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Faridabad News: बूंदाबांदी से बढ़ी ठंडक, हवा की गुणवत्ता में खास सुधार नहीं

Fri, 31 Oct 2025 12:05 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:05 AM IST
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Drizzle brings coolness, but air quality remains largely unchanged
जिले का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 दर्ज, ऐसी हवा में सांस लेना खतरनाक
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बृहस्पतिवार को पलवल में मौसम ने करवट बदली। सुबह से ही सूरज देवता के दर्शन नहीं हुए और दिनभर रुक-रुककर बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। हल्की बारिश ने ठंडक तो बढ़ा दी, लेकिन हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, जिले का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसी हवा में सांस लेना अस्थमा, हृदय और बुजुर्ग मरीजों के लिए खतरनाक है।

बारिश से हवा में नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक कण जमीन के करीब जम गए, जिससे प्रदूषण का असर बरकरार रहा। विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह की सैर से परहेज करने, मास्क पहनने और घर में तुलसी, अदरक व काली मिर्च का काढ़ा पीने की सलाह दी है। दूसरी ओर, हल्की बारिश से तापमान में 4 से 6 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे ठंड में इजाफा हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान 20 और अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस रहा।
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इस बीच, शहरवासियों ने मौसम में आई ठंडक महसूस की और गर्म कपड़े, रजाइयां निकाल लीं। हालांकि, लोगों ने शिकायत की कि प्रदूषण से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है। बारिश ने जहां राहत की उम्मीद जगाई, वहीं प्रदूषण और किसानों के नुकसान ने चिंता भी बढ़ा दी है।
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मंडियों में खुले में रखी धान की तीन हजार बोरियां भीगीं
इस बारिश का असर किसानों पर भारी पड़ा। जिले की अनाज मंडियों में खुले में रखी करीब तीन हजार बोरियां धान की भीग गईं, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। मंडियों में फसल रखने के पर्याप्त इंतजाम न होने पर किसानों ने नाराजगी जताई। किसान राजेंद्र सिंह, कमलेश कुमार, बृजेश और राजेंद्र जाखड़ ने बताया कि यदि मंडियों में शेड की सुविधा होती तो नुकसान से बचा जा सकता था। बारिश में भीगे धान का दाना अब काला पड़ने की आशंका है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि अक्टूबर माह में धान, कपास और बाजरे की कटाई का समय होता है, लेकिन बारिश ने फसल पर असर डाला है। अगर दो दिन में मौसम सामान्य नहीं हुआ तो कटाई में देरी होगी और लागत भी बढ़ेगी।
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