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Faridabad News: जमाबंदी की नकल के लिए जेब होगी ढीली, 1 रुपये का फॉर्म अब 100 में मिलेगा
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तत्काल नकल के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है
राहुल राज
फरीदाबाद। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री, निशानदेही, अदालत में चल रहे मामलों, बैंक लोन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) समेत अन्य कार्यों के लिए जमाबंदी की नकल लेने वालों की जेब पर जल्द अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राजस्व विभाग ने भू-अभिलेख से जुड़ी सेवाओं की फीस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एक रुपये में मिलने वाले नकल फॉर्म की कीमत बढ़ाकर 100 रुपये करने और तत्काल नकल के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
भू-अभिलेख विभाग, पंचकूला के निदेशक की ओर से प्रस्ताव संबंधी पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तहसील स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला उपायुक्त कार्यालय की ओर से फरीदाबाद, बल्लभगढ़, बड़खल, तिगांव और मोहना सहित जिले की तहसीलों व उप-तहसीलों से प्रस्ताव पर सुझाव और रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी गई है।
नकल लेने का खर्च ऐसे बढ़ेगा
प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में एक रुपये में मिलने वाले नकल फॉर्म के लिए अब 100 रुपये देने पड़ सकते हैं। इसी तरह दो पेज से अधिक की नकल पर लगने वाले दो रुपये प्रति पेज शुल्क को बढ़ाकर 10 रुपये प्रति पेज करने की तैयारी है। इसके अलावा तत्काल सेवा के लिए पांच हजार रुपये का नया शुल्क प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, ये दरें अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाना बाकी है।
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विभाग ने बताया फीस बढ़ाने का कारण
राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नकल फॉर्म और प्रति पेज शुल्क बेहद कम होने के कारण कई बार अनावश्यक आवेदन भी किए जाते हैं। इससे रिकॉर्ड रूम में काम का बोझ और लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ती है। फीस बढ़ने से केवल जरूरतमंद लोग ही आवेदन करेंगे। इससे पेंडेंसी कम होने के साथ विभाग का राजस्व भी बढ़ेगा।
उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से आदेश प्राप्त हुआ है। इसके तहत सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।- विकास, डीआरओ, फरीदाबाद
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जमीन से जुड़े विवादों और अदालतों में चल रहे मामलों में जमाबंदी की प्रमाणित नकल की बार-बार जरूरत पड़ती है। ऐसे में नकल फॉर्म की फीस एक रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये करना आम पक्षकारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालेगा। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों पर पड़ेगा। तत्काल सेवा के नाम पर पांच हजार रुपये फीस के प्रस्ताव पर भी पुनर्विचार करना चाहिए।- मोहन तिवारी, अधिवक्ता, फरीदाबाद कोर्ट
किसानों को जमीन के ऋण, फसल मुआवजे, किसान क्रेडिट कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए जमाबंदी की नकल की जरूरत पड़ती रहती है। कई बार एक ही जमीन के अलग-अलग कामों के लिए नकल निकलवानी पड़ती है। ऐसे में फॉर्म की कीमत 100 रुपये और तत्काल सेवा के लिए पांच हजार रुपये शुल्क रखना गलत है। सरकार को ग्रामीणों और किसानों की जरूरत को देखते हुए प्रस्तावित दरों को वापस लेना चाहिए।- बबलू हुड्डा, किसान नेता
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राहुल राज
फरीदाबाद। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री, निशानदेही, अदालत में चल रहे मामलों, बैंक लोन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) समेत अन्य कार्यों के लिए जमाबंदी की नकल लेने वालों की जेब पर जल्द अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राजस्व विभाग ने भू-अभिलेख से जुड़ी सेवाओं की फीस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एक रुपये में मिलने वाले नकल फॉर्म की कीमत बढ़ाकर 100 रुपये करने और तत्काल नकल के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
भू-अभिलेख विभाग, पंचकूला के निदेशक की ओर से प्रस्ताव संबंधी पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तहसील स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला उपायुक्त कार्यालय की ओर से फरीदाबाद, बल्लभगढ़, बड़खल, तिगांव और मोहना सहित जिले की तहसीलों व उप-तहसीलों से प्रस्ताव पर सुझाव और रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी गई है।
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नकल लेने का खर्च ऐसे बढ़ेगा
प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में एक रुपये में मिलने वाले नकल फॉर्म के लिए अब 100 रुपये देने पड़ सकते हैं। इसी तरह दो पेज से अधिक की नकल पर लगने वाले दो रुपये प्रति पेज शुल्क को बढ़ाकर 10 रुपये प्रति पेज करने की तैयारी है। इसके अलावा तत्काल सेवा के लिए पांच हजार रुपये का नया शुल्क प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, ये दरें अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाना बाकी है।
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विभाग ने बताया फीस बढ़ाने का कारण
राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नकल फॉर्म और प्रति पेज शुल्क बेहद कम होने के कारण कई बार अनावश्यक आवेदन भी किए जाते हैं। इससे रिकॉर्ड रूम में काम का बोझ और लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ती है। फीस बढ़ने से केवल जरूरतमंद लोग ही आवेदन करेंगे। इससे पेंडेंसी कम होने के साथ विभाग का राजस्व भी बढ़ेगा।
उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से आदेश प्राप्त हुआ है। इसके तहत सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।- विकास, डीआरओ, फरीदाबाद
जमीन से जुड़े विवादों और अदालतों में चल रहे मामलों में जमाबंदी की प्रमाणित नकल की बार-बार जरूरत पड़ती है। ऐसे में नकल फॉर्म की फीस एक रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये करना आम पक्षकारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालेगा। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों पर पड़ेगा। तत्काल सेवा के नाम पर पांच हजार रुपये फीस के प्रस्ताव पर भी पुनर्विचार करना चाहिए।- मोहन तिवारी, अधिवक्ता, फरीदाबाद कोर्ट
किसानों को जमीन के ऋण, फसल मुआवजे, किसान क्रेडिट कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए जमाबंदी की नकल की जरूरत पड़ती रहती है। कई बार एक ही जमीन के अलग-अलग कामों के लिए नकल निकलवानी पड़ती है। ऐसे में फॉर्म की कीमत 100 रुपये और तत्काल सेवा के लिए पांच हजार रुपये शुल्क रखना गलत है। सरकार को ग्रामीणों और किसानों की जरूरत को देखते हुए प्रस्तावित दरों को वापस लेना चाहिए।- बबलू हुड्डा, किसान नेता