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Faridabad News: शहर में रोजाना 300 टन मलबे से बनाई जाएंगी टाइल्स व ईंट

Thu, 28 Aug 2025 12:31 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:31 AM IST
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Tiles and bricks will be made from 300 tons of rubble every day in the city
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम लगाए आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट, मलबे के कारण लगातार बढ़ रहा है प्रदूषण, यमुना को भी हो रहा है नुकसान
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मोहित शुक्ला

फरीदाबाद। शहर में तेजी से हो रहे विकास और निर्माण कार्यों के बीच हर दिन हजारों टन निर्माण एवं ध्वंस (सी एंड डी) मलबा निकल रहा है। जो अब तक सड़कों, खाली जगहों और नालों में डंप होकर पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट खड़ा कर रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम फरीदाबाद ने मिलकर एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत निर्माण-ध्वंस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान के लिए एक आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत सवा सात करोड़ रुपये रखी गई है। प्लांट की प्रोसेसिंग क्षमता प्रतिदिन 300 टन होगी, जिसे आगे बढ़ाकर जरूरत पड़ने पर 500 टन तक किया जा सकेगा। इसका संचालन एक निजी एजेंसी को सौंपा जाएगा, जिसे मलबे के संग्रह, ढुलाई और रीसाइक्लिंग की जिम्मेदारी निभानी होगी।
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अभी तक नहीं है कोई समुचित व्यवस्था
अब तक शहर में निर्माण मलबे के लिए कोई समुचित व्यवस्था न होने से जगह-जगह गड्ढे खोदकर उसमें मलबा डाला जाता है। इससे धूल प्रदूषण, बारिश में जलभराव और डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नया प्लांट लगने के बाद न केवल शहर को मलबे के ढेर से छुटकारा मिलेगा बल्कि रीसाइक्लिंग से तैयार सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं में किया जाएगा।
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खुले में मलबा फेंकने पर होगी कार्रवाई
निगम ने स्पष्ट किया है कि प्लांट लगाने वाली एजेंसी को तय समय पर मलबा उठाने और उसकी प्रोसेसिंग करने की जिम्मेदारी होगी। यदि एजेंसी नियमों का पालन नहीं करती तो उस पर प्रति दिन 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं मलबा फेंकने वाले व्यक्तियों और ठेकेदारों पर भी नगर निगम कार्रवाई करेगा। इसके लिए मोबाइल एप और टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जहां नागरिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

पर्यावरण सुरक्षा के लिए अहम कदम
परियोजना से शहर में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। अनुमान है कि इस प्लांट के संचालन और परिवहन व्यवस्था में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 150 से अधिक लोगों को काम मिलेगा। साथ ही, रीसाइक्लिंग तकनीक से सड़कों और फुटपाथों के लिए इंटरलॉकिंग टाइल्स, ईंट और सब-बेस मटेरियल तैयार होगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।


अक्टूबर तक काम शुरू करने की है योजना
निगम का लक्ष्य है कि अक्टूबर से काम शुरू कर दिया जाए और अगले छह महीनों में प्लांट पूरी तरह चालू हो जाए। प्लांट शुरू होने से लोगों को लाभ मिलने के साथ शहर से गंदगी भी काफी हद तक कम हो जाएगी।




निगम की तरफ से शहर में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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