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Faridabad News: फर्जी डेटा सेंटर व पॉन्जी स्कीम के नाम पर तीन करोड़ की ठगी

Sat, 25 Jul 2026 10:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 10:31 PM IST
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Fraud involving fake data centers and Ponzi schemes
डबुआ थाने में 13 आरोपियों व शेल कंपनियों पर प्राथमिकी दर्ज
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करीब 400 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। फर्जी डेटा सेंटर और पॉन्जी स्कीम के नाम पर तीन करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने करीब 400 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताते हुए जांच शुरू कर दी है।
पुलिस आयुक्त कार्यालय में 21 मई को आयोजित जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत और ईओडब्ल्यू एनआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना डबुआ में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सैनिक कॉलोनी निवासी सुरेश शर्मा, संजीन मदान, एनआईटी निवासी कीर्ति गुलाटी, संदीप कक्कड़, सेक्टर-31 निवासी राजकुमार सोनी, संजीव शर्मा, सतीश चंदर और डबुआ कॉलोनी निवासी राजेश सिंह व प्रियंका यादव की शिकायत पर मुख्य रूप से मैसर्स शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड (गांधीनगर, गुजरात) और इसकी शेल कंपनियों को नामजद किया गया है। 30 मार्च 2023 को बनी इस कंपनी को आईटी सेवाओं की अग्रणी संस्था बताकर प्रचारित किया गया, जबकि इसका इस्तेमाल रकम ऐंठने और शेल कंपनियों में घुमाने के लिए मुखौटे के रूप में हुआ। शिकायत में कंपनी के निदेशकों अरुण राय, उत्पल कुमार रामाभाई पटेल, ध्रुव चौधरी और भूमि पटेल के अलावा शेल कंपनियों क्लाउडजी टेक्नोलॉजी, अनुमुख इंडस्ट्रीज और हैरिस हॉस्पिटैलिटी लेजर के निदेशकों अरुणभाई, पांचाल सचिन कुमार, अनुपम चतुर्वेदी और मुकुल चतुर्वेदी को आरोपी बनाया गया है।
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शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने देश के विभिन्न शहरों में सेमिनार, प्रोमोशनल कैंपेन और डिजिटल विज्ञापनों के जरिए सेल एंड लीज बैक मॉडल का प्रचार किया था। ठगों ने एक टेराबाइट डेटा स्पेस की कीमत 38,940 रुपये तय की थी। निवेशकों को फंसाने के लिए उनसे शूट स्पेस नाम का एक मोबाइल एप डाउनलोड करवाया जाता था। इस एप में हर निवेशक की पर्सनल आईडी बनती थी और उनका वॉलेट एड्रेस अपडेट कराया जाता था, जो बिल्कुल किसी बैंकिंग एप की तरह दिखता था। एप में निवेश की रकम और उस पर मिलने वाला रिटर्न साफ दिखाई देता था। आरोपियों ने वादा किया था कि खरीदे गए एक टीबी डेटा स्पेस के बदले कंपनी निवेशक को 7 साल (84 महीने) तक लगातार 1,650 रुपये प्रति माह फिक्स्ड रेंट देगी। शुरुआत में पॉन्जी स्कीम के तहत पुराने निवेशकों को नियमित किराया भेजकर विश्वास जीता गया। भरोसा होते ही पीड़ितों ने अपने और अपने रिश्तेदारों के लगभग तीन करोड़ रुपये इस कंपनी में ट्रांसफर कर दिए।
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400 करोड़ रुपये के घोटाले का आकलन
शुरुआती मुनाफे के बाद मार्च 2026 से कंपनी ने अचानक बैंक खातों में किराया भेजना बंद कर दिया और फोन बंद कर लिए। दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा के दफ्तरों पर ताले लटके मिले। निवेशकों ने जब अपने स्तर पर पड़ताल की तो पता चला कि धरातल पर ऐसा कोई फिजिकल डेटा सेंटर या सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर था ही नहीं। ठगों ने केवल देशभर में आयोजित सेमिनार, डिजिटल विज्ञापनों और फर्जी एप के जरिए हजारों निवेशकों को फंसाया था। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने केवल फरीदाबाद ही नहीं, बल्कि देशभर के निवेशकों से जमा कराए गए करोड़ों रुपये को राउंड-ट्रिपिंग और लेयरिंग के जरिए अपनी शेल (फर्जी) कंपनियों में ट्रांसफर किया और उससे व्यक्तिगत संपत्तियां खरीद लीं। इसी नेटवर्क और देशव्यापी फर्जीवाड़े के आधार पर कुल घोटाला करीब 400 करोड़ रुपये होने का आकलन सामने आया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि पुलिस आयुक्त के आदेश पर थाना डबुआ में 24 जुलाई को बीएनएस की धारा 318(4) व 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तफ्तीश ईओडब्ल्यू एनआईटी को सौंप दी गई है।
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