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Faridabad News: वैक्सीन बनाने की यात्रा को विद्यार्थियों ने मॉडलों के जरिए जाना
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फरीदाबाद। गुरुग्राम रोड स्थित ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) में बुधवार को शुरु हुए भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में पहुंचे स्कूली विद्यार्थियों को कोविड वैक्सीन बनाने की जानकरी दी गई। साथ ही उन्हें बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक किसी प्रकार की वैक्सीन का निर्माण करते हैं और उसका लोगों पर ट्रायल किया जाता है। इंस्टीट्यूट में मरीजों पर ट्रायल शुरू करने के लिए अलग से 50 बेड का एक अस्पताल भी बनाया जा रहा है। जिससे इस कार्य में ओर तेजी आएगी।
टीएचएसटीआई ने कोरोना के समय में वैक्सीन निर्माण में अहम भूमिका निभाई। कोविड वैक्सीन बनाने के मरीजों और आम लोगों के सैंपल लिए गए। इनकी कई चरणों में टेस्टिंग की गई और बेहद कम समय में वैक्सीन तैयार कर लोगों की जान बचाई गई, लेकिन इस विषय में लोगों को कोई खास जानकारी नहीं है। इसी जानकारी के लिए बुधवार को अनेक स्कूलों के छात्र विज्ञान महोत्सव में पहुंचे। छात्रें को वायरस के अलग-अलग मॉडल दिखाए गए।
इके बाद उन्हें बताया कि वायरस शरीर में कैसे बीमारी को बढ़ाता है और उस वायरस से लड़ने की एंटीडोड या वैक्सीन कैसे बनाई जाती है। सभी चीजों की बच्चों को एक-एक करके जानकारी दी गई। अंतिम स्टाल पर बच्चों को वैक्सीन ट्रायल से अवगत कराया गया। टीएचएसटीआई की वैज्ञानिक डॉ. पायल ने बताया कि वैक्सीन के पहले फेस दो लोगों पर ट्रायल किया जाता है। दूसरे फेस में छह और तीसरे में करीब 12 लोगों को शामिल किया जाता है। अभी ट्रायल के लिए मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल में भर्ती करना पड़ता है, जल्द ही इंस्टीट्यूटी का अपना 50 बेड का अस्पताल होगा। जिसका निर्माण जारी है। इसे 100 बेड तक बढ़ाया जा सकता है। जिसमें ट्रायल के लिए मरीज को भर्ती करने से लेकर उसकी पूरी देखरेख की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ के साथ साझेदारी के तहत टीएचएसटीआई प्रयोगशालाओं में सीओवीआईडी वैक्सीन का परीक्षण हुआ और उन्होंने बताया कि यह ओमिक्रॉन वायरस का आंकलन करने वाली भारत की पहली प्रयोगशाला थी। उन्होंने कहा कि टीएचएसटीआई डीबीटी के तहत शीर्ष संस्थानों में से एक है और इस संस्थान ने अनुसंधान के कई क्षेत्रों जैसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीका विकास, तपेदिक और डेंगू के खिलाफ चिकित्सीय अणु और नए नैदानिक उपकरणों में बहुत अच्छा काम किया है। इसमें बीएसएल-3 लैब, प्रायोगिक पशु सुविधा, एक बड़ी बायोरिपोजिटरी और आणविक अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक आधुनिक उपकरण जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं।
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टीएचएसटीआई ने कोरोना के समय में वैक्सीन निर्माण में अहम भूमिका निभाई। कोविड वैक्सीन बनाने के मरीजों और आम लोगों के सैंपल लिए गए। इनकी कई चरणों में टेस्टिंग की गई और बेहद कम समय में वैक्सीन तैयार कर लोगों की जान बचाई गई, लेकिन इस विषय में लोगों को कोई खास जानकारी नहीं है। इसी जानकारी के लिए बुधवार को अनेक स्कूलों के छात्र विज्ञान महोत्सव में पहुंचे। छात्रें को वायरस के अलग-अलग मॉडल दिखाए गए।
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इके बाद उन्हें बताया कि वायरस शरीर में कैसे बीमारी को बढ़ाता है और उस वायरस से लड़ने की एंटीडोड या वैक्सीन कैसे बनाई जाती है। सभी चीजों की बच्चों को एक-एक करके जानकारी दी गई। अंतिम स्टाल पर बच्चों को वैक्सीन ट्रायल से अवगत कराया गया। टीएचएसटीआई की वैज्ञानिक डॉ. पायल ने बताया कि वैक्सीन के पहले फेस दो लोगों पर ट्रायल किया जाता है। दूसरे फेस में छह और तीसरे में करीब 12 लोगों को शामिल किया जाता है। अभी ट्रायल के लिए मरीजों को ईएसआईसी मेडिकल में भर्ती करना पड़ता है, जल्द ही इंस्टीट्यूटी का अपना 50 बेड का अस्पताल होगा। जिसका निर्माण जारी है। इसे 100 बेड तक बढ़ाया जा सकता है। जिसमें ट्रायल के लिए मरीज को भर्ती करने से लेकर उसकी पूरी देखरेख की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ के साथ साझेदारी के तहत टीएचएसटीआई प्रयोगशालाओं में सीओवीआईडी वैक्सीन का परीक्षण हुआ और उन्होंने बताया कि यह ओमिक्रॉन वायरस का आंकलन करने वाली भारत की पहली प्रयोगशाला थी। उन्होंने कहा कि टीएचएसटीआई डीबीटी के तहत शीर्ष संस्थानों में से एक है और इस संस्थान ने अनुसंधान के कई क्षेत्रों जैसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीका विकास, तपेदिक और डेंगू के खिलाफ चिकित्सीय अणु और नए नैदानिक उपकरणों में बहुत अच्छा काम किया है। इसमें बीएसएल-3 लैब, प्रायोगिक पशु सुविधा, एक बड़ी बायोरिपोजिटरी और आणविक अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक आधुनिक उपकरण जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं।
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