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स्कूल प्रबंधन और स्टाफ ने डीआईओएस के सामने रखी अपनी बात
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स्कूल प्रबंधन और स्टाफ ने डीआईओएस के सामने रखी अपनी बात - डीपीएस इंदिरापुरम से निकाले गए स्टाफ ने प्रशासन और डीआईओएस से की थी शिकायत - डीआईओएस की तरफ से स्कूल प्रबंधन और स्टाफ को अपनी बात रखने के लिए दिया था शुक्रवार को समय
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माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। डीपीएस इंदिरापुरम से निकाले गए स्टाफ का मामला शुक्रवार को डीआईओएस के नेतृत्व में बनी कमेटी के सामने पहुंचा। इस दौरान डीआईओएस ने स्कूल से निकाले गए स्टाफ और स्कूल प्रबंधन पक्ष को सुना। जिसके बाद उन्होंने स्टाफ को आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्कूल प्रबंधन उन्हें नौकरी पर रखेगा। स्कूल प्रबंधन की तरफ से मामले में पुनर्विचार का आश्वासन दिया गया है।
इंदिरापुरम स्थित डीपीएस ने कुछ दिन पहले अपने स्कूल में काम करने वाले तीस से अधिक शिक्षक और अन्य स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया। जिसका विरोध सभी स्टाफ ने किया। उन्होंने प्रशासन से मामले की शिकायत की। जिसपर शुक्रवार को डीआईओएस ने दोनों पक्षों को बुलाया। दोनों पक्षों ने अपनी बात डीआईओएस के सामने रखी। स्टॉफ ने बताया कि वह कई वर्षों से स्कूल में काम कर रहे हैं। वह लोग पूरी इमानदारी के साथ स्कूल को अपनी सेवाएं दी हैं। स्कूल ऐसे कैसे उन्हें निकाल सकता है। काम से निकालने का कोई पुुख्ता कारण भी स्कूल की तरफ से नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में स्कूल बताए कि किन कारणों से उन्हें निकाला गया। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से निकाले जाने पर उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी। उनको एक साल का समय दिया जाए। जब स्थिति में सुधार होगा तो वह दूसरी नौकरी ढूंढ लेंगे और स्कूल से इस्तीफा दे देंगे। उधर डीआईओएस ने स्टॉफ का पक्ष सुनकर स्कूल प्रबंधन की से सवाल पूछा कि कैसे वह इस स्थिति में स्टॉफ को निकाल सकते हैं। वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखा। डीपीएस स्कूल के मीडिया प्रवक्ता अनिकेत तिवारी ने बताया कि डीआईओएस के समक्ष हमने यह स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर दिया कि हमने नियमानुसार ही कोई कदम उठाए हैं। यह बात कहना कि हमने 3 दिन में ही स्टाफ को निष्काषित किया है वह गलत है। हमने हर एक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही सभी स्टाफ को 3 महीने का नोटिस, सैलरी और ग्रेच्युटी समेत देकर निर्णय लिया है। डीआईओएस रवि दत्त ने बताया कि दोनों पक्षों की बात सुनी गई है। स्कूल प्रबंधन से स्टाफ को काम से नहीं निकालने के लिए कहा है। जिसपर स्कूल प्रबंधन की तरफ से कमेटी के साथ बैठक कर मामले में पुनर्विचार करने की बात कही गई है।
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