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चालक ने ऑटो को बनाया मिनी गार्डन, लोगों ने की तारीफ, प्रदूषण के प्रति लोगों को कर रहे हैं जागरूक,
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पर्यावरण बचाओ का संदेश देते ऑटो चालक अनुज चौहान ।
- फोटो : Faridabad
बल्लभगढ़। शहर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए चालक अनुज ने अपने ऑटो को ही एक छोटा पार्क (मिनी गार्डन) बना दिया है। जहां से ऑटो गुजरता है तो लोग एक बार जरूर देखने लगते हैं।
बदरपुर बॉर्डर निवासी अनुज चौहान ने अपने ऑटो को भी इको फ्रेंडली बनाया है। ऑटो को मिनी गार्डन बनाकर ऑक्सीजन देने वाले पौधे लगाए हैं। इस मिनी गार्डन को बनाने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़े, लेकिन ऑटो में सफर करने वाले यात्रियों द्वारा जब आश्वासन दिया जाता है कि वह भी शहर को प्रदूषण मुक्त करने में सहयोग देंगे तो उनको काफी खुशी होती है। अनुज चौहान ने बताया कि वह चार साल से ऑटो चला रहा है, लेकिन डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने ऑटो के अंदर कुछ छोटे-छोटे पौधे लगाए थे जोकि ऑक्सीजन देते हैं। उन पौधों को रखने के बाद उन्होंने सोचा कि ऑटो को क्यों ना एक मिनी गार्डन का रूप दिया जाए। जिसके बाद करीब एक महीने पहले 20 हजार रुपये की लागत से ऑटो को एक मिनी गार्डन का रूप दिया। चौहान ने बताया कि इस ऑटो में 15 गमले हैं। गमले ऑटो में आगे और पीछे रखे हैं। इनमें एलोवेरा, तुलसी और अन्य ऐसे पौधे हैं, जो ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में देते हैं।
ऑटो के चारों तरफ आर्टिफिशियल घास लगी है। यही नहीं उन्होंने ऊपर की छत पर एक अलग से खिड़की बनवाई है। जोकि सवारी अपने अनुसार इस्तेमाल कर सकती है। उसमें कांच का शीशा लगा हुआ है। जब सवारी उनके ऑटो में सफर करती है तो उनको ऐसा लगता है कि वह चलते फिरते गार्डन में घूम रहे हैं। अनुज चौहान ने बताया कि परिवार में दो भाई, एक बहन और माता-पिता है। सभी के द्वारा इस मुहिम में उनका साथ दिया गया और अपनी सुविधा अनुसार उनको पैसों की मदद की। अभी उनके द्वारा ऑटो बीके अस्पताल से डबुआ तक चलाता है। सवारियों को एक पौधा लगाने को कहते हैं।
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बदरपुर बॉर्डर निवासी अनुज चौहान ने अपने ऑटो को भी इको फ्रेंडली बनाया है। ऑटो को मिनी गार्डन बनाकर ऑक्सीजन देने वाले पौधे लगाए हैं। इस मिनी गार्डन को बनाने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़े, लेकिन ऑटो में सफर करने वाले यात्रियों द्वारा जब आश्वासन दिया जाता है कि वह भी शहर को प्रदूषण मुक्त करने में सहयोग देंगे तो उनको काफी खुशी होती है। अनुज चौहान ने बताया कि वह चार साल से ऑटो चला रहा है, लेकिन डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने ऑटो के अंदर कुछ छोटे-छोटे पौधे लगाए थे जोकि ऑक्सीजन देते हैं। उन पौधों को रखने के बाद उन्होंने सोचा कि ऑटो को क्यों ना एक मिनी गार्डन का रूप दिया जाए। जिसके बाद करीब एक महीने पहले 20 हजार रुपये की लागत से ऑटो को एक मिनी गार्डन का रूप दिया। चौहान ने बताया कि इस ऑटो में 15 गमले हैं। गमले ऑटो में आगे और पीछे रखे हैं। इनमें एलोवेरा, तुलसी और अन्य ऐसे पौधे हैं, जो ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में देते हैं।
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ऑटो के चारों तरफ आर्टिफिशियल घास लगी है। यही नहीं उन्होंने ऊपर की छत पर एक अलग से खिड़की बनवाई है। जोकि सवारी अपने अनुसार इस्तेमाल कर सकती है। उसमें कांच का शीशा लगा हुआ है। जब सवारी उनके ऑटो में सफर करती है तो उनको ऐसा लगता है कि वह चलते फिरते गार्डन में घूम रहे हैं। अनुज चौहान ने बताया कि परिवार में दो भाई, एक बहन और माता-पिता है। सभी के द्वारा इस मुहिम में उनका साथ दिया गया और अपनी सुविधा अनुसार उनको पैसों की मदद की। अभी उनके द्वारा ऑटो बीके अस्पताल से डबुआ तक चलाता है। सवारियों को एक पौधा लगाने को कहते हैं।
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