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Faridabad: टेरी की रिपोर्ट बताएगी प्रदूषण गंभीर होने का प्रमुख कारण, दो माह में जारी होगी रिपोर्ट

Fri, 04 Aug 2023 06:54 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 04 Aug 2023 06:54 PM IST
सार

टेरी के सीनियर रिर्सचर वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि जिले में प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए शहर को पांच भागों में बांट कर दो सीजन का डेटा मशीनों से लिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से भी इससे संबंधित डाटा लिया गया है।

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TERI report will tell the main reason for serious pollution
फाइल फोटो - फोटो : एएनआई

विस्तार

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) सर्दी और गर्मी के मौसम में वायु प्रदूषण के डाटा का लैब में अध्ययन करने में जुटा गया है। इसमें पार्टिकुलेट मैटर-2.5 से भी अति सूक्ष्म कणों का पता लगाया जाएगा। साथ ही इस बात का पता चलाया जाएगा कि शहर में प्रदूषण गंभीर होने में कौन-कौन से कारण रहते हैं। इसमें पराली समेत अन्य कारणों पर ध्यान रखा जा रहा है। रिपोर्ट को दो माह में जारी हो सकती है।

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टेरी के सीनियर रिर्सचर वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि जिले में प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए शहर को पांच भागों में बांट कर दो सीजन का डेटा मशीनों से लिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से भी इससे संबंधित डाटा लिया गया है। इसके अलावा फिल्ड सर्वे से डाटा लिया गया है। ऐसे में लैब के साथ सांख्यिकी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से वर्तमान में वाहनों की संख्या के साथ पांच साल पहले शहर में पंजीकृत वाहनों का डाटा लिया गया है। जांच के दौरान पीएम 2.5 से भी कम आकार वाले कणों का लैब में जांच की जा रही रही है। इसमें कणों के उत्पत्ति के आधार पर ही पता चल सकेगा कि स्थानीय स्तर पर कण बने या बाहर से आए हैं। अधिकारी ने बताया कि इससे रीयल टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी से प्रदूषण की तस्वीर साफ होगी। सभी प्रकार के डाटा की रिपोर्ट को अलग-अलग मॉडलों के आधार पर जांचा जाएगा। इससे हर मौसम में होने वाले प्रदूषण की सही तस्वीर मिल सकेगी।


 
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बता दें कि जिले में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। जिले में करीब 28 हजार छोटी-बड़ी कंपनियां हैं। वहीं, हाईवे समेत अन्य सड़कों पर वाहनों का दबाव और टूटी सड़कों से भी प्रदूषण होता है। कई बार पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा पराली जलाने से भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या होने की बात सामने आती है। ऐसे में टेरी के अध्ययन से यह पता चल सकेगा कि प्रदूषण ज्यादा होने पर पराली या अन्य कौन से कारण प्रमुख रुप से जिम्मेदार है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत नगर निगम टेरी से प्रदूषण के कारणों का अध्ययन करा रहा है। जिससे प्रदूषण की समस्या पर निजात पाई जाए।


 
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पीएम 2.5-
पीएम 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है, जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3 प्रतिशत होता है। आम तौर पर पीएम 2. 5 के रूप में लिखा जाता है। इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है, ये पीएम 10 के समकक्षों से भी छोटे होते हैं।

 

प्रदूषण को लेकर उठाए जाने वाले कदम-

1. शहर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए ग्रीन बेल्ट व डिवाइडर पर पौधे लगाने की योजना है। इसके लिए विधानसभा वार मियावाकी तकनीक से पौधे लगाए जाएंगे। इसका टेंडर जारी किया जा चुका है।
2. निगम छोटी व बड़ी सात एंटी स्मॉग गन ली हुई है। दो बड़ी एंटी स्मॉग गन लेने की प्रक्रिया और चल रही है।
3. शहर में सीवर शोधन संयंत्र लगाए जा रहे हैं। एक दर्जन जगह तय हो चुके हैं और लगाए भी जा रहे हैं।

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