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एक सप्ताह में किशोरी को आर्थिक मदद मुहैया कराई जाए: आयोग

Thu, 04 Jan 2024 10:16 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jan 2024 10:16 PM IST
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Financial assistance should be provided to the teenage girl within a week: Commission
चलती ट्रेन में मासूम से दुष्कर्म मामले में मदद में देरी पर राज्य बाल आयोग ने जताई नाराजगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। 13 साल की मासूम के साथ चलती ट्रेन में दुष्कर्म मामले में आर्थिक मदद मुहैया कराने में देरी को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने नाराजगी जाहिर की है। आयोग की तरफ से आदेश किए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर किशोरी को आर्थिक मदद मुहैया करवाई जाए। साथ ही इस मामले में अभी तक की स्टेट्स रिपोर्ट भी देने के निर्देश दिए हैं। जिसमें पुलिस और बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्ची को न्याय दिलाने के लिए किए गए प्रयास की जानकारी मांगी है।
राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य गणेश कुमार ने अमर उजाला को बताया मीडिया के माध्यम से उन्हें मामले की जानकारी मिली। उन्होंने सज्ञान लेते हुए तुरंत जिला बाल संरक्षण इकाई को आदेश दिया बच्ची के माता-पिता को बीस हजार रुपये की आर्थिक मदद एक सप्ताह के भीतर दी जाए। इसके अलावा केस से संबंधित भागदौड़ के लिए एक सदस्य को नियुक्त किया जाए। पुलिस विभाग से भी जवाब मांगा जाएगा कि मामले को दर्ज करने में डेढ़ साल का समय कैसे लग गया।
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गणेश कुमार का कहना है पूरे मामले को बारीकी से देखा जा रहा है। पीड़िता के माता पिता से भी जल्द मुलाकात की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी या पुलिस कर्मी के कारण न्याय मिलने में देरी हुई है को मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा।
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करीब डेढ़ साल बाद पुलिस ने केस दर्ज किया
बता दें साल 2022 में माता पिता के साथ अमेठी से फरीदाबाद आ रही 13 साल की बच्ची के साथ चलती ट्रेन में दुष्कर्म किया गया। पेट दर्द होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने बच्चे को जन्म दे दिया। करीब डेढ़ साल बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। परिवार के लोग रेलवे पुलिस और कोतवाली थाने के चक्कर लगाते रहे। इलाका विवाद को लेकर फरीदाबाद पुलिस और जीआरपी लखनऊ एक दूसरे के पाले में केस को फेंकते रहे। 11 जून 2023 को कोतवाली थाना पुलिस ने बच्ची के बयान दर्ज किए और पोक्सो एक्ट के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर ली। घटना स्थल लखनऊ उत्तर प्रदेश होने के कारण जीरो एफआईआर को कार्रवाई के लिए जीआरपी लखनऊ भेजा गया। पुलिस अधीक्षक रेलवे लखनऊ ने जीरो एफआईआर पर एतराज जताते हुए शिकायत को वापस थाना कोतवाली में भेज दिया। 28 जुलाई 2023 को पीड़िता के लीगल एड और बाल कल्याण समिति फरीदाबाद के सामने दोबारा से बयान दिए। अदालत में दिए बयान में पीड़िता और माता पिता ने घटनास्थल लखनऊ का बताया। पुलिस ने दोबारा से जीरो एफआईआर को जीआरपी थाना लखनऊ में भेज दिया। 22 दिसंबर 2023 को जीआरपी थाना लखनऊ चारबाग पीड़िता और परिवार को बयान देने के लिए बुलाया। वहां पीड़िता और माता पिता ने अपने केस की जांच फरीदाबाद की कोतवाली थाना पुलिस से ही करवाने की बात कही। 26 दिसंबर 2023 को जीआरपी लखनऊ चारबाग से थाना कोतवाली को पत्र मिला जिसके बाद 29 दिसंबर 2023 को थाना कोतवाली पुलिस ने 6 पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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