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कम नंबर आने से परेशान छात्रा ने दी जान

Wed, 30 Mar 2022 11:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 11:21 PM IST
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Troubled girl student gave her life due to low number
फरीदाबाद। गांधी कॉलोनी निवासी 11वीं की छात्रा मीली (17) ने मंगलवार रात पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। हाल ही में उसका परीक्षा परिणाम आया था, उसमें कम नंबर आने से वह परेशान थी। मामले की सूचना पाकर मौके पर पहुंची एनआईटी थाने की पुलिस ने बीके अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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पुलिस के अनुसार, मीली के पिता सुरेश और मां दोनों एक निजी कंपनी में काम करते हैं। कंपनी से घर आने के बाद दोनों ने मीली को पंखे में लगे फंदे से झूलता हुआ देखा। इससे उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। एनआईटी थाना प्रभारी जयवीर ने बताया कि पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में परिजनों से आत्महत्या के कारणों की पूछताछ की गई। इसमें उन्होंने बताया कि मीली 11वीं की छात्रा थी। मंगलवार को उसका परिणाम आया था। उसमें नंबर कम आने से वह परेशान हो गई थी। हालांकि, उसे काफी समझाया गया और कहा कि कोई बात नहीं, आगे सब कुछ ठीक होगा। परिजनों ने उसका हौसला भी बढ़ाया। फिर सभी ड्यूटी चले गए। रात करीब नौ बजे परिजन घर लौटे तो उसे पंखे से लगे फंदे पर झूलता हुआ पाया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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आईएएस बनना चाहती थी मीली
पिता सुरेश ने बताया कि वह काफी मेधावी छात्रा थी। पढ़ने में भी काफी होशियार थी। उसकी पढ़ाई के प्रति लगन देखकर लगता था कि वह एक बड़ी अधिकारी बनेगी। वह अक्सर कहती थी, पापा हम लोग किराए के मकान में रहते हैं, कोई बात नहीं। मैं अच्छे से पढ़ाई करूंगी और बड़ी अधिकारी बनकर सारे दुखों को दूर कर दूंगी। पिता सुरेश ने बताया कि मीली आईएएस बनना चाहती थी।
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बच्चों से रखें मित्रवत व्यवहार
मनोचिकित्सक डॉ. अशीष खंडेवाल ने बताया कि समय के साथ बच्चों की मानसिक सोच भी बदल रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी में वह अपने आपको ज्यादा व्यस्त कर रहे हैं। इससे उन पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में छोटी से छोटी गलती काफी गंभीरता से ले रहे हैं और इससे दबाव में आकर वह बड़ा कदम उठा ले रहे हैं। वह अपनी दिक्कतों के बारे में माता-पिता को भी नहीं बताते हैं। ऐसे में माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है। माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार रखें और उसके दुखों की जानकारी जुटाने की कोशिश करें। बच्चों के तनाव को कम करने की कोशिश करें।
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