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जेल प्रशासन ने धोखाधड़ी के आरोपी को दोबारा पकड़ा
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फरीदाबाद। नीमका जेल कर्मियों की लापरवाही से निकले धोखाधड़ी के आरोपी रामनिवास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बृहस्पतिवार उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे वापस जेल भेज दिया गया।
नीलम बाटा रोड स्थित श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में नीमका जेल में बंद गांव राजूपुर, गुरुग्राम निवासी रामनिवास जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण 16 सितंबर को जेल से निकलने में कामयाब हो गया था। रामनिवास ने जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के लिए उसे अदालत में लाया गया था। जेल में वापस जाने के बाद अदालत के आदेशों को गलत तरीके से समझने के कारण सहायक अधीक्षक मोहन लाल ने उसकी रिहाई का केस तैयार कर जेल उपाधीक्षक संदीप कुमार के समक्ष रखा था। संदीप कुमार ने भी अदालत के आदेशों को जांचे बिना उन पर हस्ताक्षर कर दिया, जिससे रामनिवास जेल से निकलने में कामयाब हो गया। अगले दिन 17 सितंबर को अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस बारे में जब जेल प्रशासन को पता चला तो वहां खलबली मच गई। श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के अधिवक्ता मोहम्मद इमरान ने इस संबंध में न्यायिक दंडाधिकारी किम्मी सिंगला की अदालत में याचिका दायर कर सारी स्थिति से अवगत करवाया। इस पर अदालत ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर उनसे अपना जवाब दायर करने के लिए कहा। जेल अधीक्षक ने इसमें जेल उपाधीक्षक संदीप कुमार व सहायक अधीक्षक (कारागार) मोहन लाल की लापरवाही मानी और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने व उच्च अधिकारियों को उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखने की जानकारी दी।
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अदालत ने जल्द से जल्द आरोपी को पकड़ कर अदालत में पेश करने के आदेश दिए थे। इस पर जेल प्रशासन की टीम आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। बृहस्पतिवार को पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी गुरुग्राम में ही छिपा हुआ था। बृहस्पतिवार दोपहर बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे वापस जेल भेज दिया गया।
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नीलम बाटा रोड स्थित श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में नीमका जेल में बंद गांव राजूपुर, गुरुग्राम निवासी रामनिवास जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण 16 सितंबर को जेल से निकलने में कामयाब हो गया था। रामनिवास ने जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के लिए उसे अदालत में लाया गया था। जेल में वापस जाने के बाद अदालत के आदेशों को गलत तरीके से समझने के कारण सहायक अधीक्षक मोहन लाल ने उसकी रिहाई का केस तैयार कर जेल उपाधीक्षक संदीप कुमार के समक्ष रखा था। संदीप कुमार ने भी अदालत के आदेशों को जांचे बिना उन पर हस्ताक्षर कर दिया, जिससे रामनिवास जेल से निकलने में कामयाब हो गया। अगले दिन 17 सितंबर को अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
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इस बारे में जब जेल प्रशासन को पता चला तो वहां खलबली मच गई। श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के अधिवक्ता मोहम्मद इमरान ने इस संबंध में न्यायिक दंडाधिकारी किम्मी सिंगला की अदालत में याचिका दायर कर सारी स्थिति से अवगत करवाया। इस पर अदालत ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर उनसे अपना जवाब दायर करने के लिए कहा। जेल अधीक्षक ने इसमें जेल उपाधीक्षक संदीप कुमार व सहायक अधीक्षक (कारागार) मोहन लाल की लापरवाही मानी और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने व उच्च अधिकारियों को उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखने की जानकारी दी।
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अदालत ने जल्द से जल्द आरोपी को पकड़ कर अदालत में पेश करने के आदेश दिए थे। इस पर जेल प्रशासन की टीम आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। बृहस्पतिवार को पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी गुरुग्राम में ही छिपा हुआ था। बृहस्पतिवार दोपहर बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे वापस जेल भेज दिया गया।