{"_id":"6ab2d18cb53a1c1f1806406c","slug":"twenty-farmers-were-detained-ahead-of-a-review-at-the-pmo-level-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-80798-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: पीएमओ स्तर पर समीक्षा से पहले 20 किसानों को हिरासत में ले लिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: पीएमओ स्तर पर समीक्षा से पहले 20 किसानों को हिरासत में ले लिया
विज्ञापन
फरीदाबाद सौतई गांव में जमीन मुआवजे को लेकर धरने पर बैठी किसान महिलाओं को पकड़ कर ले जाती पुलिस।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की पीएमओ में आज होनी है समीक्षा, 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने से आठ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से का निर्माण अटका
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नोएडा एयरपोर्ट को फरीदाबाद से जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर प्रशासन मंगलवार को अचानक हरकत में आ गया। सोतई गांव के पास 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य पिछले कई दिनों से प्रभावित हो रहा था। बुधवार को इस परियोजना की प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) स्तर पर समीक्षा होनी है। इससे एक दिन पहले मंगलवार शाम प्रशासन और पुलिस ने सोतई में 33 दिन से धरना दे रहे किसानों को मौके से हटा दिया। पुलिस ने करीब 20 किसानों को हिरासत में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस और किसानों के बीच काफी खींचतान हुई। किसान नेता बबलू हुड्डा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने किसानों पर लाठियां चलाईं और उन्हें धरना स्थल से खदेड़ दिया। किसानों का कहना है कि वे मुआवजे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। वहीं, पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोप से इंकार किया । मंगलवार दोपहर से ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल का सोतई पहुंचना शुरू हो गया था। बल्लभगढ़ के एसडीएम मयंक भारद्वाज समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। शाम करीब चार बजे पुलिस ने धरना दे रहे किसानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार किसानों को पकड़कर बस में बैठाया जा रहा था। इसी दौरान हुई खींचतान में चोट लगने की बात सामने आई। एसडीएम मयंक भारद्वाज ने लाठीचार्ज से इंकार करते हुए कहा कि किसानों को केवल बस में बैठाकर मौके से हटाया गया। इस दौरान हुई खींचतान में कुछ लोगों को चोट लगी हो सकती है। हमारी ओर से किसी को चोट नहीं मारी गई।
-- --
किसानों की हिरासत के बाद महिलाओं का विरोध
पुलिस द्वारा किसानों को हिरासत में लिए जाने के बाद धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने भी विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं ने एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य रोक दिया और काम में लगी अर्थमूवर मशीन के सामने बैठ गईं। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को समझाकर हटाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने वहां से हटने से इंकार कर दिया। देर रात तक मौके पर गहमागहमी बनी रही। बाद में पुलिस बल वहां से लौट गया। प्रशासन की ओर से बुधवार सुबह जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात कही गई है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -
680 मीटर जमीन के कारण आठ किमी एलिवेटेड हिस्से का काम प्रभावित
नोएडा के जेवर स्थित हवाई अड्डे तक आवाजाही आसान बनाने के लिए बनाए जा रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 31 किलोमीटर से अधिक है। परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सोतई गांव में करीब 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण परियोजना के लगभग आठ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
इस जमीन को लेकर नगर निगम और किसानों के बीच मालिकाना हक का मामला अदालत में विचाराधीन है। जमीन शामलात देह की बताई जा रही है। एनएचएआई का कहना है कि जमीन का मुआवजा पहले ही जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद उसे जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। एनएचएआई ने पिछले माह भी पुलिस की मदद से जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया था, जिसका किसानों ने विरोध किया था। इसके बाद किसानों ने मौके पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया था।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
जमीन का मुआवजा पहले ही जारी किया जा चुका है। एनएचएआई की ओर से इसमें कोई लापरवाही नहीं है। 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। बुधवार को परियोजना की पीएमओ कार्यालय द्वारा समीक्षा की जाएगी।
धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
-- --
20 किसानों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई में किसी किसान के घायल होने की सूचना नहीं है और लाठीचार्ज भी नहीं किया गया।-- -पुलिस प्रवक्ता यशपाल
-- -
प्रगति पोर्टल पर दर्ज है परियोजना
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को एनएचएआई ने प्रगति पोर्टल पर पंजीकृत किया हुआ है। इसके कारण परियोजना की प्रगति की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर भी की जा रही है। बुधवार को होने वाली समीक्षा में परियोजना की प्रगति और निर्माण में आ रही अड़चनों की स्थिति सामने रखी जानी है। सोतई में जमीन नहीं मिलने का मामला इस समय परियोजना की प्रमुख अड़चनों में शामिल है।
-- -- --
मोहना आंदोलन से पहले ही 13 महीने की देरी
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण में किसान आंदोलन पहले भी बाधा बन चुका है। मोहना गांव में कट की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2024 तक चला। आंदोलन के कारण करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 13 महीने तक निर्माण प्रभावित रहा था। किसानों ने यमुना पुल का निर्माण भी रुकवा दिया था। इसके चलते परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ानी पड़ी।
इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के निर्माण से मास्टर प्लान-2031 की योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद एनएचएआई ने करीब आठ किलोमीटर हिस्से को एलिवेटेड बनाने का निर्णय लिया। इन कारणों से परियोजना की समयसीमा कई बार बढ़ी और अब इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब सोतई में 680 मीटर जमीन का विवाद परियोजना के सामने नई चुनौती है। यदि जमीन पर जल्द कब्जा नहीं मिला तो एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित हो सकता है और परियोजना की निर्धारित समयसीमा पर भी असर पड़ने की आशंका है।
एक नजर में परियोजना
- 27 सितंबर 2022 को शुरू हुआ था निर्माण कार्य
- 30 सितंबर 2024 तक पूरा होना था पहला लक्ष्य
- 30 जून 2025 तक बढ़ाई गई पहली समयसीमा
- 30 अप्रैल 2027 की गई मौजूदा समयसीमा
- 3600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत
- 31 किलोमीटर से अधिक लंबा है एक्सप्रेसवे
- सेक्टर-65 के सामने डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे से जेवर तक बनेगा
- करीब 75 प्रतिशत काम पूरा
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नोएडा एयरपोर्ट को फरीदाबाद से जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर प्रशासन मंगलवार को अचानक हरकत में आ गया। सोतई गांव के पास 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य पिछले कई दिनों से प्रभावित हो रहा था। बुधवार को इस परियोजना की प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) स्तर पर समीक्षा होनी है। इससे एक दिन पहले मंगलवार शाम प्रशासन और पुलिस ने सोतई में 33 दिन से धरना दे रहे किसानों को मौके से हटा दिया। पुलिस ने करीब 20 किसानों को हिरासत में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस और किसानों के बीच काफी खींचतान हुई। किसान नेता बबलू हुड्डा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने किसानों पर लाठियां चलाईं और उन्हें धरना स्थल से खदेड़ दिया। किसानों का कहना है कि वे मुआवजे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। वहीं, पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोप से इंकार किया । मंगलवार दोपहर से ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल का सोतई पहुंचना शुरू हो गया था। बल्लभगढ़ के एसडीएम मयंक भारद्वाज समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। शाम करीब चार बजे पुलिस ने धरना दे रहे किसानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार किसानों को पकड़कर बस में बैठाया जा रहा था। इसी दौरान हुई खींचतान में चोट लगने की बात सामने आई। एसडीएम मयंक भारद्वाज ने लाठीचार्ज से इंकार करते हुए कहा कि किसानों को केवल बस में बैठाकर मौके से हटाया गया। इस दौरान हुई खींचतान में कुछ लोगों को चोट लगी हो सकती है। हमारी ओर से किसी को चोट नहीं मारी गई।
विज्ञापन
किसानों की हिरासत के बाद महिलाओं का विरोध
पुलिस द्वारा किसानों को हिरासत में लिए जाने के बाद धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने भी विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं ने एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य रोक दिया और काम में लगी अर्थमूवर मशीन के सामने बैठ गईं। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को समझाकर हटाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने वहां से हटने से इंकार कर दिया। देर रात तक मौके पर गहमागहमी बनी रही। बाद में पुलिस बल वहां से लौट गया। प्रशासन की ओर से बुधवार सुबह जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात कही गई है।
विज्ञापन
680 मीटर जमीन के कारण आठ किमी एलिवेटेड हिस्से का काम प्रभावित
नोएडा के जेवर स्थित हवाई अड्डे तक आवाजाही आसान बनाने के लिए बनाए जा रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 31 किलोमीटर से अधिक है। परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सोतई गांव में करीब 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण परियोजना के लगभग आठ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
इस जमीन को लेकर नगर निगम और किसानों के बीच मालिकाना हक का मामला अदालत में विचाराधीन है। जमीन शामलात देह की बताई जा रही है। एनएचएआई का कहना है कि जमीन का मुआवजा पहले ही जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद उसे जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। एनएचएआई ने पिछले माह भी पुलिस की मदद से जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया था, जिसका किसानों ने विरोध किया था। इसके बाद किसानों ने मौके पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया था।
जमीन का मुआवजा पहले ही जारी किया जा चुका है। एनएचएआई की ओर से इसमें कोई लापरवाही नहीं है। 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। बुधवार को परियोजना की पीएमओ कार्यालय द्वारा समीक्षा की जाएगी।
धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
20 किसानों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई में किसी किसान के घायल होने की सूचना नहीं है और लाठीचार्ज भी नहीं किया गया।
प्रगति पोर्टल पर दर्ज है परियोजना
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को एनएचएआई ने प्रगति पोर्टल पर पंजीकृत किया हुआ है। इसके कारण परियोजना की प्रगति की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर भी की जा रही है। बुधवार को होने वाली समीक्षा में परियोजना की प्रगति और निर्माण में आ रही अड़चनों की स्थिति सामने रखी जानी है। सोतई में जमीन नहीं मिलने का मामला इस समय परियोजना की प्रमुख अड़चनों में शामिल है।
मोहना आंदोलन से पहले ही 13 महीने की देरी
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण में किसान आंदोलन पहले भी बाधा बन चुका है। मोहना गांव में कट की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2024 तक चला। आंदोलन के कारण करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 13 महीने तक निर्माण प्रभावित रहा था। किसानों ने यमुना पुल का निर्माण भी रुकवा दिया था। इसके चलते परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ानी पड़ी।
इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के निर्माण से मास्टर प्लान-2031 की योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद एनएचएआई ने करीब आठ किलोमीटर हिस्से को एलिवेटेड बनाने का निर्णय लिया। इन कारणों से परियोजना की समयसीमा कई बार बढ़ी और अब इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब सोतई में 680 मीटर जमीन का विवाद परियोजना के सामने नई चुनौती है। यदि जमीन पर जल्द कब्जा नहीं मिला तो एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित हो सकता है और परियोजना की निर्धारित समयसीमा पर भी असर पड़ने की आशंका है।
एक नजर में परियोजना
- 27 सितंबर 2022 को शुरू हुआ था निर्माण कार्य
- 30 सितंबर 2024 तक पूरा होना था पहला लक्ष्य
- 30 जून 2025 तक बढ़ाई गई पहली समयसीमा
- 30 अप्रैल 2027 की गई मौजूदा समयसीमा
- 3600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत
- 31 किलोमीटर से अधिक लंबा है एक्सप्रेसवे
- सेक्टर-65 के सामने डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे से जेवर तक बनेगा
- करीब 75 प्रतिशत काम पूरा