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मधुबन बापूधाम की संपतियों का एक क्लिक पर मिलेगा ब्यौरा
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मधुबन बापूधाम की संपत्तियों का एक क्लिक पर मिलेगा ब्यौरा
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन करने की दिशा में काम तेज हो गया है। पहले चरण में एक जुलाई से शहरवासी घर बैठे मधुबन-बापूधाम योजना की सभी संपत्तियों की घर बैठे ऑनलाइन जानकारी ले सकेंगे। प्राधिकरण की ओर से मधुबन-बापूधाम योजना की संपत्ति संबंधी फाइलों की स्कैनिंग का काम पूरा हो चुका है। संपत्तियों की जियो टैगिंग की प्रक्रिया 25 जून तक पूरी होने के बाद जुलाई से नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
फिर दूसरे चरण में जुलाई के अंत तक राजनगर और इंदिरापुरम की संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन कर दिया जाएगा। ऐसे में इन योजनाओं की आवासीय, सड़क, पार्क सहित सभी छोटी-बड़ी संपत्तियों की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकेगी। संपत्तियों की जियो टैगिंग के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद की ओर से सभी क्षेत्रों की संपत्तियों का विस्तृत नक्शा (जियो रिफरेसिंग रॉ डेटा) प्राधिकरण को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। ऐसे में जियो टैगिंग की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की संभावना है। इसी योजना के तहत जीडीए की ओर से बंगलुरू विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर इंदिरापुरम के पूरे क्षेत्र का वैक्टर मैप तैयार किया जा रहा है।
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महानगर की संपत्तियोें की जियो टैगिंग में लगेंगे दो साल
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले तीन क्षेत्रों की संपत्तियों की जियो टैगिंग की जा रही है। केवल तीन क्षेत्रों के काम में ही करीब छह माह का वक्त लग गया है। साथ ही पूरे गाजियाबाद की संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन अपडेट करने की प्रक्रिया में 18 माह से दो साल तक का वक्त लग सकता है।
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प्रॉपर्टी पर कितना बकाया, यह भी चलेगा पता
जीडीए की नई व्यवस्था से लोगों को बड़ी सहूलियत होगी। बाबुओं के चक्कर में फंसकर लोगों को बार-बार जीडीए के चक्कर नहीं लगाने होंगे। संपत्तियों पर पूरा ब्यौरा ऑनलाइन होने के साथ संपत्ति संबंधी बकाया आसानी से पता चल जाएगा। दूसरी ओर एक जुलाई से नई व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को एक लॉगइन व आईडी जीडीए देगा। जिससे ही लोग अपनी संपत्ति का ब्यौरा देख सकेंगे।
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कोट...
सबसे पहले मधुबन-बापूधाम की सभी संपत्तियों का ब्यौरा जुलाई से ऑनलाइन देखा जा सकेगा। योजना की संपत्ति से जुड़ी फाइलों की स्कैनिंग के साथ जियो टैगिंग का काम 25 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए
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गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन करने की दिशा में काम तेज हो गया है। पहले चरण में एक जुलाई से शहरवासी घर बैठे मधुबन-बापूधाम योजना की सभी संपत्तियों की घर बैठे ऑनलाइन जानकारी ले सकेंगे। प्राधिकरण की ओर से मधुबन-बापूधाम योजना की संपत्ति संबंधी फाइलों की स्कैनिंग का काम पूरा हो चुका है। संपत्तियों की जियो टैगिंग की प्रक्रिया 25 जून तक पूरी होने के बाद जुलाई से नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
फिर दूसरे चरण में जुलाई के अंत तक राजनगर और इंदिरापुरम की संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन कर दिया जाएगा। ऐसे में इन योजनाओं की आवासीय, सड़क, पार्क सहित सभी छोटी-बड़ी संपत्तियों की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकेगी। संपत्तियों की जियो टैगिंग के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद की ओर से सभी क्षेत्रों की संपत्तियों का विस्तृत नक्शा (जियो रिफरेसिंग रॉ डेटा) प्राधिकरण को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। ऐसे में जियो टैगिंग की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की संभावना है। इसी योजना के तहत जीडीए की ओर से बंगलुरू विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर इंदिरापुरम के पूरे क्षेत्र का वैक्टर मैप तैयार किया जा रहा है।
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महानगर की संपत्तियोें की जियो टैगिंग में लगेंगे दो साल
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले तीन क्षेत्रों की संपत्तियों की जियो टैगिंग की जा रही है। केवल तीन क्षेत्रों के काम में ही करीब छह माह का वक्त लग गया है। साथ ही पूरे गाजियाबाद की संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन अपडेट करने की प्रक्रिया में 18 माह से दो साल तक का वक्त लग सकता है।
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प्रॉपर्टी पर कितना बकाया, यह भी चलेगा पता
जीडीए की नई व्यवस्था से लोगों को बड़ी सहूलियत होगी। बाबुओं के चक्कर में फंसकर लोगों को बार-बार जीडीए के चक्कर नहीं लगाने होंगे। संपत्तियों पर पूरा ब्यौरा ऑनलाइन होने के साथ संपत्ति संबंधी बकाया आसानी से पता चल जाएगा। दूसरी ओर एक जुलाई से नई व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को एक लॉगइन व आईडी जीडीए देगा। जिससे ही लोग अपनी संपत्ति का ब्यौरा देख सकेंगे।
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कोट...
सबसे पहले मधुबन-बापूधाम की सभी संपत्तियों का ब्यौरा जुलाई से ऑनलाइन देखा जा सकेगा। योजना की संपत्ति से जुड़ी फाइलों की स्कैनिंग के साथ जियो टैगिंग का काम 25 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए