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रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 3.85 लाख रुपये ठगे
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फरीदाबाद। रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठग ने एक व्यक्ति से 3.85 लाख रुपये हड़प लिए। आरोपी ने पीड़ित को फर्जी नियुक्ति पत्र भी बनाकर भेजा। रुपये मांगने पर उसने लौटाने से साफ मना कर दिया। पीड़ित की शिकायत पर पल्ला थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-37 स्थित दुर्गा एंक्लेव सेहतपुर निवासी अमोल मंडल ने पुलिस को शिकायत में बताया कि उसका रिश्तेदार मुकेश कुमार पुस्ता रोड संगम विहार, साउथ दिल्ली में रहता है। मुकेश ने उसकी मुलाकात गाजियाबाद के विजय नगर कॉलोनी निवासी संजय से करवाई थी। उसे बताया गया कि संजय बड़े लोगों के संपर्क में रहता है और उसकी नौकरी लगवा देगा। परिचय होने के बाद संजय ने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया। उसके बाद मोबाइल पर अमोल की संजय से बातचीत होने लगी। अक्तूबर 2019 में संजय ने मोबाइल से कॉल की और कहा कि रेलवे में उसकी अच्छी जान पहचान है। उसकी नौकरी रेलवे में लगवा देगा। नौकरी लगवाने के एवज में अमोल को चार लाख रुपये खर्च करने की बात संजय ने बताई। अमोल ने रेलवे में नौकरी पाने के लालच में आकर संजय को थोड़ा-थोड़ा करके करीब 2.25 लाख दे दिए।
इसके बाद अमोल ने नवंबर माह 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक करीब 1.60 लाख रुपये ऑनलाइन अपने खाते से संजय के खाते में ट्रांसफर कर दिए। कई महीने बीतने के बाद जब अमोल की नौकरी नहीं लगी तो उसने फोन पर कॉल कर संजय के ऊपर दबाव बनाना शुरू किया। संजय से कहा कि अभी तक उसे नियुक्ति पत्र क्यों नहीं मिला लेकिन संजय काफी दिनों तक टालमटोल करता रहा। एक दिन भारतीय रेलवे का चिकित्सा परीक्षण पत्र व एक नियुक्ति पत्र डाक से अमोल को प्राप्त हुआ। नियुक्ति पत्र आने के बाद अमोल खुश हो गया लेकिन रेलवे विभाग में जाकर जब अमोल ने नियुक्ति पत्र की जांच करवाई तो वह फर्जी निकला। आरोप है कि संजय कुमार ने धोखा धड़ी कर अमोल के 3.85 लाख रुपये ठग लिए। अमोल ने अपने रुपये वापस करने की बात की लेकिन संजय की तरफ से कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला। कई बार पंचायत भी की गई लेकिन संजय कुमार ने पंचायत के सामने भी रुपये लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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सेक्टर-37 स्थित दुर्गा एंक्लेव सेहतपुर निवासी अमोल मंडल ने पुलिस को शिकायत में बताया कि उसका रिश्तेदार मुकेश कुमार पुस्ता रोड संगम विहार, साउथ दिल्ली में रहता है। मुकेश ने उसकी मुलाकात गाजियाबाद के विजय नगर कॉलोनी निवासी संजय से करवाई थी। उसे बताया गया कि संजय बड़े लोगों के संपर्क में रहता है और उसकी नौकरी लगवा देगा। परिचय होने के बाद संजय ने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया। उसके बाद मोबाइल पर अमोल की संजय से बातचीत होने लगी। अक्तूबर 2019 में संजय ने मोबाइल से कॉल की और कहा कि रेलवे में उसकी अच्छी जान पहचान है। उसकी नौकरी रेलवे में लगवा देगा। नौकरी लगवाने के एवज में अमोल को चार लाख रुपये खर्च करने की बात संजय ने बताई। अमोल ने रेलवे में नौकरी पाने के लालच में आकर संजय को थोड़ा-थोड़ा करके करीब 2.25 लाख दे दिए।
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इसके बाद अमोल ने नवंबर माह 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक करीब 1.60 लाख रुपये ऑनलाइन अपने खाते से संजय के खाते में ट्रांसफर कर दिए। कई महीने बीतने के बाद जब अमोल की नौकरी नहीं लगी तो उसने फोन पर कॉल कर संजय के ऊपर दबाव बनाना शुरू किया। संजय से कहा कि अभी तक उसे नियुक्ति पत्र क्यों नहीं मिला लेकिन संजय काफी दिनों तक टालमटोल करता रहा। एक दिन भारतीय रेलवे का चिकित्सा परीक्षण पत्र व एक नियुक्ति पत्र डाक से अमोल को प्राप्त हुआ। नियुक्ति पत्र आने के बाद अमोल खुश हो गया लेकिन रेलवे विभाग में जाकर जब अमोल ने नियुक्ति पत्र की जांच करवाई तो वह फर्जी निकला। आरोप है कि संजय कुमार ने धोखा धड़ी कर अमोल के 3.85 लाख रुपये ठग लिए। अमोल ने अपने रुपये वापस करने की बात की लेकिन संजय की तरफ से कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला। कई बार पंचायत भी की गई लेकिन संजय कुमार ने पंचायत के सामने भी रुपये लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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