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शहर के चौराहों पर तय मानक के अनुसार रोशनी नहीं
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फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में लगी स्ट्रीट लाइटों की रोशनी नियमानुसार काफी कम है। इसका खुलासा हाल ही में स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा कराए गए सर्वे में हुआ है। सर्वे में 13 चौराहों पर रोशनी कम मिली है। इसलिए लाइटों को बदला जाएगा। इसके लिए फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एफएससीएल) ने तैयारी शुरू कर दी है।
शहर में आधे से अधिक स्ट्रीट लाइटें अक्सर खराब रहती हैं या बंद रहती हैं। इनमें आईपी कॉलोनी, बीके चौक, नीलम चौक, एतमादपुर चौक, सेक्टर आठ व नौ टी जंक्शन, बाईपास रोड, सेक्टर-37, सैनिक कॉलोनी मोड़, संजय कॉलोनी चौहारा और सनफ्लैग चौराहा आदि शामिल हैं। कई इलाकों में चौराहों पर शाम के बाद ही लोगों को परेशानी आती है। आपराधिक वारदात भी अधिक होती हैं।
बीते दिनों लाइटों का घोटाला नगर निगम सदन में उठा था, लेकिन लाइटें नहीं बदली गई हैं। सर्वे में शहर के अधिकांश चौराहों पर दृश्यता 60 फीसदी से कम पाई गई है, जबकि 13 चौराहों पर दृश्यता 30 फीसदी से भी कम मिली। शहर में एक भी चौराहा ऐसा नहीं जहां दृश्यता सौ फीसदी हो। इस सर्वे में करीब 40 चौराहों को शामिल किया गया। एक से 30 फीसदी दृश्यता को बेहद कमजोर माना जाता है, जबकि 40 से 60 फीसदी के बीच दृश्यता को सामान्य माना जाता है। 100 फीसदी दृश्यता बेहतर है।
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वर्जन-
शहर में यह सर्वे करीब 15 दिन पूर्व कराया गया था। जिसमें यह बातें सामने आई हैं। इन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जल्द ही शहर की स्थिति में सुधार किया जाएगा। - डॉ. गरिमा मित्तल, निगमायुक्त
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शहर में आधे से अधिक स्ट्रीट लाइटें अक्सर खराब रहती हैं या बंद रहती हैं। इनमें आईपी कॉलोनी, बीके चौक, नीलम चौक, एतमादपुर चौक, सेक्टर आठ व नौ टी जंक्शन, बाईपास रोड, सेक्टर-37, सैनिक कॉलोनी मोड़, संजय कॉलोनी चौहारा और सनफ्लैग चौराहा आदि शामिल हैं। कई इलाकों में चौराहों पर शाम के बाद ही लोगों को परेशानी आती है। आपराधिक वारदात भी अधिक होती हैं।
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बीते दिनों लाइटों का घोटाला नगर निगम सदन में उठा था, लेकिन लाइटें नहीं बदली गई हैं। सर्वे में शहर के अधिकांश चौराहों पर दृश्यता 60 फीसदी से कम पाई गई है, जबकि 13 चौराहों पर दृश्यता 30 फीसदी से भी कम मिली। शहर में एक भी चौराहा ऐसा नहीं जहां दृश्यता सौ फीसदी हो। इस सर्वे में करीब 40 चौराहों को शामिल किया गया। एक से 30 फीसदी दृश्यता को बेहद कमजोर माना जाता है, जबकि 40 से 60 फीसदी के बीच दृश्यता को सामान्य माना जाता है। 100 फीसदी दृश्यता बेहतर है।
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वर्जन-
शहर में यह सर्वे करीब 15 दिन पूर्व कराया गया था। जिसमें यह बातें सामने आई हैं। इन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जल्द ही शहर की स्थिति में सुधार किया जाएगा। - डॉ. गरिमा मित्तल, निगमायुक्त