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Faridabad News: सड़क हादसे में बेटे की मौत मामले में 80 लाख मुआवजे का दावा खारिज
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चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर सके माता-पिता, हादसे के समय पिता मौके पर नहीं थे
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर पाने पर मेवला महाराजपुर मेट्रो स्टेशन के पास सड़क हादसे में बेटे की मौत के मामले में माता-पिता की ओर से दाखिल 80 लाख रुपये मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, फरीदाबाद के न्यायाधीश सुधीर जीवन ने पाया कि याचिकाकर्ता कार चालक की लापरवाही से हादसा होने का प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सके।
याचिका के अनुसार, 21 फरवरी 2020 की रात करीब 10 बजे 23 वर्षीय दिग्विजय सिंह मेवला महाराजपुर मेट्रो स्टेशन के पास मुख्य मथुरा रोड पार कर रहा था। इसी दौरान कार ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दिग्विजय को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके पिता शिशुपाल सिंह और मां देवेश्वरी देवी ने चालक और बीमा कंपनी से 80 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अधिकरण ने पाया कि पिता शिशुपाल सिंह हादसे के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने अदालत में गवाही दी लेकिन दुर्घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी। वहीं, प्राथमिकी दर्ज कराने वाला धर्मवीर भी हादसे का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। धर्मवीर ने पुलिस को बताया था कि वह हादसे की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचा था। वहां दिग्विजय गंभीर हालत में सड़क पर पड़ा था और कार का अगला शीशा टूटा हुआ था। चालक दीपांकर मंडल भी मौके पर मौजूद था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि दुर्घटना कार चालक की तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर पाने पर मेवला महाराजपुर मेट्रो स्टेशन के पास सड़क हादसे में बेटे की मौत के मामले में माता-पिता की ओर से दाखिल 80 लाख रुपये मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, फरीदाबाद के न्यायाधीश सुधीर जीवन ने पाया कि याचिकाकर्ता कार चालक की लापरवाही से हादसा होने का प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सके।
याचिका के अनुसार, 21 फरवरी 2020 की रात करीब 10 बजे 23 वर्षीय दिग्विजय सिंह मेवला महाराजपुर मेट्रो स्टेशन के पास मुख्य मथुरा रोड पार कर रहा था। इसी दौरान कार ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दिग्विजय को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके पिता शिशुपाल सिंह और मां देवेश्वरी देवी ने चालक और बीमा कंपनी से 80 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अधिकरण ने पाया कि पिता शिशुपाल सिंह हादसे के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने अदालत में गवाही दी लेकिन दुर्घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी। वहीं, प्राथमिकी दर्ज कराने वाला धर्मवीर भी हादसे का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। धर्मवीर ने पुलिस को बताया था कि वह हादसे की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचा था। वहां दिग्विजय गंभीर हालत में सड़क पर पड़ा था और कार का अगला शीशा टूटा हुआ था। चालक दीपांकर मंडल भी मौके पर मौजूद था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि दुर्घटना कार चालक की तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई।
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