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Faridabad News: सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहा सिही गांव

Tue, 29 Sep 2026 11:00 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:00 PM IST
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Sihi village grappling with the problem of sewer overflow.
50 साल पुरानी सीवर लाइन, 50 हजार से अधिक आबादी का बोझ, घरों से निकलना मुश्किल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। संत शिरोमणि कवि सूरदास की जन्मस्थली और ऐतिहासिक गांव सिही सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझ रहा है। गांव की कई गलियों में सीवर का पानी जमा होने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। सूर स्मारक और गांव के पुराने प्राचीन शिव मंदिर तक जाने वाले रास्ते भी जलभराव से प्रभावित हैं।
सिही को संत सूरदास की जन्मस्थली के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। गांव में सूर स्मारक के साथ पुराना महादेव मंदिर भी है। यहां ग्रामीणों के अलावा महिलाओं और श्रद्धालुओं का नियमित आना-जाना रहता है। गांव में करीब 50 वर्ष पहले सीवर लाइन डाली गई थी। उस समय गांव की आबादी करीब 10 हजार थी, जबकि वर्तमान में आबादी 50 हजार से अधिक हो चुकी है। पुरानी और छोटी सीवर लाइन पर बढ़ती आबादी का दबाव होने के कारण आए दिन मेनहोल ओवरफ्लो हो जाते हैं। इसके बाद सीवर का गंदा पानी गलियों में फैल जाता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सीवर की नियमित और प्रभावी सफाई नहीं होने से समस्या और गंभीर हो रही है। लोगों के मुताबिक, निगम कर्मचारी मशीन लेकर आते हैं और कुछ देर काम करने के बाद चले जाते हैं। इसके बावजूद कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। जलभराव के कारण बदबू और गंदगी के साथ संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
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राजनीतिक और ऐतिहासिक पहचान वाला गांव



सिही का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। गांव को राजा बल्लू उर्फ बलराम की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। स्थानीय इतिहास के अनुसार राजा बलराम ने बल्लभगढ़ बसाया था। गांव से पूर्व सांसद धर्मवीर वशिष्ठ, विधायक पंडित जीवन लाल वशिष्ठ और प्रदेश स्तर पर चेयरमैन रहे चौधरी प्रीतम सिंह व सुरेंद्र तेवतिया जैसे जनप्रतिनिधि जुड़े रहे हैं। नगर निगम में राजकुमार तेवतिया, बिमलेश रजक, बच्चू सिंह तेवतिया, सुरेंद्र तेवतिया, कुलदीप तेवतिया और कुलवीर तेवतिया पार्षद रह चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक पहचान रखने वाले गांव की बुनियादी सीवर व्यवस्था आज भी दशकों पुरानी लाइन पर निर्भर है।

महाभारत कालीन गांव है सिही
स्थानीय मान्यताओं में इस गांव का संबंध द्वापर युग से भी जोड़ा जाता है। महाभारत के बाद जब महाराज परीक्षित की मृत्यु हुई तब उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के वंश को खत्म करने के लिए यहां नाग यज्ञ कराया था। इसका कोई खास प्रमाण तो नहीं बल्कि सिही गांव के लोग इस बारे में जरूर चर्चा करते हैं। यहां नागेश्वर नाथ शिव मंदिर है, जिसे नाग यज्ञ के काल का बताया जाता है।





लोगों से बात
गलियों में अधिक पानी जमा होने से छोटे बच्चों को लेकर विशेष चिंता रहती है।
- राज शर्मा



नई सीवर लाइन डालने की योजना पहले भी बनाई थी पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
- दीपक शर्मा



सीवर की समस्या कई वर्षों से है। कई बार शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं हुआ।
- भगत सिंह तेवतिया

टेंडर लगाया जा चुका : पार्षद



नगर निगम पार्षद वार्ड-39 नीलम बरेजा ने बताया कि 18 करोड़ रुपये की लागत से सिही गांव का कायाकल्प होना है। इसको लेकर नगर निगम की ओर से टेंडर लगाया जा चुका है। जल्द ही कंपनी को काम सौंप दिया जाएगा।
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