमल किया जाएगा।
ग्रामीण परिवेश वाले वार्डों के अधिकांश भवनों को होगा फायदा
दरअसल, गाजियाबाद नगर निगम सीमा में दुहाई, मकनपुर, भोपुरा, नायफल, महरौली, रईसपुर, बागू आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मकान तो 30 साल से भी पुराने हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम ने इन भवनों पर टैक्स नहीं लगाया है। नगर निगम इन भवनों पर 20-25 साल से टैक्स लगाता तो यह रकम लाखों में हो जाती। नगर निगम ने ऐसे भवनों पर चालू वित्तीय वर्ष से टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है। यानी इन भवन मालिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। वहीं इसी श्रेणी में कुछ हाउसिंग टाउनशिप के वह मकान भी आएंगे, जिन पर निगम ने अभी तक कर निर्धारण नहीं किया है।
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