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Faridabad News: राखियों पर महंगाई की मार
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फरीदाबाद एनआईटी एक के मुख्य बाजार में राखी की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद।
पिछले वर्ष के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में इस समय रौनक और उत्साह देखने को मिल रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए बाजारों में पहुंचकर तरह-तरह की मनमोहक राखियां खरीद रही हैं। हालांकि, इस बार महंगाई का असर त्योहारी बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार लोगों को राखियां खरीदने के लिए 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
दुकानदारों के अनुसार, पिछले साल जो राखियां 50 रुपये में बिक रही थीं, वे इस बार 65 से 70 रुपये तक मिल रही हैं। इसी प्रकार, 100, 150 और 200 रुपये तक बिकने वाली राखियों के दाम बढ़कर क्रमशः 130, 175 और 230 रुपये तक पहुंच गए हैं। वहीं, 50 रुपये से कम कीमत वाली सामान्य राखियों में भी 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। थोक व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण प्लास्टिक महंगी हुई है। जिसका राखियां बनाने में बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसके अलावा ढुलाई महंगी होने के कारण भी यह उछाल आया है।
बच्चों के लिए कार्टून राखियां बनी आकर्षण का केंद्र
बाजार में इस बार बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र विभिन्न कार्टून किरदारों जैसे डोरेमॉन, छोटा भीम और मोटू-पतलू वाली राखियां बनी हुई हैं। इसके अलावा बच्चों में लाइट और म्यूजिकल जलने वाली राखियों का क्रेज सबसे ज्यादा है। वहीं, बड़ों के लिए पारंपरिक सूत, रेशम के धागों के साथ-साथ कुंदन, जरदोजी और स्टोन वर्क वाली डिजाइनर राखियों की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। शुभ प्रतीक राखी जिनमें ओम, स्वास्तिक आदि का चिन्ह बना हुआ है, उनकी खरीदारी ज्यादा हो रही है। बच्चों में अलग-अलग प्रकार की किड्स राखी की मांग है।
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बातचीत
इस बार राखियां सचमुच काफी महंगी हो गई हैं। जो सुंदर डिजाइन पिछले साल कम कीमत में मिल जाते थे, उनके लिए अब ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं । कविता शर्मा, ग्राहक
त्योहारों पर महंगाई हर साल बढ़ जाती है। बच्चों की पसंद वाली लाइट और कार्टून राखियां तो जेब पर भारी पड़ रही हैं, फिर भी त्योहार की खुशी के लिए खरीदारी करनी ही पड़ती है। मनीष कुमार, ग्राहक
इस बार ग्राहकों को आकर्षक पैकिंग वाली राखियां बहुत लुभा रही हैं। कई राखियों में सामान एक जैसा है, लेकिन बेहतरीन और स्टाइलिश पैकिंग होने के कारण उनकी कीमत और मांग दोनों काफी ज्यादा हैं। - राजेश गुप्ता, दुकानदार
माल और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने के कारण हमें भी पीछे से राखियां महंगी मिली हैं। इसके बावजूद ग्राहकों में उत्साह कम नहीं हुआ है और वे खरीदारी के लिए बढ़-चढ़कर आ रहे हैं।-सुनील भाटिया, दुकानदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में इस समय रौनक और उत्साह देखने को मिल रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए बाजारों में पहुंचकर तरह-तरह की मनमोहक राखियां खरीद रही हैं। हालांकि, इस बार महंगाई का असर त्योहारी बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार लोगों को राखियां खरीदने के लिए 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
दुकानदारों के अनुसार, पिछले साल जो राखियां 50 रुपये में बिक रही थीं, वे इस बार 65 से 70 रुपये तक मिल रही हैं। इसी प्रकार, 100, 150 और 200 रुपये तक बिकने वाली राखियों के दाम बढ़कर क्रमशः 130, 175 और 230 रुपये तक पहुंच गए हैं। वहीं, 50 रुपये से कम कीमत वाली सामान्य राखियों में भी 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। थोक व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण प्लास्टिक महंगी हुई है। जिसका राखियां बनाने में बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसके अलावा ढुलाई महंगी होने के कारण भी यह उछाल आया है।
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बच्चों के लिए कार्टून राखियां बनी आकर्षण का केंद्र
बाजार में इस बार बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र विभिन्न कार्टून किरदारों जैसे डोरेमॉन, छोटा भीम और मोटू-पतलू वाली राखियां बनी हुई हैं। इसके अलावा बच्चों में लाइट और म्यूजिकल जलने वाली राखियों का क्रेज सबसे ज्यादा है। वहीं, बड़ों के लिए पारंपरिक सूत, रेशम के धागों के साथ-साथ कुंदन, जरदोजी और स्टोन वर्क वाली डिजाइनर राखियों की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। शुभ प्रतीक राखी जिनमें ओम, स्वास्तिक आदि का चिन्ह बना हुआ है, उनकी खरीदारी ज्यादा हो रही है। बच्चों में अलग-अलग प्रकार की किड्स राखी की मांग है।
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इस बार राखियां सचमुच काफी महंगी हो गई हैं। जो सुंदर डिजाइन पिछले साल कम कीमत में मिल जाते थे, उनके लिए अब ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं । कविता शर्मा, ग्राहक
त्योहारों पर महंगाई हर साल बढ़ जाती है। बच्चों की पसंद वाली लाइट और कार्टून राखियां तो जेब पर भारी पड़ रही हैं, फिर भी त्योहार की खुशी के लिए खरीदारी करनी ही पड़ती है। मनीष कुमार, ग्राहक
इस बार ग्राहकों को आकर्षक पैकिंग वाली राखियां बहुत लुभा रही हैं। कई राखियों में सामान एक जैसा है, लेकिन बेहतरीन और स्टाइलिश पैकिंग होने के कारण उनकी कीमत और मांग दोनों काफी ज्यादा हैं। - राजेश गुप्ता, दुकानदार
माल और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने के कारण हमें भी पीछे से राखियां महंगी मिली हैं। इसके बावजूद ग्राहकों में उत्साह कम नहीं हुआ है और वे खरीदारी के लिए बढ़-चढ़कर आ रहे हैं।-सुनील भाटिया, दुकानदार