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Faridabad News: औद्योगिक इकाइयों में महिलाएं पैकेजिंग करने से लेकर पावर प्रेस मशीन चला रहीं
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-घरों में झाड़ू-पोंछा का काम करने वाली महिलाएं काम छोड़कर औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
औद्योगिक इकाइयों में कामकाज का ढर्रा बदल रहा है। अब महिलाएं औद्योगिक इकाइयों में पैकेजिंग करने के अलावा पावर प्रेस मशीन तक चला रहीं हैं। औद्योगिक इकाइयों में हेल्पर के पदों पर महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जबकि पहले पुरुष कर्मचारी ही हेल्पर के तौर पर काम करते थे। यही नहीं गारमेंट सेक्टर के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर के उद्योगों में महिलाओं की भागेदारी बढ़ी है। औद्योगिक इकाइयों में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हेल्पर और मशीन ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी महिलाओं की है, जो पहले आसपास के घरों में झाड़ू-पोंछा और घरेलू काम करती थीं। घरों में पूरा दिन काम करने के बावजूद उन्हें करीब सात-आठ हजार रुपये तक ही आमदनी हो पाती थी। फैक्टरी में काम मिलने के बाद उनकी मासिक आय बढ़कर करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। गारमेंट सेक्टर में महिलाओं को पैकेजिंग, सिलाई, फिनिशिंग और मशीन संचालन जैसे काम दिए जा रहे हैं। गारमेंट के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर की औद्योगिक इकाइयों में महिलाएं अब पावर मशीन भी चला रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि काम सीखने के बाद महिलाएं जिम्मेदारी के साथ काम करती हैं। जिससे निर्धारित समय में उत्पादन करने की दर में बढ़ोतरी हुई है।
उद्यमियों के मुताबिक, महिला कर्मचारियों के बढ़ने से उत्पादन की गति और नियमितता में भी सुधार हुआ है। औद्योगिक संगठन लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अमृतपाल कोचर ने बताया कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। अब महिलाएं फैक्टरियों में कार्यालर्यों में ही नहीं बल्कि हेल्पर और सुपरवाइजर की भूमिका निभा रही हैं। इससे उत्पादन तय समय में हो पा रहा है। महिलाएं अब फैक्टरियों में पावर प्रेस मशीन भी चला रही हैं। औद्योगिक संगठन ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुंदर कपूर ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने वाली महिलाएं भी अब फैक्टरियों का रुख कर रही हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है। घरेलू काम तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब तकनीकी और उत्पादन से जुड़े काम सीखकर नियमित वेतन हासिल कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय भी बढ़ रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
औद्योगिक इकाइयों में कामकाज का ढर्रा बदल रहा है। अब महिलाएं औद्योगिक इकाइयों में पैकेजिंग करने के अलावा पावर प्रेस मशीन तक चला रहीं हैं। औद्योगिक इकाइयों में हेल्पर के पदों पर महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जबकि पहले पुरुष कर्मचारी ही हेल्पर के तौर पर काम करते थे। यही नहीं गारमेंट सेक्टर के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर के उद्योगों में महिलाओं की भागेदारी बढ़ी है। औद्योगिक इकाइयों में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हेल्पर और मशीन ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी महिलाओं की है, जो पहले आसपास के घरों में झाड़ू-पोंछा और घरेलू काम करती थीं। घरों में पूरा दिन काम करने के बावजूद उन्हें करीब सात-आठ हजार रुपये तक ही आमदनी हो पाती थी। फैक्टरी में काम मिलने के बाद उनकी मासिक आय बढ़कर करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। गारमेंट सेक्टर में महिलाओं को पैकेजिंग, सिलाई, फिनिशिंग और मशीन संचालन जैसे काम दिए जा रहे हैं। गारमेंट के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर की औद्योगिक इकाइयों में महिलाएं अब पावर मशीन भी चला रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि काम सीखने के बाद महिलाएं जिम्मेदारी के साथ काम करती हैं। जिससे निर्धारित समय में उत्पादन करने की दर में बढ़ोतरी हुई है।
उद्यमियों के मुताबिक, महिला कर्मचारियों के बढ़ने से उत्पादन की गति और नियमितता में भी सुधार हुआ है। औद्योगिक संगठन लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अमृतपाल कोचर ने बताया कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। अब महिलाएं फैक्टरियों में कार्यालर्यों में ही नहीं बल्कि हेल्पर और सुपरवाइजर की भूमिका निभा रही हैं। इससे उत्पादन तय समय में हो पा रहा है। महिलाएं अब फैक्टरियों में पावर प्रेस मशीन भी चला रही हैं। औद्योगिक संगठन ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुंदर कपूर ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने वाली महिलाएं भी अब फैक्टरियों का रुख कर रही हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है। घरेलू काम तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब तकनीकी और उत्पादन से जुड़े काम सीखकर नियमित वेतन हासिल कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय भी बढ़ रही है।
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