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ऊंचा गांव में जन्मे हैं गोल्डन-सिल्वर बॉय
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फरीदाबाद। टोक्यो पैरालंपिक मुकाबलों की 50 मीटर मिक्स्ड पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण और रजत जीतने वाले मनीष नरवाल और सिंहराज अधाना कई पहलुओं में एक-दूसरे से जुड़े हैं। दोनों की जन्म भूमि ऊंचा गांव है। मूलरूप से सिंह राज तिगांव गांव के हैं और मनीष सोनीपत निवासी हैं। हालांकि एक साथ इतिहास रचने से पहले ही किस्मत ने दोनों को न सिर्फ एक सा माहौल दिया बल्कि एक दूसरे से भी मिलवाया।
दोनों खिलाड़ी आपस में समझते थे बारीकि
दोनों शूटरों ने काफी समय ऊंचा गांव में ही बिताया था। सिंहराज के पिता प्रेम सिंह अधाना ने बताया कि वह दोनों छोरों को अपना ही बेटा मानते हैं। दोनों ने एक साथ अभ्यास किया है। सिंहराज ने लॉकडाउन में अपने स्कूल में शूटिंग रेंज बनाई थी। इस शूटिंग रेंज में मनीष भी अभ्यास के लिए जाते थे। दोनों एक-दूसरे को बहुत पहले से जानते थे। सिंहराज की पत्नी ने बताया कि अन्य कई खिलाड़ी उनके पति के साथ अभ्यास करते थे। मनीष के साथ सिंहराज का काफी अच्छा तालमेल था। दोनों ही खेल की बारीकियों को साझा करते थे। वह बीते एक साल शूटिंग में अपना हाथ आजमा रही हैं। ऐसे में वह दोनों खिलाड़ियों संग जुड़ी हुई हैं।
ऊंचा गांव में किराए पर रहता था मनीष का परिवार
मनीष के पिता दिलबाग सिंह ने बताया कि वह 1993 में सोनीपत से फरीदाबाद आए थे। इस दौरान सबसे पहले बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में ही किराये पर रहना शुरू किया। वहीं पर मनीष का जन्म हुआ। दोनों ने काफी दिन तक एक साथ अभ्यास भी किया। हालांकि वर्ष 2018 में एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार ने गांव साहूपुरा में अपना मकान लिया। वहां वर्कशॉप शुरू की। साथ ही बेटे के लिए शूटिंग रेंज स्थापित कर दी।
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कोच ने बदला मनीष के खेल का अंदाज
मनीष की मां संतोष ने बताया कि उनका बेटा वर्ष 2016 से शूटिंग का अभ्यास कर रहा है। वह शुरू से ही इस खेल में अच्छा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोच राकेश ने उसके कौशल को खूब तराशा है। वह अहसानमंद हैं कि निशानेबाजी के कोच ने उनके बेटे के कौशल को समझा। कोच राकेश से मिलकर ही उन्हें समझ आया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बन सकता है। कोच ने उसकी प्रतिभा को समझा और शूटिंग के लिए प्रेरित किया। महंगा खेल होने के बावजूद भी उन्होंने बेटे के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
सिंहराज के कोच हैं ओमप्रकाश
सिंहराज के भाई उधम सिंह ने बताया कि उनके भाई को निशानेबाजी के कोच ओमप्रकाश ने प्रशिक्षित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कोच सुभाष आहूजा सहित एक अन्य कोच ने काफी बारीकियां सिखाई हैं। वर्ष 2018 के बाद से सरकारी मदद के आधार पर वह अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए हर संभव मदद व ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह अभ्यास के दौरान भी ओलंपिक में इस्तेमाल होने वाली शूटिंग किट का इस्तेमाल करते थे। यही कारण है कि पैरालंपिक में उन्होंने परचम लहराया है।
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दोनों खिलाड़ी आपस में समझते थे बारीकि
दोनों शूटरों ने काफी समय ऊंचा गांव में ही बिताया था। सिंहराज के पिता प्रेम सिंह अधाना ने बताया कि वह दोनों छोरों को अपना ही बेटा मानते हैं। दोनों ने एक साथ अभ्यास किया है। सिंहराज ने लॉकडाउन में अपने स्कूल में शूटिंग रेंज बनाई थी। इस शूटिंग रेंज में मनीष भी अभ्यास के लिए जाते थे। दोनों एक-दूसरे को बहुत पहले से जानते थे। सिंहराज की पत्नी ने बताया कि अन्य कई खिलाड़ी उनके पति के साथ अभ्यास करते थे। मनीष के साथ सिंहराज का काफी अच्छा तालमेल था। दोनों ही खेल की बारीकियों को साझा करते थे। वह बीते एक साल शूटिंग में अपना हाथ आजमा रही हैं। ऐसे में वह दोनों खिलाड़ियों संग जुड़ी हुई हैं।
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ऊंचा गांव में किराए पर रहता था मनीष का परिवार
मनीष के पिता दिलबाग सिंह ने बताया कि वह 1993 में सोनीपत से फरीदाबाद आए थे। इस दौरान सबसे पहले बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में ही किराये पर रहना शुरू किया। वहीं पर मनीष का जन्म हुआ। दोनों ने काफी दिन तक एक साथ अभ्यास भी किया। हालांकि वर्ष 2018 में एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार ने गांव साहूपुरा में अपना मकान लिया। वहां वर्कशॉप शुरू की। साथ ही बेटे के लिए शूटिंग रेंज स्थापित कर दी।
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कोच ने बदला मनीष के खेल का अंदाज
मनीष की मां संतोष ने बताया कि उनका बेटा वर्ष 2016 से शूटिंग का अभ्यास कर रहा है। वह शुरू से ही इस खेल में अच्छा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोच राकेश ने उसके कौशल को खूब तराशा है। वह अहसानमंद हैं कि निशानेबाजी के कोच ने उनके बेटे के कौशल को समझा। कोच राकेश से मिलकर ही उन्हें समझ आया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बन सकता है। कोच ने उसकी प्रतिभा को समझा और शूटिंग के लिए प्रेरित किया। महंगा खेल होने के बावजूद भी उन्होंने बेटे के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
सिंहराज के कोच हैं ओमप्रकाश
सिंहराज के भाई उधम सिंह ने बताया कि उनके भाई को निशानेबाजी के कोच ओमप्रकाश ने प्रशिक्षित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कोच सुभाष आहूजा सहित एक अन्य कोच ने काफी बारीकियां सिखाई हैं। वर्ष 2018 के बाद से सरकारी मदद के आधार पर वह अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए हर संभव मदद व ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह अभ्यास के दौरान भी ओलंपिक में इस्तेमाल होने वाली शूटिंग किट का इस्तेमाल करते थे। यही कारण है कि पैरालंपिक में उन्होंने परचम लहराया है।