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Faridabad News: गणपति उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
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फरीदाबाद प्याली चौक के पास गणेश चतुर्थी की तैयारी को लेकर गणेश की प्रतिमा को विभिन्न रंगों से
यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए मंदिरों और सोसाइटियों में टब में होगा विसर्जन, इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को प्राथमिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार गणपति उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। शहर के कई मंदिरों, सेक्टरों और सोसाइटियों में गणपति बप्पा की इको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। उत्सव के बाद प्रतिमा का विसर्जन यमुना या अन्य जल स्रोतों में करने के बजाय मंदिर और सोसाइटी परिसर में पानी से भरे बड़े टब में किया जाएगा।
विसर्जन के बाद इस पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के साथ पानी की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी। एनआईटी-तिकोना पार्क स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में गणेश चतुर्थी का आयोजन 14 सितंबर से शुरू होगा। मंदिर परिसर को गणपति बप्पा के स्वागत के लिए विशेष रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उत्सव के दौरान प्रतिदिन भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए बाहर से भजन मंडली भी बुलाई जा रही है। गणपति बप्पा को प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के मोदक और फलों का भोग लगाया जाएगा, जिसे पूजा के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
बांके बिहारी मंदिर में भी इको-फ्रेंडली प्रतिमा
एनआईटी-5 स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित कर गणेश उत्सव मनाने की तैयारी है। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रतिमा के विसर्जन और अन्य व्यवस्थाओं को पर्यावरण के अनुकूल रखने पर जोर दिया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि अब लोग पर्यावरण को लेकर पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। इको-फ्रेंडली प्रतिमा और परिसर में विसर्जन की व्यवस्था से धार्मिक परंपरा भी निभेगी और जल स्रोतों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भी पर्यावरण हितैषी तरीके से गणपति उत्सव मनाने की अपील की है।
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बातचीत
गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। उत्सव पूरा होने के बाद प्रतिमा को मंदिर परिसर में ही पानी से भरे बड़े टब में विसर्जित किया जाएगा। विसर्जन के बाद पानी को पेड़-पौधों में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यमुना समेत अन्य जल स्रोतों में प्रदूषण नहीं फैलेगा।-- जगदीश भाटिया, प्रधान, मां वैष्णो देवी मंदिर
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सोसाइटी वासियों में गणपति उत्सव को लेकर काफी उत्साह रहता है। पिछले वर्ष सोसाइटी में गडढा खोदकर विसर्जन किया गया था। गड्ढे में पानी भर लिया गया था। सोसाइटी वासी पर्यावरण को लेकर काफी सचेत रहते हैं।-- जितेंद्र भल्ला, निवासी, आरपीएस सावना सोसाइटी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार गणपति उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। शहर के कई मंदिरों, सेक्टरों और सोसाइटियों में गणपति बप्पा की इको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। उत्सव के बाद प्रतिमा का विसर्जन यमुना या अन्य जल स्रोतों में करने के बजाय मंदिर और सोसाइटी परिसर में पानी से भरे बड़े टब में किया जाएगा।
विसर्जन के बाद इस पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के साथ पानी की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी। एनआईटी-तिकोना पार्क स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में गणेश चतुर्थी का आयोजन 14 सितंबर से शुरू होगा। मंदिर परिसर को गणपति बप्पा के स्वागत के लिए विशेष रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उत्सव के दौरान प्रतिदिन भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए बाहर से भजन मंडली भी बुलाई जा रही है। गणपति बप्पा को प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के मोदक और फलों का भोग लगाया जाएगा, जिसे पूजा के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
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बांके बिहारी मंदिर में भी इको-फ्रेंडली प्रतिमा
एनआईटी-5 स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित कर गणेश उत्सव मनाने की तैयारी है। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रतिमा के विसर्जन और अन्य व्यवस्थाओं को पर्यावरण के अनुकूल रखने पर जोर दिया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि अब लोग पर्यावरण को लेकर पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। इको-फ्रेंडली प्रतिमा और परिसर में विसर्जन की व्यवस्था से धार्मिक परंपरा भी निभेगी और जल स्रोतों को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भी पर्यावरण हितैषी तरीके से गणपति उत्सव मनाने की अपील की है।
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बातचीत
गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। उत्सव पूरा होने के बाद प्रतिमा को मंदिर परिसर में ही पानी से भरे बड़े टब में विसर्जित किया जाएगा। विसर्जन के बाद पानी को पेड़-पौधों में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यमुना समेत अन्य जल स्रोतों में प्रदूषण नहीं फैलेगा।
सोसाइटी वासियों में गणपति उत्सव को लेकर काफी उत्साह रहता है। पिछले वर्ष सोसाइटी में गडढा खोदकर विसर्जन किया गया था। गड्ढे में पानी भर लिया गया था। सोसाइटी वासी पर्यावरण को लेकर काफी सचेत रहते हैं।