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Faridabad News: युवाओं ने किया वंदे मातरम् का सामूहिक गायन
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बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर दिया राष्ट्रभक्ति का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। साहित्यकार और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर मेरा युवा भारत (माय भारत) फरीदाबाद की ओर से शनिवार को वंदे मातरम् के सामूहिक पूर्ण गायन का आयोजन किया गया। केनरा बैंक के व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में करीब 100 युवाओं ने भाग लेकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान जिला युवा अधिकारी प्रियंका ने युवाओं को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में की गई थी और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्तों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1896 में कोलकाता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।
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जिला युवा अधिकारी ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा राष्ट्रीय मूल्यों और स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कर देश की एकता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। साहित्यकार और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर मेरा युवा भारत (माय भारत) फरीदाबाद की ओर से शनिवार को वंदे मातरम् के सामूहिक पूर्ण गायन का आयोजन किया गया। केनरा बैंक के व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में करीब 100 युवाओं ने भाग लेकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान जिला युवा अधिकारी प्रियंका ने युवाओं को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में की गई थी और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्तों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना।
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उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1896 में कोलकाता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।
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जिला युवा अधिकारी ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा राष्ट्रीय मूल्यों और स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कर देश की एकता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।