फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   mothers day special stories Elderly women living in old age home expressed their pain

ये मां की ममता है: जिसे चलना सिखाया उसी ने धक्के देकर निकाला बाहर, भावुक कर देगी इन माताओं की कहानी

Sun, 14 May 2023 05:17 PM IST
Vikas Kumar निभा रजक, अमर उजाला, फरीदाबाद
निभा रजक, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 14 May 2023 05:17 PM IST
सार

50 वर्षीय बुजुर्ग अनीता ने बताया कि पति ओमप्रकाश का 15 वर्ष पहले निधन हो गया था। बेटी नेहा और बेटा दीपू की शादी कर दी, लेकिन बहू आते ही बेटा बदल गया। पैरेलाइज अनीता देवी से बहू रोज लड़ती थी, एक दिन मां को घर के बाहर छोड़कर बेटे और बहू ने दरवाजा बंद कर लिया। 

विज्ञापन
mothers day special stories Elderly women living in old age home expressed their pain
मां ने हाथ पर गुदवाया बेटे का नाम और नंबर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां की ममता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है इसलिए तो वेदों में भी इन्हें भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है, लेकिन बदलते समय के साथ इसकी परिभाषा बदल रही है। कभी मां का पल्लू पकड़कर आंगन में घूमने वाले नन्हें कदम आज उसी मां को घर से बेदखल कर रहे हैं, बेबस मां के आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है। ममता ऐसी है कि मां ने बेटे का नाम और फोन नंबर हाथ पर गुदवा लिया है, तो कोई मां बीमार बेटे को देखने के लिए तरस रही है।

विज्ञापन

माना की सारी औलाद एक जैसी नहीं होती, लेकिन वृद्धाश्रम में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या आज के समाज की मानसिकता को दर्शा रही है। ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम में करीब 60 बुजुर्ग रह रहे हैं, ये सभी अपने बच्चों से तिरस्कृत हैं, मदर्स डे पर जब इनसे बातचीत की गई तो किसी की आंखों से आंसू बहे तो किसी ने खुद को अगले जन्म में बेऔलाद रहने की प्रार्थना की।

विज्ञापन
विज्ञापन

घर के बाहर छोड़कर बेटे और बहू ने दरवाजा बंद किया
50 वर्षीय बुजुर्ग अनीता ने बताया कि पति ओमप्रकाश का 15 वर्ष पहले निधन हो गया था। बेटी नेहा और बेटा दीपू की शादी कर दी, लेकिन बहू आते ही बेटा बदल गया। पैरेलाइज अनीता देवी से बहू रोज लड़ती थी, एक दिन मां को घर के बाहर छोड़कर बेटे और बहू ने दरवाजा बंद कर लिया। कई घंटे घर के बाहर बैठी रोती रही, लेकिन दरवाजा नहीं खोला। गली के एक व्यक्ति ने आश्रम का पता दिया। पिछले दो साल से अनीता यही रह रही हैं, आलम यह है कि अब औलाद नाम से नफरत हो गई है।

विज्ञापन

जबरदस्ती सड़क पर छोड़ दिया
77 वर्षीय सुमित्रा देवी ने आंखों में आंसू लेकर अपने दर्द को बयां किया। उन्होंने बताया कि बेटे ने पहले घर से निकाल दिया, फिर दो दिन बुजुर्ग पति-पत्नी सड़कों पर भटकते रहे, फिर बेटा घर ले गया। दो महीने बाद फिर जबरदस्ती सड़क पर छोड़ दिया। बेटे का नाम और नंबर अपने हाथ पर गुदवा लिया, बार-बार फोन करती रही लेकिन बेटा कभी नहीं आया। आश्रम में पति राजपाल की मृत्यु हो गई, इसके बाद भी उसका कलेजा नहीं पसीजा। अंतिम दिनों में राजपाल बेटे को देखना चाहते थे।

बीमार बेटे को देखने के लिए बिलख रहीं
80 वर्षीय बुजुर्ग भगवान देवी भी आश्रम में रह रही हैं, उनका बेटा बीमार है। बहू और पोतों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला देकर आश्रम छोड़ दिया। सबसे ज्यादा याद वह अपने बेटे महेंद्र को करती हैं।

अकेले रहने के प्रचलन ने आश्रमों में बुजुर्गों की संख्या को बढ़ा दिया है। आज खुद के बच्चे निर्दयी हो गए हैं, बुढ़ापे का सहारा बनने की उम्र में बेसहारा कर छोड़ रहे हैं। आश्रम में 60 बुजुर्ग हैं, जिनकी देखभाल की जा रही है। सामाजिक संस्थाओं का भी आर्थिक सहयोग मिल जाता है। -किशन लाल बजाज, संस्थापक, ताऊ देवी लाल आश्रम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed