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सरकार के तमाम दावे फेल, 5 साल से यहां नहीं है कोई टीचर

Tue, 01 Sep 2015 07:20 PM IST
Updated Tue, 01 Sep 2015 07:20 PM IST
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for five years this school of gurgaon is waiting for teachers

सरकार भले ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे पर जोर दे रही हो लेकिन पुन्हाना खंड के गर्ल्स हाईस्कूल की हालत देखकर यह नहीं लगता कि सरकार के इस नारे में कोई दम है।

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इस स्कूल में पिछले पांच साल से किसी भी अध्यापक की पोस्टिंग नहीं हुई है जबकि इसे मिडिल स्कूल के दर्जे से बढ़ाकर हाईस्कूल का दर्जा दिया गया है। प्राइमरी के अध्यापक ही इस स्कूल के बच्चों को पढ़ा रहे हैं, इसी कारण इनकी कक्षाएं आज तक चल रही हैं।
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एसएमसी मेंबर तैयब हुसैन, इमरान और अब्दुल्लाह ने बताया कि उनके गांव में वर्ष 1985 में गर्ल प्राइमरी स्कूल खोला गया था।

बिना टीचर पढ़ रही लड़कियां

for five years this school of gurgaon is waiting for teachers

सरकार ने 20 अक्तूबर 2010 को इस स्कूल का दर्जा बढ़ाकर मिडिल स्कूल कर दिया था लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि सरकार ने 2010 से अब तक इस स्कूल में एक भी अध्यापक की नियुक्ति नहीं की है।

उनका कहना है कि वह सरकार के इस फैसले से तो खुश हैं कि उनके गांव के स्कूल को हाईस्कूल बना दिया लेकिन अफसोस इस बात का है कि सरकार इसमें अध्यापक नियुक्त करना ही भूल गई। बिना अध्यापकों के इस स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा दे दिया गया है। सरकार को इसमें तुरंत शिक्षिकाएं नियुक्त करनी चाहिए।

प्राइमरी गर्ल स्कूल शाह चौखा के मुख्याध्यापक मुजमिल ने बताया कि उनके पास प्राइमरी में साढ़े चार सौ लड़कियां हैं और मिडिल स्कूल में पिछले पांच साल से एक भी अध्यापक नहीं हैं। सरकार द्वारा अध्यापक नियुक्त न किए जाने की वजह से प्राइमरी के तीन अध्यापकों को मिडिल स्कूल की छात्राओं को पढ़ाने के लिए लगाया हुआ है।

प्राइमरी के शिक्षक पढ़ा रहे हैं मिडिल के बच्चों को

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प्राइमरी से आकर मिडिल स्कूल की छात्राओं को पढ़ा रहे अध्यापक पदम ने बताया कि वह प्राइमरी का शिक्षक है। ऐसे में वह करीब डेढ़ सौ बच्चों को साइंस, मैथ, संस्कृत और दूसरे विषय कैसे पढ़ा सकता है।

वे तो केवल बच्चों को घेर कर ही रखते हैं। अब इसे हाई स्कूल बना दिया वे किसी भी कीमत पर हाई स्कूल के बच्चों को पढ़ा नहीं पाएंगे। अगर सरकार ने अध्यापक नहीं भेजे तो एक भी बच्चा दाखिला नहीं लेगा।

स्कूल के अंदर केवल तीन कमरे हैं। इनमें प्राइमरी और मिडिल की करीब 600 लड़कियां ठूंस-ठूंस कर भरी रहतीं हैं। स्कूल में कोई रसोई घर भी नहीं है। बच्चों का मिड-डे-मील स्कूल के आंगन में बनता है।

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शिक्षा अधिकारी को ही नहीं पता क्या है स्कूल का दर्जा

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पुन्हाना के खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी बन बिहारी के पास है। जब उनसे शाह चौखा के स्कूल में पिछले पांच साल से किसी अध्यापक के स्कूल में न होने के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब अजीबोगरीब था।

बन बिहारी का कहना था कि उसमें शिक्षक हैं, जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जब उनको बताया गया कि आज तक सरकार ने एक भी अध्यापक नियुक्त नहीं किया तो उनका जवाब था की रिकॉर्ड देखकर ही बता सकता हूं। वहीं बिहारी को ये भी नहीं पता है कि सरकार ने इस स्कूल का दर्जा मिडिल से बढ़ाकर हाई स्कूल कर दिया है।

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