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Faridabad News: मानसून से पहले बाढ़ प्रबंधन की तैयारियां तेज, विभागों की जिम्मेदारियां तय करने पर जोर
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मानसून के आगमन से पहले जिले में बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के साथ बैठकें कर उनकी जिम्मेदारियां तय कर रहा है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। हर साल जिले के कई गांवों में जलभराव से सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित होती है, जिसे देखते हुए इस बार पहले से तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
इसी बीच सिंचाई विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े इलाकों में ही पंप और अन्य संसाधन उपलब्ध कराएगा। विभाग की ओर से उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नगर निगम, नगर निकाय और पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में जलनिकासी के लिए स्वयं मोबाइल पंप और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करें। विभाग ने यह भी आग्रह किया है कि बाढ़ प्रबंधन की जिम्मेदारी सभी संबंधित विभागों में स्पष्ट रूप से बांटी जाए।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव लांबा ने बताया कि आबादी वाले क्षेत्रों से पानी निकालने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और पंचायतों की है, जबकि खेतों में जलभराव होने पर सिंचाई विभाग पंप लगाकर पानी निकासी करेगा। वहीं जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिखा ने कहा कि गांवों की आबादी में जलभराव की समस्या का समाधान पंचायतें अपने स्तर पर करती हैं, जबकि कृषि भूमि में जलनिकासी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। प्रशासन का मानना है कि समय रहते जिम्मेदारियां तय होने से मानसून के दौरान राहत कार्यों में तेजी आएगी।
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फरीदाबाद। मानसून के आगमन से पहले जिले में बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के साथ बैठकें कर उनकी जिम्मेदारियां तय कर रहा है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। हर साल जिले के कई गांवों में जलभराव से सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित होती है, जिसे देखते हुए इस बार पहले से तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
इसी बीच सिंचाई विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े इलाकों में ही पंप और अन्य संसाधन उपलब्ध कराएगा। विभाग की ओर से उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नगर निगम, नगर निकाय और पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में जलनिकासी के लिए स्वयं मोबाइल पंप और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करें। विभाग ने यह भी आग्रह किया है कि बाढ़ प्रबंधन की जिम्मेदारी सभी संबंधित विभागों में स्पष्ट रूप से बांटी जाए।
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सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता गौरव लांबा ने बताया कि आबादी वाले क्षेत्रों से पानी निकालने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और पंचायतों की है, जबकि खेतों में जलभराव होने पर सिंचाई विभाग पंप लगाकर पानी निकासी करेगा। वहीं जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिखा ने कहा कि गांवों की आबादी में जलभराव की समस्या का समाधान पंचायतें अपने स्तर पर करती हैं, जबकि कृषि भूमि में जलनिकासी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। प्रशासन का मानना है कि समय रहते जिम्मेदारियां तय होने से मानसून के दौरान राहत कार्यों में तेजी आएगी।
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