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Faridabad News: शहर में छठ घाट की संख्या बढ़ाने पर काम करे प्रशासन

Sun, 31 Aug 2025 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:42 AM IST
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The administration should work on increasing the number of Chhath Ghat in the city
भोजपुरी-अवधी समाज के लोगों ने संवाद कार्यक्रम में कहा - फरीदाबाद से बिहार के लिए शुरू हो सीधी ट्रेन
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। भोजपुरी चौक स्थित सामुदायिक केंद्र और आसपास के क्षेत्र में छठ घाट की कमी, गंदगी और जलभराव की समस्या से भोजपुरी-अवधी समाज के लोग लंबे समय से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि बारिश के बाद कॉलोनियों से पानी निकलने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। सड़कों पर पानी भरा रहता है लेकिन पर्याप्त पेयजल नहीं मिलता है।

गोपीनाथ तिवारी, बदरी प्रसाद, मेघनाथ, नरेश प्रसाद, विरेन्द्र शर्मा ने बताया कि फरीदाबाद में पूर्वांचल और बिहार से आए लाखों लोग रहते हैं। हर साल सामुदायिक केंद्र के बाहर बने घाट पर करीब दस हजार लोग छठ पूजा का महापर्व धूमधाम से मनाते हैं। जनसंख्या बढ़ने के कारण अब घाटों की संख्या कम पड़ रही है, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा झेलनी पड़ती है।
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इसके अलावा बिहार जाने के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। फरीदाबाद से बिहार के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। यात्रियों को दिल्ली तक सफर करना पड़ता है और फिर वहां से ट्रेन पकड़नी होती है।
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वर्जन---
पूर्वांचली समाज जिले के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है, इसके बावजूद छठ पर्व पर अवकाश घोषित नहीं किया जाता। -रामाकांत तिवारी चेयरमैन भोजपुरी अवधी समाज

यहां पानी सड़कों पर है लेकिन नलों में नहीं, 24 घंटे की सप्लाई तो दूर 7–8 घंटे भी पानी नहीं आता।- रामसेवक शाह , कोषाध्यक्ष भोजपुरी अवधी समाज
छठ महापर्व पर 10 हजार लोग जुटते हैं लेकिन घाटों की कमी है, श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ती है।-नरेश प्रसाद, महासचिव भोजपुरी अवधी समाज
फरीदाबाद से बिहार के लिए एक भी सीधी ट्रेन नहीं है, हमें दिल्ली जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है।-प्रदीप गुप्ता, प्रचारक भोजपुरी अवधी समाज
केंद्र के बाहर कूड़े और जलभराव की स्थिति इतनी खराब है कि त्योहारों पर श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।-रघुवर दयाल, अध्यक्ष भोजपुरी अवधी समय
भोजपुरी, अवधि, पूर्वांचली, समाज की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन हमारी जरूरतों और त्योहारों पर प्रशासन ध्यान नहीं देता।- कामरेड बेचू गिरी, सदस्य
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