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18 साल में बना सके घर, बनते ही मिला तोड़ने का आदेश

Fri, 25 Jun 2021 11:19 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 11:19 PM IST
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House could be built in 18 years, got order to break it as soon as it was built
फरीदाबाद। खोरी गांव में बने मकानों को तोड़ने में सरकारी बुलडोजर शायद कुछ मिनट ही लगाएगा, लेकिन इन्हें बनाने में लोगों की आधी जिंदगी बीत गई है। गांव में रहने वाले बदरूद्दीन और अब्दुल मनान ने 18 साल पहले गांव की जमीन बेचने के बाद कर्ज लेकर पचास-पचास गज जमीन खरीदी थी। जमीन पर पक्की छत डालने के लिए 18 साल तक एक-एक पाई जोड़ी। लेकिन जब घर बनकर तैयार हुआ, तो सरकार ने तोड़ने का नोटिस दे दिया।
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खोरी गांव में ऐसे अनेकों लोग ऐसे हैं, जिनकी जीवन भर की कमाई बस यहां का उनका मकान ही है। बदरूद्दीन बताते हैं कि ये साल उनके व परिवार के लिए बर्बादी भरा है। वह दिल्ली की एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे। कोरोना के कारण अप्रैल में उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने साल 2003 में पचास गज जमीन सवा तीन लाख रुपये में ली थी। कुछ दिनों बाद ही अब्दुल मनान ने उनके साथ वाला प्लाट खरीद लिया। उनके पास मकान बनाने की पैसे नहीं थे। उन्होंने कुछ कर्ज लिया और कच्ची छत का एक छोटा सा मकान बना लिया। वक्त के साथ साथ गलियां ऊंची उठने लगीं और दोनों के मकान नीचे धंसते चले गए। हालात ये हो गए कि मकान की छत गली से मात्र दो फीट ही ऊंची थी। उन्होंने 18 साल में जो पैसा इकट्ठा किया, उससे मकान बनाने का निर्णय लिया। उनके साथ अब्दुल मनान ने भी मकान में चिनाई शुरू करवा दी। जून माह की शुरुआत में उनका मकान बन सका। लेकिन मकान बनने के अगले ही दिन उन्हें पता लगा कि सुप्रीम कोर्ट ने खोरी को तोड़ने का आदेश दे दिया है।
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खबर सुनते ही पड़ा दिल का दौरा
बदरूद्दीन ने बताया की मकान बनने के बाद वे उसका गृह प्रवेश भी नहीं कर पाए थे कि मकान टूटने की खबर आ गई। अब्दुल मनान की पत्नी समीना खातून को जब इस बात का पता लगा तो वह इस सदमे से बेहोश हो गईं। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दिल का हार्ट अटैक आया है। फिलहाल उसकी पत्नी गांव गई हुई है। बदरूद्दीन ने बताया कि उनके चार बच्चे हैं। जिसमें से एक बेटी की शादी हो गई है, जबकि बाकी सभी बच्चे उनके साथ ही रह रहे हैं। वह सिलाई का काम करते हैं। एक बेटा प्लंबर का काम करके घर चला रहा है।
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