फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   pre-workout impact on hearts of youth Doctors issue warning

मसल्स बनाने के चक्कर में 'मौत' को न लगाएं मुंह: जिम जाने और आने बाद आप तो नहीं करते ये गलती, जा सकती है जान

Mon, 28 Sep 2026 06:56 PM IST
विकास कुमार भारती दुबे, अमर उजाला, फरीदाबाद
भारती दुबे, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: विकास कुमार Updated Mon, 28 Sep 2026 06:56 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले उसके घटकों, मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। तेज धड़कन, चक्कर, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

विज्ञापन
pre-workout impact on hearts of youth Doctors issue warning
जिम में वर्कआउट करने वाले सावधान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मसल्स बनाने और शरीर को फिट रखने के लिए युवाओं में जिम जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही प्री-वर्कआउट पाउडर, एनर्जी सप्लीमेंट और अन्य उत्पादों के इस्तेमाल का चलन भी बढ़ा है। कई युवा इनके सेवन से पहले अपने हृदय स्वास्थ्य की जांच तक नहीं कराते। अब अस्पतालों में 18 से 40 साल की उम्र में भी लोग हृदय संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।

विज्ञापन

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले उसके घटकों, मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। तेज धड़कन, चक्कर, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, बीके नागरिक अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित विशेषज्ञ उपचार की सीमित उपलब्धता के कारण मरीजों को कई बार निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में सामान्य जांच से लेकर विशेषज्ञ परामर्श तक के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ जाती है। हृदय संबंधी गंभीर लक्षणों में समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलना महत्वपूर्ण होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीन महीने में 2751 मरीज उपचार के लिए पहुंचे
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के वरिष्ठ निदेशक कार्डियोलॉजी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि पिछले तीन महीनों में 2751 मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि कम उम्र में भी हृदय संबंधी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी समय से पहले कोरोनरी बीमारी देखी जाती है। हालांकि, हृदय संबंधी परेशानी के लिए केवल जिम या सप्लीमेंट ही नहीं, बल्कि धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, वजन और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारक मिलकर जोखिम बढ़ा सकते हैं।

विज्ञापन

बचाव में जीवनशैली सबसे अहम
एशियन अस्पताल के डॉ. सुब्रत अखौरी ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 30 मरीज उपचार के लिए आते हैं। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण हैं। समय-समय पर रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। कई मामलों में दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी या अन्य उपचार किए जाते हैं।

सीने में दर्द को गैस समझकर न टालें
सेक्टर-88 स्थित यथार्थ अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. बिनय कुमार पांडे ने बताया कि सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, असामान्य थकान, अत्यधिक पसीना, चक्कर आना या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ अथवा जबड़े तक पहुंचना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। इन्हें गैस या सामान्य थकान समझकर टालने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed