{"_id":"5b7ea70442c792466c1007e3","slug":"71535026948-ghaziabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधार कार्ड बनवाकर अवैध तरीके से रह रहा अफगानी नागरिक गिरफ्तार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आधार कार्ड बनवाकर अवैध तरीके से रह रहा अफगानी नागरिक गिरफ्तार
Updated Thu, 23 Aug 2018 05:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आधार कार्ड बनवाकर रह रहा था अफगानी नागरिक
साहिबाबाद। साहिबाबाद गांव में मंगलवार को पकड़ा गया अफगानिस्तान का नागरिक आधार और पेन कार्ड बनवाकर रह रहा था। पांच साल पहले वह तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने उससे कई घंटे पूछताछ की, लेकिन उसका कोई आतंकी कनेक्शन नहीं मिला। पुलिस ने अफगानिस्तान एंबेसी को उसके यहां होने की जानकारी दे दी है।
एसएचओ लिंकरोड जेपी चौबे ने बताया कि पकड़ा गया ओमेर शाह अहमद जई अफगानिस्तान के काबुल स्थित वजीर मोहल्ला अकबरखान दस का रहने वाला है। ओमेर शाह अहमद तीन अक्तूबर 2013 को तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। वह दिल्ली के चांदनी चौक स्थित समीर होटल में रुका था। इस दौरान ओमेश शाह के रुपये खत्म हो गए। उस पर होटल का करीब 28 हजार का बिल बकाया हो गया। पेमेंट नहीं करने पर होटल संचालक ने उसका वीजा और पासपोर्ट जब्त कर लिया था। इसके बाद ओमेर शाह वहां से हिमाचल प्रदेश के शिमला चला गया। यहां करीब एक साल तक उसने मजदूरी की। इसी बीच उसकी मुलाकात मध्यप्रदेश के देवास निवासी एक व्यक्ति से हुई। उसके सहयोग से वह दिल्ली के वजीरपुर में कपड़ा बेचने लगा। यहां भी करीब एक साल उसने काम किया। एसएचओ ने बताया कि तीन साल पहले ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव में आया और यहां रण सिंह के मकान पर किराए पर रहने लगा। इस दौरान उसने ओमेर खान पुत्र अहमद खान के नाम से आधार और पेन कार्ड भी बनवा लिया। पुलिस ने आधार और पेन कार्ड कब्जे में ले लिया है। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी ने अपने अधूरे नाम से आधार और पेन कार्ड बनवाया। पिता की जगह उसने अपने भाई का नाम लिखाया है।
-------
कर रहा था ट्रांसलेटर की नौकरी
पुलिस के मुताबिक ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव में रहकर दिल्ली और गुरुग्राम के बड़े होटलों में ट्रांसलेटर का काम करता था। वह बहुत अच्छी हिंदी बोलना सीख गया है। वह पशतूनी भी अच्छी बोलता है। कई भाषाओं की समझ रखने के चलते लोग उसकी बातों में आसानी से आ जाते थे। इसके अलावा पुलिस को उसके पास दो डायरी मिली हैं। इसमें आरोपी ने खून से भी लिखा है। खुफिया विभाग ने डायरी की भी जांच कराई, लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला।
विज्ञापन
मकान मालिक पर कार्रवाई की तैयारी
एसएचओ जेपी चौबे ने बताया कि ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव निवासी रण सिंह के मकान में किराये पर रहता था। जल्द ही मकान मालिक को नोटिस भेजा जाएगा कि किराएदार रखते समय उन्होंने पुलिस सत्यापन क्यों नहीं कराया था। इसकी भी जांच की जाएगी अफगानी का आधार और पेन कार्ड कैसे साहिबाबाद गांव के पते पर बना। इसमें कहीं किसी पार्षद का लेटर तो नहीं लगा है।
विज्ञापन
साहिबाबाद। साहिबाबाद गांव में मंगलवार को पकड़ा गया अफगानिस्तान का नागरिक आधार और पेन कार्ड बनवाकर रह रहा था। पांच साल पहले वह तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने उससे कई घंटे पूछताछ की, लेकिन उसका कोई आतंकी कनेक्शन नहीं मिला। पुलिस ने अफगानिस्तान एंबेसी को उसके यहां होने की जानकारी दे दी है।
एसएचओ लिंकरोड जेपी चौबे ने बताया कि पकड़ा गया ओमेर शाह अहमद जई अफगानिस्तान के काबुल स्थित वजीर मोहल्ला अकबरखान दस का रहने वाला है। ओमेर शाह अहमद तीन अक्तूबर 2013 को तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। वह दिल्ली के चांदनी चौक स्थित समीर होटल में रुका था। इस दौरान ओमेश शाह के रुपये खत्म हो गए। उस पर होटल का करीब 28 हजार का बिल बकाया हो गया। पेमेंट नहीं करने पर होटल संचालक ने उसका वीजा और पासपोर्ट जब्त कर लिया था। इसके बाद ओमेर शाह वहां से हिमाचल प्रदेश के शिमला चला गया। यहां करीब एक साल तक उसने मजदूरी की। इसी बीच उसकी मुलाकात मध्यप्रदेश के देवास निवासी एक व्यक्ति से हुई। उसके सहयोग से वह दिल्ली के वजीरपुर में कपड़ा बेचने लगा। यहां भी करीब एक साल उसने काम किया। एसएचओ ने बताया कि तीन साल पहले ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव में आया और यहां रण सिंह के मकान पर किराए पर रहने लगा। इस दौरान उसने ओमेर खान पुत्र अहमद खान के नाम से आधार और पेन कार्ड भी बनवा लिया। पुलिस ने आधार और पेन कार्ड कब्जे में ले लिया है। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी ने अपने अधूरे नाम से आधार और पेन कार्ड बनवाया। पिता की जगह उसने अपने भाई का नाम लिखाया है।
विज्ञापन
-------
कर रहा था ट्रांसलेटर की नौकरी
पुलिस के मुताबिक ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव में रहकर दिल्ली और गुरुग्राम के बड़े होटलों में ट्रांसलेटर का काम करता था। वह बहुत अच्छी हिंदी बोलना सीख गया है। वह पशतूनी भी अच्छी बोलता है। कई भाषाओं की समझ रखने के चलते लोग उसकी बातों में आसानी से आ जाते थे। इसके अलावा पुलिस को उसके पास दो डायरी मिली हैं। इसमें आरोपी ने खून से भी लिखा है। खुफिया विभाग ने डायरी की भी जांच कराई, लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला।
विज्ञापन
मकान मालिक पर कार्रवाई की तैयारी
एसएचओ जेपी चौबे ने बताया कि ओमेर शाह अहमद जई साहिबाबाद गांव निवासी रण सिंह के मकान में किराये पर रहता था। जल्द ही मकान मालिक को नोटिस भेजा जाएगा कि किराएदार रखते समय उन्होंने पुलिस सत्यापन क्यों नहीं कराया था। इसकी भी जांच की जाएगी अफगानी का आधार और पेन कार्ड कैसे साहिबाबाद गांव के पते पर बना। इसमें कहीं किसी पार्षद का लेटर तो नहीं लगा है।