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Ghaziabad News: 10 लाख रुपये का भुगतान न होने से अटक गई मेट्रो के तीसरे चरण की डीपीआर
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गाजियाबाद। नोएडा सेक्टर-62 से साहिबाबाद तक मेट्रो के तीसरे चरण की डीपीआर महज 10 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से अटक गई है। डीएमआरसी ने डीपीआर बनाने के लिए जीडीए से 10 लाख रुपये मांगे हैं, लेकिन प्राधिकरण ने अभी तक रकम का भुगतान नहीं किया है। बोर्ड बैठक में सैद्धांतिक सहमति मिलने को एक महीना बीत जाने के बावजूद अभी तक डीपीआर बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है।
दरअसल, डीएमआरसी का तकरीबन 26 करोड़ रुपया जीडीए पर पहले से बकाया चल रहा है। डीएमआरसी की ओर से इस रकम की भी मांग की जा रही है। अब तीसरे चरण की डीपीआर बनाने के लिए डीएमआरसी के अधिकारियों को बोला गया तो उन्होंने इसके लिए 10 लाख रुपये और पुरानी बकाया रकम का भुगतान करने की मांग की। पूर्व की बकाया रकम तो दूर जीडीए के अधिकारी डीपीआर बनाने के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान भी नहीं कर पाए हैं।
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सिर्फ चुनाव के समय पर ही जीडीए में होती है मेट्रो प्रोजेक्ट की चर्चा
मेट्रो प्रोजेक्ट के तीसरे चरण की चर्चा अक्सर चुनाव के समय पर होती है। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार पर मंथन शुरू हुआ था, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद यह प्रोजेक्ट फाइल में बंद हो गया। इसके बाद 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से दो साल पहले यानी 2020 से मेट्रो की बजाय हिंडन पार क्षेत्र समेत तीन रूटाें पर रोपवे चलाने की चर्चा शुरू हुई। इस पर हिंडनपार क्षेत्र के लोग ही धड़ों में बंट गए और विरोध शुरू हो गया। इसके बाद फिर यह प्रस्ताव फाइल में बंद हो गया। अब अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मेट्रो के तीसरे चरण का यह मुद्दा फाइल से बाहर निकल आया है। हालांकि फंड की कमी से जूझ रहे जीडीए की तिजोरी में इस पर खर्च करने के लिए फिलहाल पैसा नहीं है।
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अधिकारी बोले
डीएमआरसी की ओर से मेट्रो प्रोजेक्ट के तीसरे चरण की डीपीआर बनाने के लिए 10 लाख रुपये की डिमांड की गई है। इसके अलावा पुराना बकाया भी मांगा है। इस पर मंथन किया जा रहा है। जल्द ही डीएमआरसी को भुगतान कर डीपीआर तैयार कराई जाएगी। - मानवेंद्र सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता, जीडीए
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दरअसल, डीएमआरसी का तकरीबन 26 करोड़ रुपया जीडीए पर पहले से बकाया चल रहा है। डीएमआरसी की ओर से इस रकम की भी मांग की जा रही है। अब तीसरे चरण की डीपीआर बनाने के लिए डीएमआरसी के अधिकारियों को बोला गया तो उन्होंने इसके लिए 10 लाख रुपये और पुरानी बकाया रकम का भुगतान करने की मांग की। पूर्व की बकाया रकम तो दूर जीडीए के अधिकारी डीपीआर बनाने के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान भी नहीं कर पाए हैं।
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सिर्फ चुनाव के समय पर ही जीडीए में होती है मेट्रो प्रोजेक्ट की चर्चा
मेट्रो प्रोजेक्ट के तीसरे चरण की चर्चा अक्सर चुनाव के समय पर होती है। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार पर मंथन शुरू हुआ था, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद यह प्रोजेक्ट फाइल में बंद हो गया। इसके बाद 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से दो साल पहले यानी 2020 से मेट्रो की बजाय हिंडन पार क्षेत्र समेत तीन रूटाें पर रोपवे चलाने की चर्चा शुरू हुई। इस पर हिंडनपार क्षेत्र के लोग ही धड़ों में बंट गए और विरोध शुरू हो गया। इसके बाद फिर यह प्रस्ताव फाइल में बंद हो गया। अब अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मेट्रो के तीसरे चरण का यह मुद्दा फाइल से बाहर निकल आया है। हालांकि फंड की कमी से जूझ रहे जीडीए की तिजोरी में इस पर खर्च करने के लिए फिलहाल पैसा नहीं है।
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अधिकारी बोले
डीएमआरसी की ओर से मेट्रो प्रोजेक्ट के तीसरे चरण की डीपीआर बनाने के लिए 10 लाख रुपये की डिमांड की गई है। इसके अलावा पुराना बकाया भी मांगा है। इस पर मंथन किया जा रहा है। जल्द ही डीएमआरसी को भुगतान कर डीपीआर तैयार कराई जाएगी। - मानवेंद्र सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता, जीडीए