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अब विसरा रिपोर्ट के इंतजार में नहीं अटकेगी जांच
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:21 AM IST
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अविष्कार लैब
- फोटो : file photo
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मर्डर और सुसाइड के हाई प्रोफाइल मामलों में विसरा रिपोर्ट के इंतजार में अब जांच कई-कई माह तक अटकी नहीं रहेगी। निवाड़ी में बन रहे फॉरेंसिक साइंस लैब में विसरा सैंपल की जांच का सेक्शन शुरू कर दिया गया है। दिसंबर तक लैब का काम पूरा होने के बाद 24 तरह के सैंपलों की जांच की जा सकेगी।
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शासन की ओर से साल 2015 में गाजियाबाद और मुरादाबाद में फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित करने का निर्णय लिया था। साल 2016 की शुरुआत में निवाड़ी क्षेत्र में साइंस लैब का निर्माण शुरू किया गया।
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फॉरेंसिक साइंस लैब गाजियाबाद के असिस्टेंट डायरेक्टर सुधीर कुमार ने बताया कि फिलहाल लैब में तीन साइंटिस्ट की तैनाती की जा चुकी है, जो विसरा और फिंगरप्रिंट्स जांच के लिए सैंपल लेते हैं। विसरा के सैंपलों को इकट्ठा कर लैब में ही जांच की जाती है।
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गाजियाबाद के अलावा हापुड़ के विसरा सैंपल भी गाजियाबाद की लैब भेजे जा रहे हैं, जिनकी रिपोर्ट एक सप्ताह में संबंधित थाना क्षेत्रों को भेज दी जाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लैब की पेंडेंसी शून्य है। साइंटिस्ट की संख्या बढ़ने पर रिपोर्ट मिलने का समय एक सप्ताह से भी कम हो सकता है।
अब तक आगरा भेजे जाते थे विसरा के नमूने
अब तक सिर्फ आगरा में ही फॉरेंसिक लैब थी। गाजियाबाद और हापुड़ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के विसरा सैंपल पहले आगरा ही भेजे जाते थे, जिसकी रिपोर्ट आने में करीब तीन-चार माह का समय लगता था। इस दौरान केस की जांच अटकी रहती थी।
अब आगरा के बाद गाजियाबाद और मुरादाबाद में भी लैब बनने से जांच में तेजी आएगी।
क्यों होती है विसरा जांच
दरअसल, जिन हाई प्रोफाइल मर्डर और सुसाइड के केस में मौत के कारण स्पष्ट नहीं होते उनमें बॉडी से विसरा सुरक्षित कर जांच को भेजा जाता है। मौत के कारण, मौत का समय, बॉडी के किस पार्ट के फेल होने से मौत हुई आदि सवालों के जवाब विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को मिल जाते हैं, जिससे केस की जांच में आसानी हो जाती है।
दिसंबर तक पूरा होगा लैब का काम, होगी 24 जाचें असिस्टेेंट डायरेक्टर ने बताया कि निवाड़ी में बन रहे लैब का निर्माण पूरा हो जाएगा। जिसके बाद विसरा, फिंगरप्रिंट जांच, डीएनए जांच, बायोलॉजिकल जांच, रासायनिक जांच और कार्बनिक जांच समेत कुल 24 जांचें यहां की जा सकेंगी।
सिर्फ गाजियाबाद हापुड़ ही नहीं बल्कि बागपत, बुलंदशहर, मेरठ, नोएडा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को इस लैब से फायदा मिलेगा।