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नकलची बोला, सर किडनी खराब है... केस बनाया तो जी नहीं पाऊंगा
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फरीदाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से मंगलवार को 10वीं कक्षा की गणित की परीक्षा हुई। जिले के 83 केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में 11 उड़नदस्तों ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पांच नकलची पकड़े गए, जिसमें एक नकलची ने केस बनने से बचने के लिए अपनी किडनी तक खराब बता दी। नकलची का कहना था कि एक किडनी पर जिंदा हूं। केस बनाया तो जी नहीं पाऊंगा सर। मामले की जानकारी के लिए उड़नदस्ते ने नकलची के परिजनों से बात की। पता लगा कि केस से बचने के लिए उसने मनगढ़ंत कहानी सुना दी।
बोर्ड अध्यक्ष उड़नदस्ते की छापेमारी में पल्ला स्थित मुरारी पब्लिक स्कूल में यह मामला पकड़ा गया। उड़नदस्ता टीम के सदस्य सतेंद्र सोरौत व विभा जैन ने बताया कि एक परीक्षार्थी गणित का प्रश्नपत्र हल करने में जुटा था। शक होने पर टीम ने परीक्षार्थी की जांच की। इससे उसके पसीने छूट गए। जांच में उसके जेब से नकल के फर्रे मिले। ऐसे में टीम सदस्य ने उस पर केस बनाने की बात कही तो परीक्षार्थी कांपने लगा और बोला सर, मैं किडनी का मरीज हूं। केवल एक किडनी पर जिंदा हूं। नकल का केस बनाओगे तो जी नहीं पाऊंगा। परीक्षार्थी के इतना बोलने पर टीम ने उसकी स्थिति जानने के लिए परिजनों से संपर्क किया।
परीक्षार्थी के पिता निरंजन सिंह ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं है। सुबह जरूर वह पेचिश की शिकायत कर रहा था, लेकिन यह सब परीक्षा का डर है। बल्लभगढ़ स्थित राजकीय विद्यालय की गणित प्राध्यापक विभा जैन ने बताया कि परीक्षा का स्तर औसत रहा। वह उड़नदस्ते में शामिल रहीं। उन्होंने स्वयं परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। कुछ बच्चों को छोड़ दें तो शेष स्वयं परीक्षा हल करने में सक्षम रहे। वहीं, एक मामला बल्लभगढ़ उड़नदस्ते ने पकड़ा। दो मामले उपायुक्त उड़नदस्ते ने पकड़े। एक बोर्ड उपाध्यक्ष उड़नदस्ते ने पकड़ा। जिला उपायुक्त उड़नदस्ते में शामिल अंग्रेजी अध्यापक अविनाशा शर्मा ने बताया की दो मामले राजकीय स्कूल में पकड़े गए। यह दोनों ही नकलची सरकारी स्कूल के रहे। इसमें परीक्षा कक्ष में तैनात पर्यवेक्षक की लापरवाही सामने आई। ऐसे में पर्यवेक्षक को भी उड़नदस्ते ने नकल को बढ़ावा देने के लिए आरोपी बताया। हालांकि, मामले में कोई ठोस सबूत न होने पर पर्यवेक्षक को खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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बोर्ड अध्यक्ष उड़नदस्ते की छापेमारी में पल्ला स्थित मुरारी पब्लिक स्कूल में यह मामला पकड़ा गया। उड़नदस्ता टीम के सदस्य सतेंद्र सोरौत व विभा जैन ने बताया कि एक परीक्षार्थी गणित का प्रश्नपत्र हल करने में जुटा था। शक होने पर टीम ने परीक्षार्थी की जांच की। इससे उसके पसीने छूट गए। जांच में उसके जेब से नकल के फर्रे मिले। ऐसे में टीम सदस्य ने उस पर केस बनाने की बात कही तो परीक्षार्थी कांपने लगा और बोला सर, मैं किडनी का मरीज हूं। केवल एक किडनी पर जिंदा हूं। नकल का केस बनाओगे तो जी नहीं पाऊंगा। परीक्षार्थी के इतना बोलने पर टीम ने उसकी स्थिति जानने के लिए परिजनों से संपर्क किया।
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परीक्षार्थी के पिता निरंजन सिंह ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं है। सुबह जरूर वह पेचिश की शिकायत कर रहा था, लेकिन यह सब परीक्षा का डर है। बल्लभगढ़ स्थित राजकीय विद्यालय की गणित प्राध्यापक विभा जैन ने बताया कि परीक्षा का स्तर औसत रहा। वह उड़नदस्ते में शामिल रहीं। उन्होंने स्वयं परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। कुछ बच्चों को छोड़ दें तो शेष स्वयं परीक्षा हल करने में सक्षम रहे। वहीं, एक मामला बल्लभगढ़ उड़नदस्ते ने पकड़ा। दो मामले उपायुक्त उड़नदस्ते ने पकड़े। एक बोर्ड उपाध्यक्ष उड़नदस्ते ने पकड़ा। जिला उपायुक्त उड़नदस्ते में शामिल अंग्रेजी अध्यापक अविनाशा शर्मा ने बताया की दो मामले राजकीय स्कूल में पकड़े गए। यह दोनों ही नकलची सरकारी स्कूल के रहे। इसमें परीक्षा कक्ष में तैनात पर्यवेक्षक की लापरवाही सामने आई। ऐसे में पर्यवेक्षक को भी उड़नदस्ते ने नकल को बढ़ावा देने के लिए आरोपी बताया। हालांकि, मामले में कोई ठोस सबूत न होने पर पर्यवेक्षक को खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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